Jagannath Temple Ratna Bhandar : पुरी। ओडिशा के जगन्नाथ मंदिर पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ के रत्न भंडार की गणना प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सदियों से रहस्य और आस्था का केंद्र रहे इस खजाने की गिनती को लेकर देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
आंतरिक रत्न भंडार की हो रही गिनती
गणना का काम चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। पहले चरण में चलित खजाने की गिनती की गई, जिसमें भगवान के दैनिक श्रृंगार में उपयोग होने वाले आभूषण रखे जाते हैं।
इसके बाद बाहरी खजाने की गणना पूरी हुई, जिसमें उत्सव और विशेष अवसरों पर इस्तेमाल होने वाले आभूषण शामिल हैं। अब सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील माने जाने वाले आंतरिक रत्न भंडार की गिनती की जा रही है, जहां बेशकीमती और दुर्लभ आभूषण सुरक्षित रखे गए हैं।
3D मैपिंग, वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की जा रही
इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। गिनती के दौरान 3D मैपिंग, वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की जा रही है, ताकि हर वस्तु का सही रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। सुरक्षा के लिहाज से केवल गणना समिति के अधिकृत सदस्यों को ही रत्न भंडार के अंदर जाने की अनुमति दी गई है।
रत्न भंडार की गिनती 13 अप्रैल से हुई शुरू
जानकारी के अनुसार, आंतरिक रत्न भंडार की गिनती 13 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और यह प्रक्रिया 16 से 18 अप्रैल के बीच भी जारी रहेगी। इस संवेदनशील कार्य को लेकर पहले एक अहम बैठक भी आयोजित की गई थी, जिसमें गिनती के नियम और प्रक्रिया तय की गई।
बहुमूल्य रत्न और दुर्लभ आभूषण सुरक्षित
मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के बहुमूल्य रत्न और दुर्लभ आभूषण सुरक्षित हैं। इन आभूषणों को विभिन्न कालखंडों में राजा-महाराजाओं और श्रद्धालुओं ने भगवान को अर्पित किया था।
पुरी का यह रत्न भंडार न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अब भक्तों को उस क्षण का इंतजार है, जब इस खजाने से जुड़े रहस्य दुनिया के सामने आएंगे।