Supreme Court: बुजुर्ग माता-पिता को परेशान करना पड़ेगा भारी! सुप्रीम कोर्ट ने बेटा-बहू को लेकर सुनाया बड़ा फैसला
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मान के लिए ट्रिब्यूनल जरूरत पड़ने पर बेटे-बहू को संपत्ति से बेदखल कर सकता है।
Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बुजुर्गों के भरण-पोषण, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के लिए ट्रिब्यूनल जरूरत पड़ने पर बेटे-बहू या अन्य रिश्तेदारों को उनकी संपत्ति से बेदखल करने का आदेश दे सकता है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें बेदखली के आदेश को निरस्त किया गया था।
बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए बेदखली का अधिकार
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करना कानून का प्रमुख उद्देश्य है। यदि किसी बुजुर्ग को उसके ही घर में परेशानी, उपेक्षा या असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है, तो ट्रिब्यूनल कानून के तहत उचित कार्रवाई कर सकता है।
81 वर्षीय बुजुर्ग को वृद्धाश्रम भेजने का आरोप
यह मामला लखनऊ के विकास नगर स्थित एक मकान से जुड़ा है। मकान मालिक रवि कांत गुप्ता ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे ने उनकी 81 वर्षीय मां यानी अपनी दादी को घर में रहने नहीं दिया। कथित तौर पर बुजुर्ग महिला को घर छोड़ना पड़ा और बाद में उन्हें वृद्धाश्रम जाना पड़ा। इसके बाद गुप्ता ने बेटे को संपत्ति से बेदखल करने की मांग की थी।
DM के आदेश को हाईकोर्ट ने किया था रद्द
एसडीएम और जिला मजिस्ट्रेट ने जांच के बाद मकान को रवि कांत गुप्ता की स्व-अर्जित संपत्ति माना और बेटे-बहू को मकान से बाहर करने का आदेश दिया था। हालांकि, बेटे और बहू ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने बेदखली के आदेश को रद्द कर दिया था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- बुजुर्गों की गरिमा सर्वोपरि
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण, संरक्षण और गरिमा को सुनिश्चित करने के लिए ट्रिब्यूनल बेदखली का आदेश दे सकता है। कोर्ट ने कहा कि बढ़ती उम्र का मतलब उपेक्षा, असुरक्षा या अपमान नहीं होना चाहिए। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 21 और 41 का भी उल्लेख करते हुए बुजुर्गों के सम्मानजनक जीवन के अधिकार पर जोर दिया।