Gold-Silver Crash : मुंबई। वैश्विक आर्थिक दबाव का असर अब शेयर बाजार के साथ-साथ कमोडिटी बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सप्ताह की शुरुआत में सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। घरेलू वायदा बाजार से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक की संभावित ब्याज दर नीति और डॉलर की मजबूती के कारण निवेशकों का रुझान फिलहाल बदलता नजर आ रहा है। हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह स्थिति अवसर भी बन सकती है।
MCX पर सोना और चांदी दोनों में आई बड़ी गिरावट
सोमवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में सोने की कीमत में लगभग 1,000 रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान सोना 1,022 रुपये यानी करीब 0.71 प्रतिशत टूटकर 1,43,140 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
वहीं चांदी की कीमत में भी तेज कमजोरी देखने को मिली। चांदी करीब 1,900 रुपये से अधिक गिरकर 2,19,522 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार करती दिखाई दी। इस गिरावट ने निवेशकों और कारोबारियों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
फेड की नीति और डॉलर की मजबूती बनी बड़ी वजह
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोना और चांदी की कीमतों में आई इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना है। जब ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीद बनती है, तब डॉलर मजबूत होता है।
मजबूत डॉलर का सीधा असर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं की मांग पर पड़ता है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर महंगाई को लेकर भी चिंता बनी हुई है। यदि भविष्य में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी होती है तो निवेशकों की रणनीति में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
जून महीने में लगातार फिसले सोना और चांदी के भाव
पूरे जून महीने के दौरान सोना और चांदी लगातार दबाव में रहे हैं। मई के आखिर में MCX पर चांदी की कीमत करीब 2.67 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। अब इसका भाव घटकर करीब 2.19 लाख रुपये रह गया है। यानी एक महीने में लगभग 48 हजार रुपये या करीब 18 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है।
इसी तरह सोना भी 29 मई को लगभग 1.61 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर पर था। इसके बाद इसमें करीब 18 हजार रुपये या लगभग 11 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। यह बदलाव बाजार की बदलती परिस्थितियों को दर्शाता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बना हुआ है दबाव
घरेलू बाजार ही नहीं बल्कि वैश्विक बाजार में भी सोना और चांदी की कीमतों में कमजोरी बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव करीब 26 डॉलर प्रति औंस गिरकर 4,062 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया।
वहीं चांदी भी करीब 2 डॉलर प्रति औंस की गिरावट के साथ लगभग 58 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखाई दी। इससे साफ है कि यह गिरावट केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं है बल्कि इसका असर दुनिया के कई प्रमुख बाजारों में देखने को मिल रहा है।
क्या अभी सोना और चांदी खरीदना सही रहेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई निवेशक लंबी अवधि के लिए सोना और चांदी में निवेश करना चाहता है तो मौजूदा गिरावट उसके लिए अवसर बन सकती है। हालांकि निवेश एक साथ बड़ी राशि से करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से करना बेहतर माना जाता है।
इससे बाजार में आने वाले उतार-चढ़ाव का असर कम होता है। निवेशकों को वैश्विक आर्थिक घटनाओं और डॉलर की चाल पर भी लगातार नजर रखनी चाहिए ताकि समय के अनुसार सही फैसला लिया जा सके।
पोर्टफोलियो संतुलित रखना भी जरूरी
बाजार विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशकों को अपने कुल निवेश का सीमित हिस्सा ही सोना और चांदी में लगाना चाहिए। आम तौर पर पोर्टफोलियो का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कीमती धातुओं में नहीं रखना चाहिए।
इससे किसी भी नकारात्मक वैश्विक माहौल या बाजार में अचानक आने वाली गिरावट का असर पूरे निवेश पर कम पड़ता है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना भी एक समझदारी भरा कदम माना जाता है।