MP News: 'एग्जाम के रिजल्ट के बाद पदों की संख्या नहीं बढ़ सकती', सरकार का शिक्षक अभ्यर्थियों की मांगों को मानने से इनकार
मध्य प्रदेश में शिक्षकों के पदों की संख्या बढ़ाने को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों को बढ़ा झटका लगा है। शिक्षा विभाग ने पदों की संख्या बढ़ाने से इनकार कर दिया है।

MP News: मध्य प्रदेश में शिक्षकों के पदों की संख्या बढ़ाने को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों को बढ़ा झटका लगा है। शिक्षा विभाग ने पदों की संख्या बढ़ाने से इनकार कर दिया है। विभाग की तरफ से कहा गया है कि परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद पदों की संख्या में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। रिक्त पदों को नई भर्तियों में विज्ञापित किया जा सकता है, लेकिन पुरानी भर्ती में पदों की वृद्धि कर शामिल नहीं किया जा सकता है।
'SC-ST पदों को OBC और अनारक्षित अभ्यर्थियों को नहीं दे सकते'
शिक्षा विभाग ने खाली पदों को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया है। विभाग की तरफ से बताया गया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के अभ्यर्थियों प्राप्त न होने से बैकलॉग में है। इन पदों को अनारक्षित और ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को नहीं दिया जा सकता है। धरना दे रहे अभ्यर्थियों की मांग है कि रिक्त पदों पर भर्ती नहीं की जा रही है, जो कि सही नहीं है। ये कहना भी गलत है कि चयनित अभ्यर्थी धरना दे रहे हैं।
'सभी खाली पद एक साथ भरना संभव नहीं'
इसके पहले शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा था कि एक साथ सभी खाली पदों पर भर्ती संभव नहीं है। 70 हजार अतिथि शिक्षक काम कर रहे हैं। लेकिन सभी पदों को रिक्त मान लेना सही नहीं है। भर्ती में आरक्षण बैकलॉग और ओबीसी आरक्षण का भी ध्यान रखना पड़ता है। लेकिन मुख्यमंत्री की कोशिश है कि जितने पद खाली हैं, उतने पद भरने की कोशिश की जाए।
एक हफ्ते से अनशन पर बैठे हैं अभ्यर्थी
भोपाल में शिक्षक अभ्यर्थी कई दिनों से पदों की संख्या बढ़ाने को लेकर धरन प्रदर्शन कर रहे हैं। जबकि तीन अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हुए हैं। धरना दे रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि उनके घरवालों ने ही पद बढ़ाने को लेकर आंदोलन करे के लिए कहा है। अनशन पर बैठे अभ्यर्थियों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर विपक्ष धरना प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के समर्थन में आ गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि अभ्यर्थियों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और सरकार को इसपर ध्यान देना चाहिए।
