Sagar Liquor Case: जहरीली शराब से अब तक 15 मौतें, मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख की आर्थिक मदद
पुलिस ने मामले में करीब 30 नामजद आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों से शराब की खरीद, तैयार करने, परिवहन और सप्लाई से जुड़े नेटवर्क के बारे में पूछताछ की जा रही है।
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Sagar Liquor Case: मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मामले में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 109 लोगों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है। वहीं डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। डिप्टी सीएम ने जानकारी देते हुए बताया कि सभी मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध करवाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को किसी भी तरह की कोताही ना बरतने के सख्त निर्देश दिए हैं। डिप्टी सीएम ने बताया कि इस घटना के पीछे जो भी जिम्मेदार हैं, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
30 लोगों के खिलाफ नामजद केस दर्ज, 12 गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में करीब 30 नामजद आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार आरोपियों से शराब की खरीद, तैयार करने, परिवहन और सप्लाई से जुड़े नेटवर्क के बारे में पूछताछ की जा रही है। पुलिस का फोकस यह पता लगाने पर है कि जहरीली शराब कहां तैयार हुई और इसे बंडा क्षेत्र के गांवों तक किसके जरिए पहुंचाया गया।
109 लोगों का अस्पताल में इलाज जारी, कई की हालत गंभीर
घटना के बाद प्रशासन और पुलिस ने जांच तेज कर दी है और अवैध शराब के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। जानकारी के मुताबिक जहरीली शराब से मौतों का आंकड़ा 15 पहुंच चुका है और अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या 109 बताई गई है। इनमें कई लोगों की हालत गंभीर है।
घटना के बाद प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें सक्रिय हैं। अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। वहीं प्रभावित गांवों में स्क्रीनिंग भी कराई जा रही है, ताकि शराब का सेवन करने वाले ऐसे लोगों की पहचान की जा सके, जिनमें अभी गंभीर लक्षण सामने नहीं आए हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से किसी भी तरह की संदिग्ध शराब का सेवन नहीं करने और तबीयत बिगड़ने पर तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपील की है।
लाइसेंसी ठेकेदार भी आरोपी
मामले में केवल अवैध शराब बेचने वाले लोगों के खिलाफ की कार्रवाई नहीं की जा रही है, बल्कि लाइसेंसी शराब ठेकेदारों सिद्धार्थ कुशवाहा और यशवंत ठाकुर को भी पुलिस ने आरोपी बनाया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि लाइसेंसी शराब कारोबार से जुड़े लोगों की कथित भूमिका क्या थी और अवैध शराब की सप्लाई का नेटवर्क किस तरह संचालित हो रहा था।
फरार आरोपियों की तलाश में दबिश
पुलिस की कई टीमें फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कार्रवाई का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। दूसरी ओर प्रशासनिक स्तर पर भी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया जारी है। इस मामले में आबकारी विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की जानकारी भी सामने आई है।
सागर का यह मामला मध्य प्रदेश में अवैध और मिलावटी शराब के नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल पुलिस की जांच का मुख्य लक्ष्य पूरे सप्लाई नेटवर्क का पता लगाकर फरार आरोपियों को गिरफ्तार करना और इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने लाना है।