Israel Airstrike : तेहरान। मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजराइल युद्ध अब और ज्यादा गंभीर होता जा रहा है। जंग के 28 दिन बाद हालात और बिगड़ गए हैं और इसमें नए पक्ष भी शामिल होते नजर आ रहे हैं। इजराइल ने शुक्रवार रात ईरान के अंदर बड़े पैमाने पर हमला किया।
इजराइल की सेना ने करीब 50 फाइटर जेट्स से ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े केंद्र शामिल थे। अराक और यज्द जैसे महत्वपूर्ण इलाकों में भी हमले किए गए।
खुफिया जानकारी के आधार पर की एयरस्ट्राइक
इजराइल का दावा है कि ये कार्रवाई खुफिया जानकारी के आधार पर की गई और इसका मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना था। वहीं, अराक स्थित हेवी वॉटर प्लांट को भी निशाना बनाया गया, जिसे परमाणु कार्यक्रम के लिए अहम माना जाता है।
दूसरी तरफ ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। इस हमले में कई सैनिक घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
UAE पर हजारों ड्रोन और मिसाइल हमले
इस बीच खबरें हैं कि UAE भी इस जंग में शामिल हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान पहले ही UAE पर हजारों ड्रोन और मिसाइल हमले कर चुका है, हालांकि ज्यादातर हमलों को एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया। इजराइल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्से के लोगों को अपने घर खाली करने का आदेश भी दिया है। इससे साफ है कि जंग का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
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अगला नंबर क्यूबा का !
इसी बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने भी बयान देकर तनाव बढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि “अगला नंबर क्यूबा का हो सकता है”, हालांकि बाद में उन्होंने इस बयान से पीछे हटने की कोशिश की।
खाड़ी देशों में भी हालात गंभीर हैं। बहरीन ने अब तक सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम किया है। वहीं ओमान, कुवैत और जॉर्डन में भी हमलों की खबरें सामने आई हैं।
जंग का असर वैश्विक स्तर पर
इस जंग का असर वैश्विक स्तर पर भी दिखने लगा है। तेल की कीमतों में तेजी आई है और होर्मुज स्ट्रेट के प्रभावित होने से हजारों जहाज और करीब 20,000 नाविक समुद्र में फंसे हुए हैं।
वहीं भारत ने इस पूरे मामले में शांति की अपील की है। नरेंद्र मोदी ने पहले ही कहा है कि क्षेत्र में तनाव कम होना चाहिए और सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। लगातार हो रहे हमलों और नए देशों की संभावित एंट्री से यह संघर्ष और बड़ा रूप ले सकता है, जिससे पूरी दुनिया पर असर पड़ने की आशंका है।