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Bhopal Metro Controversy : कब्रिस्तान के नीचे से टनल पर घमासान! MLA रामेश्वर बोले – रूट बदलना है तो प्रोजेक्ट की लागत दे दे

Bhopal Metro Controversy

Bhopal Metro Controversy : मध्य प्रदेश। भोपाल में मेट्रो परियोजना को लेकर नया विवाद सामने आया है। शहर के पुराने कब्रिस्तान के नीचे से प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन पर वक्फ बोर्ड में सुनवाई चल रही है। इस मामले में 14 मई की तारीख तय की गई है। इस दिन मेट्रो प्रबंधन अपना पक्ष रखेगा। वक्फ बोर्ड के सामने दायर याचिका में मेट्रो निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है। इस विवाद के सामने आने के बाद शहर में राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

वक्फ संपत्तियों को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू

भोपाल टॉकीज क्षेत्र स्थित प्राचीन कब्रिस्तान और नारियलखेड़ा की वक्फ जमीन को लेकर विवाद अब कानूनी रूप ले चुका है। कमेटी इंतेजामियां औकाफ-ए-आम्मा ने मध्यप्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं।

 

याचिका में कहा गया है कि मेट्रो परियोजना के तहत वक्फ संपत्तियों पर निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई। समिति ने मांग की है कि जब तक पूरा मामला स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक निर्माण कार्य रोका जाए।

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हिंदू संगठनों ने भी जताई आपत्ति

इस पूरे विवाद में अब हिंदू संगठन भी खुलकर सामने आ गए हैं। हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि विकास कार्य सभी के लिए समान होना चाहिए। यदि किसी धर्म विशेष के धार्मिक स्थलों को बचाया जाता है, तो हिंदू धर्म स्थलों को हटाने का भी विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास कार्य में धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।

विकास कार्य को लेकर दिया बड़ा बयान

हिंदू संगठनों का कहना है कि मेट्रो जैसी परियोजनाएं सरकार की जरूरत और शहर के विकास को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। यह फैसला किसी विधायक या संगठन का नहीं होता। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज हमेशा विकास कार्यों में सहयोग करता आया है। लेकिन यदि केवल हिंदू धार्मिक स्थलों को हटाया जाएगा और दूसरे समुदायों के स्थलों को बचाया जाएगा, तो इसका विरोध किया जाएगा।

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अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन पर क्या है विवाद

याचिका में हमीदिया रोड स्थित मासूमा तकिया अम्मनशाह, मस्जिद नूरानी, मुल्लाशाह और अन्य पंजीकृत कब्रिस्तान क्षेत्रों के नीचे से मेट्रो लाइन निकालने पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह क्षेत्र धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। यहां हजारों कब्रें मौजूद हैं और यह भोपाल के सबसे पुराने कब्रिस्तानों में शामिल है।

नारियलखेड़ा की वक्फ जमीन पर भी उठे सवाल

नारियलखेड़ा क्षेत्र में भी मेट्रो निर्माण को लेकर विवाद सामने आया है। आरोप लगाया गया है कि वक्फ जमीन पर बिना अनुमति निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस मामले को लेकर वक्फ बोर्ड ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। अब इस पर आने वाले दिनों में सुनवाई होगी।

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बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा का बयान

बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा (MLA Rameshwar Sharma) ने इस मामले पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अंडरग्राउंड मेट्रो से किसी मस्जिद या कब्रिस्तान को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि मेट्रो लाइन जमीन से लगभग 20 से 30 फीट नीचे बनाई जाती है, जबकि कब्रिस्तान की गहराई बहुत कम होती है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में भी जामा मस्जिद क्षेत्र के नीचे से मेट्रो गुजरती है और वहां कोई परेशानी नहीं हुई।

रूट बदलने की मांग पर राजनीति तेज

रामेश्वर शर्मा ने कहा कि यदि कोई मेट्रो का रूट बदलना चाहता है, तो उसे परियोजना की अतिरिक्त लागत भी उठानी चाहिए। उन्होंने विरोध कर रहे लोगों से विकास कार्यों में बाधा नहीं डालने की अपील की। दूसरी ओर मुस्लिम समाज के कुछ संगठनों ने कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो निकालने पर चिंता जताई है। इसके बाद यह मुद्दा अब धार्मिक और राजनीतिक बहस का विषय बन गया है।

शहर में बढ़ी चर्चा और इंतजार

भोपाल में इस मुद्दे को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। शहर के लोग अब 14 मई की सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। इस सुनवाई में यह तय हो सकता है कि मेट्रो परियोजना पर आगे क्या फैसला लिया जाएगा। फिलहाल प्रशासन, वक्फ बोर्ड और सामाजिक संगठन अपने-अपने पक्ष पर कायम हैं।

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