MP Student Suicide Case : भोपाल। मध्य प्रदेश में एमपी बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट जारी होते ही जहां लाखों छात्रों के चेहरे खुशी से खिल उठे, वहीं कुछ छात्र अपने परिणाम से इतने निराश हुए कि उन्होंने गलत कदम उठाने की कोशिश की। बैतूल जिले के मुलताई में 12वीं के एक 17 वर्षीय छात्र ने फेल होने के बाद कीटनाशक पी लिया, जबकि छिंदवाड़ा के परासिया में 10वीं की छात्रा सानिया (17) ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
इन घटनाओं को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। खासकर जबलपुर के संवेदनशील स्थानों – तिलवारा घाट, भेड़ाघाट, बरगी डैम और गौरी घाट – पर पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है ताकि कोई भी छात्र भावनात्मक आवेश में अपनी जान को नुकसान न पहुंचाए।
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लाखों छात्रों ने दी परीक्षा
माध्यमिक शिक्षा मंडल (एमपी बोर्ड) द्वारा जारी परिणाम में इस बार 10वीं में 73.42% और 12वीं में करीब 76% छात्र पास हुए हैं। दोनों परीक्षाओं में मिलाकर लगभग 16 लाख छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। परिणाम आने के बाद जहां सफल छात्रों के घरों में जश्न का माहौल है, वहीं असफल छात्रों के बीच निराशा भी देखने को मिल रही है।
शिक्षा विभाग और स्कूलों द्वारा लगातार यह समझाया जा रहा है कि यह अंतिम मौका नहीं है। नई शिक्षा नीति के तहत अब ‘द्वितीय अवसर परीक्षा’ की व्यवस्था की गई है, जिससे छात्र दोबारा परीक्षा देकर अपने परिणाम में सुधार कर सकते हैं। इससे छात्रों को आगे बढ़ने का एक और अवसर मिलेगा।
मुलताई में छात्र ने उठाया खतरनाक कदम
बैतूल जिले के मुलताई में 12वीं के एक 17 वर्षीय छात्र ने फेल होने के बाद कीटनाशक पी लिया। छात्र ने खुद अपने पिता को इस बारे में बताया, जिसके बाद परिजन तुरंत उसे अस्पताल लेकर पहुंचे।
फिलहाल छात्र की हालत गंभीर बनी हुई है और डॉक्टर उसकी निगरानी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि छात्र एक निजी स्कूल में पढ़ता था और परिणाम आने के बाद मानसिक दबाव में आ गया था। यह घटना दिखाती है कि परीक्षा परिणाम का दबाव कई बार छात्रों के लिए कितना भारी हो सकता है।
छिंदवाड़ा में छात्रा ने दी जान
छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र में 10वीं की छात्रा सानिया (17) ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जानकारी के मुताबिक, वह अपने नाना-नानी के घर रह रही थी और रिजल्ट देखने के बाद मानसिक तनाव में आ गई थी। बताया गया कि वह तीन विषयों में फेल हो गई थी।
रिजल्ट देखने के बाद वह बाथरूम में गई और काफी देर तक बाहर नहीं आई। जब परिजनों ने दरवाजा तोड़ा तो वह फंदे पर लटकी मिली। इस घटना के बाद परिवार और पूरे इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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हर साल हजारों छात्र खो रहे हौसला
देशभर में छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, हर साल 10 हजार से ज्यादा छात्र अपनी जान गंवा देते हैं। वर्ष 2018 में 10,159, 2019 में 10,335, 2020 में 12,526, 2021 में 13,089 और 2022 में 13,044 मामलों दर्ज किए गए।
वहीं ICR3 Report 2024 के अनुसार, देश में होने वाले करीब 46% मामले महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्यों से सामने आते हैं। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि परीक्षा और करियर का दबाव युवाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
स्टूडेंट सुसाइड आंकड़े:
- महाराष्ट्र : 1,834
- मध्य प्रदेश : 1,308
- तमिलनाडु : 1,246
- कर्नाटक : 855
- ओडिशा : 834
नई शिक्षा नीति: अब मिलेगा दूसरा मौका
नई शिक्षा नीति के तहत इस साल से पूरक परीक्षा की जगह ‘द्वितीय अवसर परीक्षा’ का प्रावधान किया गया है, जो 7 मई 2026 से शुरू होगी। इसमें वे छात्र शामिल हो सकेंगे जो एक या अधिक विषयों में असफल रहे हैं या परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए थे।
खास बात यह है कि जो छात्र अपने अंकों में सुधार करना चाहते हैं, वे भी इस परीक्षा में बैठ सकते हैं। दोनों में से जो बेहतर परिणाम होगा, वही अंतिम रूप से मान्य किया जाएगा।
हालांकि, प्रायोगिक विषयों में केवल अनुत्तीर्ण भाग में ही शामिल होने की अनुमति होगी और विषय परिवर्तन की इजाजत नहीं होगी।