सुबह प्रमोशन...शाम को रिटायर, विभागीय प्रक्रिया पर उठे सवाल, जानें पूरी खबर
मध्य प्रदेश के सहकारिता विभाग में प्रमोशन और सेवानिवृत्ति का अनोखा मामला सामने आया है।

मध्य प्रदेश के सहकारिता विभाग में प्रमोशन और सेवानिवृत्ति से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासन ने बड़वानी में असिस्टेंट रजिस्ट्रार के पद पर कार्यरत सुरेश सांवले को पदोन्नति देकर डिप्टी रजिस्ट्रार बनाया, लेकिन नए पद पर उनकी सेवा करीब छह घंटे ही रही।
प्रमोशन के बाद सिर्फ 6 घंटे की सेवा
प्रमोशन के बाद नए पद पर सांवले की सरकारी सेवा करीब छह घंटे ही रही। उनके लिए यह दिन नियमित कार्य दिवस की तरह भी नहीं रहा। यह मेल-मुलाकातों में ही बीता। कोई सरकारी काम नहीं करने के बावजूद इस प्रमोशन से सांवले को पेंशन और ग्रेच्युटी का लाभ मिलना जरूर तय हो गया।
‘6 घंटे के भीतर कोई आदेश पारित करना संभव नहीं’
सांवले के मुताबिक, 27 जुलाई को शासन ने पदोन्नति आदेश जारी किया था। 29 अगस्त को उनकी सेंधवा में सीएम जन अभियान में ड्यूटी थी। ड्यूटी पूरी कर वे शाम को रिलीव हुए। 30 अगस्त को उन्होंने बड़वानी से रवाना होने की तैयारियां कीं और 31 अगस्त को इंदौर में डिप्टी रजिस्ट्रार का पदभार संभाला। तत्कालीन ज्वॉइंट रजिस्ट्रार डॉ. मनोज जायसवाल ने उन्हें चार्ज सौंपा।
इस बारे में सांवले ने कहा- न्यायिक क्षेत्र में छह घंटे के भीतर कोई आदेश पारित करना संभव नहीं था। दिनभर अधिकारियों-कर्मचारियों से परिचय और सामान्य बातचीत में ही समय बीता।
सहकारिता विभाग में करीब 30 साल तक नौकरी
मूल रूप से बुरहानपुर के रहने वाले सांवले ने सहकारिता विभाग में करीब 30 साल तक नौकरी की है। 2016 से 2020 तक इंदौर में असिस्टेंट रजिस्ट्रार रहे हैं। बड़वानी और सेंधवा में भी यही पद संभाला है।
डॉ. मनोज जायसवाल की पदस्थापना भी चर्चा में
इंदौर के इसी विभाग में डॉ. मनोज जायसवाल की पदस्थापना का मामला भी चर्चा में है। उन्हें 14 जुलाई को पदोन्नत कर ज्वॉइंट रजिस्ट्रार (न्यायिक) बनाया गया था। 15 जुलाई को उन्होंने इसका प्रभार तो संभाल लिया, लेकिन करीब डेढ़ महीने तक डिप्टी रजिस्ट्रार का काम भी देखते रहे।
बाद में 27 अगस्त के आदेश के तहत उनकी पदस्थापना JR (न्यायिक) के रूप में इंदौर में की गई और 31 अगस्त को उन्होंने इसका दोबारा विधिवत प्रभार संभाला।
जायसवाल ने 1996 में बालाघाट से सहकारिता विभाग में अपनी सेवा की शुरुआत की थी। उनकी पदस्थापना भोपाल, छिंदवाड़ा, मंडला, फिर भोपाल, उज्जैन, देवास और इंदौर में रही। इंदौर में वे साल 2019 से हैं।
अपने ही फैसलों की अपील पर भी सवाल
डॉ. जायसवाल पहले डिप्टी रजिस्ट्रार (न्यायिक) के पद पर रह चुके हैं। इस दौरान उनके द्वारा पारित न्यायिक आदेशों की अपील यदि अब JR (न्यायिक) के समक्ष आती है तो उनकी सुनवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मामला हितों के टकराव और निष्पक्ष सुनवाई के नजरिए से चर्चा में है।
प्रमोशन और पदस्थापना की प्रक्रिया पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने सहकारिता विभाग में पदोन्नति, पदस्थापना, अतिरिक्त प्रभार और सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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