Aslam Chamda Bail : भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सामने आए गोमांस तस्करी के बहुचर्चित मामले में मुख्य आरोपी असलम कुरैशी उर्फ चमड़ा को सेशन कोर्ट से जमानत मिल गई है। करीब 70 दिन जेल में रहने के बाद अदालत ने 35 हजार रुपए के मुचलके पर उसे रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, जमानत मिलने के तुरंत बाद आरोपी के कथित रूप से गायब हो जाने से मामला और भी सवालों के घेरे में आ गया है।
ये है पूरा मामला
यह पूरा मामला 17 दिसंबर 2025 का है, जब जहांगीराबाद इलाके में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने एक कंटेनर पकड़ा था। इस कंटेनर में करीब 26 टन मांस भरा हुआ था, जिसे मुंबई भेजा जा रहा था। आरोप लगाया गया कि यह मांस अवैध रूप से गोवंश के कत्ल के बाद बाहर भेजा जा रहा था।
पुलिस ने मांस के सैंपल लेकर जांच के लिए मथुरा की फॉरेंसिक लैब भेजे, जहां से आई रिपोर्ट में गोमांस होने की पुष्टि हुई। इसके बाद 8 जनवरी 2026 को जहांगीराबाद थाने में मामला दर्ज कर असलम कुरैशी और उसके ड्राइवर शोएब को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
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500 पेज की चार्जशीट कोर्ट में पेश
जांच के दौरान विशेष जांच दल (SIT) ने पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की। 25 जनवरी को आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई और 6 मार्च को करीब 500 पेज की चार्जशीट कोर्ट में पेश की गई। जांच में यह भी देखा गया कि कहीं यह नेटवर्क देश के बाहर तक तो नहीं फैला हुआ है।
पुलिस जांच में कई खामियां
मामले की गंभीरता को देखते हुए निचली अदालत ने पहले ही जमानत याचिका खारिज कर दी थी। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी जयदीप मौर्य की अदालत ने इसे गंभीर अपराध माना था लेकिन बाद में सेशन कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील एडवोकेट जगदीश गुप्ता ने दलील दी कि आरोपी निर्दोष है और पुलिस जांच में कई खामियां हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि हैदराबाद की रिपोर्ट अभी लंबित है और कंटेनर में भरा मांस असलम का नहीं, बल्कि आगरा की एक कंपनी का था। साथ ही यह तर्क भी रखा गया कि स्लॉटरिंग से पहले डॉक्टर द्वारा जांच की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
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आरोपी की जमानत का विरोध
दूसरी ओर, जय मां भवानी संगठन के प्रमुख भानू हिंदू ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि इससे लोगों की भावनाएं आहत होंगी और जरूरत पड़ने पर विरोध किया जाएगा। उन्होंने आरोपी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने की मांग भी की।
आदेश में कोर्ट ने क्या कहा?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार जैन की अदालत ने जमानत मंजूर कर ली। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित अपराध न तो मृत्युदंड और न ही आजीवन कारावास से दंडनीय है। आरोपी दो महीने से अधिक समय से हिरासत में है, जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट पेश की जा चुकी है।
ऐसे में ट्रायल में समय लगने की संभावना को देखते हुए जमानत देना उचित माना गया। साथ ही यह शर्त रखी गई कि आरोपी ट्रायल में बाधा नहीं डालेगा और बिना अनुमति देश से बाहर नहीं जाएगा।
गायब हो गया असलम कुरैशी
हालांकि, जमानत के बाद घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। जानकारी के अनुसार, भोपाल सेंट्रल जेल से रिहा होने के बाद असलम कुरैशी अचानक गायब हो गया। उसके भाई आसिफ का कहना है कि जब वे उसे लेने जेल पहुंचे, तो उन्हें मिलने नहीं दिया गया। आरोप है कि जैसे ही असलम जेल से बाहर आया, एक पुलिस गाड़ी उसे अपने साथ ले गई।
परिवार ने रात साढ़े 8 बजे से उसकी तलाश शुरू की और गांधी नगर थाने समेत कई जगह जानकारी ली, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। वहीं पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने इस मामले में किसी भी जानकारी से इनकार किया है।
रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है, असलम कुरैशी का नाम शहर के अन्य ठेकों, खासकर वन विहार से जुड़े कार्यों में भी सामने आ रहा है, जहां मृत पशुओं को उठाने का काम किया जाता है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अब इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की गहराई तक पहुंच पाई हैं या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। 26 टन मांस, 500 पेज की चार्जशीट और गंभीर आरोपों के बावजूद जमानत मिलना और फिर आरोपी का अचानक गायब हो जाना इस केस को और ज्यादा संवेदनशील बना रहा है।