MP Employees Relief :मध्य प्रदेश के करीब 7 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। अब रिटायरमेंट के समय मिलने वाली अर्जित अवकाश (Earned Leave) नकदीकरण राशि का हिसाब लगाना आसान हो जाएगा। वित्त विभाग ने साफ कर दिया है कि लीव इनकैशमेंट की गणना किन आधारों पर होगी और कर्मचारी खुद भी इसका अनुमान लगा सकेंगे।
क्या होता है अवकाश नकदीकरण?
सरकारी नौकरी के दौरान कर्मचारियों के खाते में अर्जित अवकाश (ईएल) जमा होते रहते हैं। जब कर्मचारी रिटायर होता है या सेवा के दौरान उसकी मृत्यु हो जाती है, तब बचे हुए अवकाश के बदले सरकार एकमुश्त राशि देती है। इसी को अवकाश नकदीकरण कहा जाता है।
गणना में किन बातों को जोड़ा जाएगा?
वित्त विभाग के अनुसार लीव इनकैशमेंट की राशि तय करते समय इन बातों को ध्यान में रखा जाएगा
1 कर्मचारी के खाते में बचे अर्जित अवकाश
2 पहले लिया गया अवकाश नकदीकरण
3 रिटायरमेंट के समय का मूल वेतन
4 महंगाई भत्ता (DA)
5 कुल पात्र अवकाश
300 दिन तक का मिलेगा लाभ
सरकार के नियम के मुताबिक अधिकतम 300 दिन के अर्जित अवकाश का भुगतान किया जाएगा। अगर कर्मचारी पहले कुछ दिनों का अवकाश नकदीकरण ले चुका है तो उतने दिन 300 दिन की सीमा से घटा दिए जाएंगे।
ऐसे समझिए पूरा हिसाब
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पहला उदाहरण
मान लीजिए किसी कर्मचारी के पास 270 दिन का अर्जित अवकाश बचा है और वह पहले 30 दिन का नकदीकरण ले चुका है।
* मूल वेतन: ₹1 लाख
* डीए: ₹58 हजार
* कुल मासिक राशि: ₹1.58 लाख
इस स्थिति में कर्मचारी को लगभग ₹13.43 लाख का अवकाश नकदीकरण मिलेगा। अन्य देयकों को जोड़ने पर कुल भुगतान करीब ₹14.22 लाख तक पहुंच सकता है।
दूसरा उदाहरण
अगर किसी कर्मचारी के पास पूरे 300 दिन का अर्जित अवकाश है और उसने पहले कभी नकदीकरण नहीं लिया है—
* मूल वेतन: ₹56,100
* डीए: ₹32,538
* कुल राशि: ₹88,638
ऐसे कर्मचारी को करीब ₹8.86 लाख का भुगतान मिल सकता है।
कर्मचारियों को क्या फायदा होगा?
अब कर्मचारियों को रिटायरमेंट से पहले ही अंदाजा लग जाएगा कि उन्हें कितनी राशि मिलने वाली है। इससे विभागों में गणना को लेकर होने वाली गलतियां और विवाद भी कम होंगे। साथ ही सभी विभागों में एक जैसी प्रक्रिया लागू हो सकेगी।
क्यों है यह फैसला अहम?
अब तक कई कर्मचारी यह समझ नहीं पाते थे कि लीव इनकैशमेंट की रकम कैसे तय होती है। नए निर्देशों के बाद पूरा फॉर्मूला साफ हो गया है, जिससे कर्मचारी अपने रिटायरमेंट लाभ का अनुमान पहले से लगा सकेंगे और आर्थिक योजना बेहतर तरीके से बना पाएंगे।