Iran Israel US War : तेहरान। मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी जंग अब 27वें दिन में पहुंच चुकी है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। अमेरिका ने ईरान को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर उसने हार नहीं मानी, तो उस पर पहले से भी ज्यादा ताकत के साथ हमला किया जाएगा।
क्या बोलीं व्हाइट हाउस की प्रवक्ता
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं और जरूरत पड़ने पर और कड़े कदम उठाए जाएंगे। दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका के सीजफायर प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है और साफ कर दिया है कि वह ट्रम्प की शर्तों पर जंग खत्म करने को तैयार नहीं है।
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कोई बातचीत नहीं चल रही
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि फिलहाल कोई वास्तविक बातचीत नहीं चल रही है और जो देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं, उनकी पहल को बातचीत की शुरुआत नहीं माना जा सकता। इससे साफ है कि दोनों पक्षों के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता जा रहा है और फिलहाल शांति की कोई ठोस उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
भारत को होमुर्ज से गुजरने की अनुमति
इस बीच एक अहम घटनाक्रम में ईरान ने भारत समेत कुछ ‘मित्र देशों’ को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दे दी है। मुंबई स्थित ईरानी कॉन्सुलेट के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों के जहाजों को कुछ शर्तों के साथ इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने की छूट दी गई है।
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यह भारत के लिए राहत भरी खबर है, क्योंकि भारत अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें बड़ी हिस्सेदारी खाड़ी देशों से आती है। होर्मुज स्ट्रेट खुला रहने से न केवल तेल सप्लाई सुचारू बनी रहेगी, बल्कि ट्रांसपोर्ट लागत और इंश्योरेंस खर्च में भी कमी आएगी।
15 बिंदुओं वाला अमेरिका का प्रस्ताव
अमेरिका ने युद्ध खत्म करने के लिए ईरान को 15 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव भेजा है, जिसे पाकिस्तान के जरिए तेहरान तक पहुंचाया गया है। इस प्रस्ताव में ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रोक, यूरेनियम संवर्धन सीमित करने, बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर नियंत्रण और होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने जैसी अहम शर्तें शामिल हैं।
इसके बदले में अमेरिका ने आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग देने की बात कही है। हालांकि ईरान के रुख को देखते हुए इस प्रस्ताव के स्वीकार होने की संभावना फिलहाल कम ही दिखाई दे रही है।
अमेरिकी F/A-18 फाइटर जेट को मार गिराया
जंग के बीच दावों और जवाबी दावों का दौर भी जारी है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी F/A-18 फाइटर जेट को मार गिराया, लेकिन अमेरिका ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। इसी दौरान ईरान के शिराज इलाके में हुए हमले में दो बच्चों की मौत की खबर भी सामने आई है, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए हैं।
तेल बाजार पर युद्ध का ज्यादा असर
दुनियाभर में इस युद्ध का सबसे बड़ा असर तेल बाजार पर देखने को मिल रहा है। कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं और विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सप्लाई सामान्य नहीं होती, तब तक कीमतों में गिरावट मुश्किल है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर चीन अपने बड़े तेल भंडार को बाजार में उतारे, तभी कीमतों में वास्तविक राहत मिल सकती है।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष अब वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है। एक तरफ सैन्य तनाव बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर ऊर्जा, व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर गहराता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं या यह टकराव और बड़े स्तर पर फैलता है।