Sanjeevani Clinic Scam : जबलपुर। मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी योजना ‘मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक’ (CM Sanjeevani Clinic) में जबलपुर से बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इस योजना का उद्देश्य गरीबों को घर के पास मुफ्त इलाज और दवाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन जांच में खुलासा हुआ है कि इसे भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया गया। कई क्लीनिकों में न तो कंप्यूटर हैं, न बीपी मशीन, और न ही पिछले दो साल से पुताई हुई है, जबकि रिकॉर्ड में करोड़ों रुपये खर्च दिखाए गए हैं।
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की टीम और डिप्टी कलेक्टर आरएस मरावी की जांच में सामने आया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बिना सामान खरीदे ही करीब पौने दो करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। जांच शुरू होने से तीन दिन पहले कुछ सेंटरों पर जल्दबाजी में प्रिंटर भेजे गए, जबकि वहां कंप्यूटर तक मौजूद नहीं हैं।
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जांच में सामने आई बड़ी गड़बड़ियां
डिप्टी कलेक्टर की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार करीब 93 लाख रुपये का सामान न तो स्टोर में मिला और न ही किसी क्लीनिक में। भंडार शाखा के रजिस्टर में फर्जी एंट्रियां पाई गईं। कई जगहों पर अलमारियां तक नहीं हैं, जबकि उनके नाम पर भुगतान हो चुका है।
भोपाल तक के अधिकारी शामिल होने की आशंका
क्लीनिकों की मरम्मत और पुताई के नाम पर भी लाखों रुपये निकाल लिए गए, लेकिन हकीकत में दो साल से किसी भी केंद्र में रंग-रोगन नहीं हुआ।
जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है और इसमें भोपाल तक के कुछ बड़े अधिकारियों की संलिप्तता की आशंका जताई गई है।
कैसे हुआ घोटाला
जांच में सामने आया कि 13 फर्जी बिलों के जरिए ऐसी सामग्री का भुगतान किया गया जो कभी खरीदी ही नहीं गई। इन बिलों के माध्यम से करीब 1.75 करोड़ रुपये का भुगतान विभिन्न फर्मों को किया गया।
कागजों पर क्लीनिकों की मरम्मत और पुताई दिखाकर लाखों रुपये निकाल लिए गए। वहीं बीपी मशीन, ग्लूकोज मशीन, हीमोग्लोबिनोमीटर और वजन मापने वाली मशीन जैसी जरूरी चीजें सिर्फ रिकॉर्ड में खरीदी गईं, लेकिन क्लीनिकों तक नहीं पहुंचीं।
जांच का दबाव बढ़ने पर अधिकारियों ने आनन-फानन में कुछ सेंटरों पर प्रिंटर भिजवा दिए। डॉक्टरों ने सवाल उठाया कि जब कंप्यूटर ही नहीं है, तो प्रिंटर का क्या उपयोग होगा।
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डॉक्टरों की मजबूरी
गोरैया घाट क्लीनिक में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर डॉ. सौम्या अग्रवाल ने बताया कि वे पिछले दो साल से अपने निजी टैबलेट से मरीजों की एंट्री कर रही हैं। जरूरी उपकरणों की मांग लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन अब जांच शुरू होने के बाद ही कुछ सामान भेजा जा रहा है।
50 क्लीनिक लेकिन बुनियादी सुविधाओं का अभाव
जबलपुर में करीब 50 संजीवनी क्लीनिक संचालित हैं, लेकिन अधिकांश केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। जिन उपकरणों के नाम पर भुगतान हुआ, वे कहीं भी उपलब्ध नहीं हैं।
घोटाला 10 करोड़ तक पहुंचने की आशंका
अब तक 93 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आ चुकी है, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर यह आंकड़ा 10 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकता है। बताया जा रहा है कि डॉ. संजय मिश्रा पिछले 10 साल से जबलपुर में विभिन्न पदों पर पदस्थ थे और अब उनकी भूमिका की भी जांच हो रही है।
बड़ी कार्रवाई, अधिकारी निलंबित
इस मामले में ज्वाइंट डायरेक्टर (हेल्थ) और सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा को मुख्य आरोपी मानते हुए निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (DPMU) के अधिकारियों को हटाया गया है, एक फार्मासिस्ट को निलंबित किया गया है और संविदा फार्मासिस्ट के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
पूरे मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे तथा कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।