सागर में जहरीली शराब से अब तक 21 लोगों की मौत, अस्पताल में 120 लोग भर्ती, व्हील चेयर पर किया जा रहा इलाज
घटना के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अवैध शराब की सप्लाई और इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
MP News: मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। शराब कांड में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 120 से ज्यादा लोगों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। बड़ी संख्या में मरीजों के अस्पताल पहुंचने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ गया है। जगह कम होने पर मरीजों को व्हील चेयर पर बिठाकर इलाज किया जा रहा है।
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में बढ़ रही मरीजों की संख्या
बंडा क्षेत्र के गूगरा खुर्द और आसपास के गांवों में शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया था। इसके बाद एक के बाद एक मरीज अस्पताल पहुंचने लगे। किसी को उल्टी, पेट दर्द और कमजोरी की शिकायत थी तो कई मरीजों की हालत गंभीर बताई गई। गंभीर मरीजों को सागर के मेडिकल कॉलेज सहित दूसरे अस्पतालों में रेफर किया गया।
सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में लगातार मरीज पहुंच रहे हैं। अचानक बड़ी संख्या में मरीज आने से अस्पताल की व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ गया है। स्थिति यह है कि जगह की कमी के चलते कुछ मरीजों को व्हीलचेयर पर बिठाकर इलाज करना पड़ रहा है।
21 लोगों की हुई मौत
मृतकों की पहचान सुमेर सिंह दांगी(47), गोविंद सिंह(62), गोलू लोधी(45), उजियार सिंह(56), दिग्विजय लोधी(28), कम्मू(50), करतार सिंह(30), रामप्रसाद सिंह लोधी, राजेंद्र लोधी(32), रोशन लोधी(30), हरनाम राय(42), सचिन(25), कुलदीप दांगी(20), राजकुमार लोधी(47), सुरेंद्र अहिरवार(35), उत्तम नत्थू नायक(42), महेश रावत(55), कृष्ण कुमार लोधी, श्याम बाई अहिरवार(50), भगवान सिंह(35) और देश कुमार लोधी के रूप में हुई है।
गांवों में मातम, परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
शराब कांड के बाद बंडा और आसपास के गांवों में कई परिवारों में मातम पसरा है। जिन परिवारों के सदस्य अस्पताल में भर्ती हैं, उनके परिजन इलाज और स्वास्थ्य की जानकारी के लिए अस्पतालों के चक्कर लगा रहे हैं। वहीं जिन परिवारों ने अपनों को खो दिया, उनके सामने अब आर्थिक और सामाजिक संकट भी खड़ा हो गया है।
घटना के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अवैध शराब की सप्लाई और इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। शुरुआती जांच में शराब की सप्लाई को लेकर उत्तर प्रदेश के ललितपुर कनेक्शन की बात भी सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि शराब कहां तैयार हुई, किसने इसे सागर तक पहुंचाया और गांवों में इसकी बिक्री किस नेटवर्क के जरिए की जा रही थी।
आबकारी विभाग और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
पूरे मामले ने आबकारी विभाग और पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में अवैध शराब आसानी से उपलब्ध थी और कई जगहों पर इसकी बिक्री की जा रही थी। अभी जांच में यह सामने आना बाकी है कि जहरीली शराब गांवों तक कैसे पहुंची। साथ ही इतने बड़े स्तर पर इसकी सप्लाई होने के बावजूद जिम्मेदार विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई।
बढ़ते मरीजों की संख्या स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता अस्पतालों में भर्ती मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना और शराब की सप्लाई चेन तक पहुंचना है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, मौतों और अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या में भी बदलाव संभव है।
अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ दिखाई दे रही है। गंभीर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ लगातार काम कर रहे हैं। अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने उन्हें समय पर इलाज उपलब्ध कराने की चुनौती भी बढ़ गई है।