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Bengal Elections 2026 : 100 सीटों पर टिकी सत्ता की चाबी, बदलते समीकरणों से बढ़ी सियासी हलचल

Bengal Elections 2026

Bengal Elections 2026 : कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार सत्ता का रास्ता उन करीब 100 विधानसभा सीटों से होकर गुजरता दिख रहा है, जहां पिछली बार हार-जीत का अंतर बेहद कम रहा था। चुनावी दावों और वादों के बीच जमीनी स्तर पर सियासी समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं, जिससे मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) का दावा है कि तृणमूल कांग्रेस पहले से ज्यादा सीटें जीतकर चौथी बार सरकार बनाएगी। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने भारतीय जनता पार्टी के लिए 170 सीटों का लक्ष्य तय किया है।

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100 सीटों का निर्णायक गणित

राज्य के 23 जिलों में फैली ये करीब 100 सीटें चुनाव का केंद्र बन गई हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 2024 लोकसभा चुनाव के आधार पर लगभग 119 विधानसभा सीटों पर जीत-हार का अंतर 100 से 15 हजार वोटों के बीच रहा था। कई सीटों पर यह अंतर 100 वोट से भी कम था।

अगर 2021 विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को देखें, तो एक से 15 हजार वोटों के अंतर वाली सीटों की संख्या 101 थी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन सीटों पर मामूली वोट स्विंग भी पूरे नतीजे को पलट सकता है।

इन 100 सीटों में कोलकाता और आसपास की करीब 40 सीटें शामिल हैं। इसके अलावा उत्तर बंगाल, मुर्शिदाबाद, बांकुड़ा, पुरुलिया और पूर्व व पश्चिम मेदिनीपुर जिलों की कई सीटें भी इस श्रेणी में आती हैं।

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शहरी इलाकों में भी बदलेगा खेल

ग्रेटर कोलकाता की 126 सीटों में से भाजपा को पिछली बार केवल 18 सीटें मिली थीं, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने 107 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कोलकाता, हावड़ा और दक्षिण 24 परगना में भाजपा का खाता तक नहीं खुल पाया था।

हालांकि उत्तर 24 परगना, नदिया और हुगली जैसे जिलों में भाजपा को कुछ सीटें मिली थीं, जहां मतुआ वोट बैंक अहम भूमिका निभाता है। इन क्षेत्रों में दो से तीन प्रतिशत वोटों का बदलाव भी चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल सकता है।

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वोटर लिस्ट में बदलाव से बदला समीकरण

इस बार चुनावी गणित को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला कारक मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) माना जा रहा है। इसमें मृत, अवैध और स्थानांतरित करीब 91 लाख नाम हटाए गए हैं।

इसका सबसे ज्यादा असर सीमावर्ती जिलों जैसे मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और उत्तर व दक्षिण 24 परगना में देखने को मिल सकता है। इन बदलावों से कई सीटों पर वोट बैंक का संतुलन प्रभावित होने की संभावना है।

पिछले चुनावों के आंकड़े क्या कहते हैं

2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को करीब 2.90 करोड़ वोट (48.46%) मिले थे, जबकि भारतीय जनता पार्टी को करीब 2.29 करोड़ वोट (37.98%) प्राप्त हुए थे। वहीं 2024 लोकसभा चुनाव में तृणमूल को करीब 2.76 करोड़ वोट मिले, जबकि भाजपा को 2.34 करोड़ वोट हासिल हुए, जो कुल वोटों का लगभग 39.10 प्रतिशत था।

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निर्णायक होगी छोटी बढ़त

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन 100 सीटों पर मामूली अंतर ही सत्ता का फैसला करेगा। यदि किसी भी पार्टी ने इन सीटों पर अपने वोट प्रतिशत में थोड़ी बढ़त हासिल कर ली, तो पूरे चुनाव का परिणाम बदल सकता है।

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में इस बार का चुनाव बेहद कांटे का मुकाबला बनने जा रहा है, जहां हर वोट की अहमियत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

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