Jharkhand Protest Update : झारखंड PSC रद्द करो की मांग: छात्रों से सरकार की बातचीत बेनतीजा, 6 स्टूडेंट अनशन पर बैठे
Jharkhand Protest Update : आंदोलन के बीच लेखक, कवि और बॉलीवुड अभिनेता पीयूष मिश्रा ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की।
Jharkhand Protest Update : रांची। झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। शनिवार को प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल के बीच दूसरे दौर की बातचीत हुई। करीब एक घंटे चली इस बैठक में भी कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी।
इससे पहले शुक्रवार रात सरकार के प्रतिनिधियों और छात्रों के एक गुट के बीच बातचीत हुई थी। वह बैठक भी बिना किसी अंतिम फैसले के खत्म हुई थी।
आंदोलन के बीच लेखक, कवि और बॉलीवुड अभिनेता पीयूष मिश्रा ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार और छात्रों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन आंदोलन खत्म होने के संकेत अभी नहीं मिले हैं।
दूसरे दौर की बातचीत में भी नहीं निकला समाधान
शनिवार की बैठक का मकसद छात्रों की मांगों को समझना और उनके समाधान का रास्ता तलाशना था। बैठक में सरकार की ओर से मंत्री चमरा लिंडा, सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडे सिंह और संजय यादव शामिल हुए।
छात्रों की तरफ से रवींद्र पासवान, पीयूष कुमार, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, अंकित राज, कार्तिक सोरेन, शालू कुमारी, रवींद्र कुमार रवि, आनंद कुमार और अंकित कुमार समेत प्रतिनिधि मौजूद रहे।
छात्रों ने अपनी मांगों को सरकार के सामने रखा। सरकार ने इन मांगों पर विचार करने की बात कही, लेकिन बैठक के बाद आंदोलन खत्म करने पर सहमति नहीं बनी।
सरकार ने सुझाव देने के लिए ईमेल और नंबर जारी किया
राज्य सरकार ने आंदोलन से जुड़े छात्रों और अन्य पक्षों से सुझाव लेने के लिए एक ईमेल आईडी और फीडबैक नंबर जारी करने की बात कही है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि सरकार छात्रों के अलग-अलग समूहों और अन्य संबंधित पक्षों से बातचीत करेगी। सभी पक्षों के सुझाव लेने के बाद सरकार आगे का फैसला करेगी।
सरकार का कहना है कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से समझा जा रहा है। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्र केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। वे अपनी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट और ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
6 छात्र अनशन पर
JPSC परीक्षा रद्द करने समेत कई मांगों को लेकर छह छात्र अनशन पर बैठे हैं। आंदोलनकारी छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा घेराव करने का ऐलान किया है। इससे पहले ABVP कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने की कोशिश की थी।
पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। आंदोलन के अलग-अलग कार्यक्रमों के कारण रांची में छात्र संगठनों की गतिविधियां बढ़ी हैं। प्रदर्शनकारी लगातार सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
पीयूष मिश्रा ने प्रदर्शनकारी छात्रों से की मुलाकात
आंदोलन के बीच लेखक, कवि और बॉलीवुड अभिनेता पीयूष मिश्रा प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मिलने पहुंचे। उनकी मौजूदगी ने आंदोलन को लेकर लोगों का ध्यान खींचा। छात्र JPSC और JSSC भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों का निष्पक्ष तरीके से समाधान होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जांच ऐसी एजेंसी से कराई जाए, जिस पर अभ्यर्थियों को पूरा भरोसा हो।
शुक्रवार की बैठक को छात्रों ने बताया था सकारात्मक
शुक्रवार को सरकार के प्रतिनिधिमंडल और छात्र नेताओं के बीच पहली बैठक हुई थी। बैठक के बाद छात्र नेता रवींद्र पासवान ने इसे सकारात्मक बताया था। उन्होंने कहा था कि छात्रों को उम्मीद है कि सरकार, मुख्यमंत्री और मंत्री उनकी मांगों पर ध्यान देंगे।
हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया था कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा था कि बैठक अच्छे माहौल में हुई। उन्होंने बताया था कि सरकार ने छात्रों की मांगों को समझने की कोशिश की है और इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत को लेकर चिंता
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत को लेकर भी चिंता जताई गई है। उनके अनुसार, डॉक्टर ने उनका ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर कम बताया है। उन्होंने शरीर में पानी की कमी होने की बात कही। महतो ने कहा कि उनकी तबीयत खराब होने के बावजूद छात्रों की मांगों को लेकर आंदोलन जारी है।
उन्होंने यह भी बताया कि सरकार के साथ हुई बैठक में वह खुद शामिल नहीं हुए थे। उनके अनुसार, छात्रों के प्रतिनिधियों ने सरकार को मांगों की सूची सौंपी है। सरकार ने मांगों को सुनकर उन पर विचार करने का भरोसा दिया है।
आंदोलन की शुरुआत से अब तक क्या हुआ
JPSC और JSSC भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद के बाद आंदोलन ने कई चरण देखे हैं। 21 जुलाई को भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच के दौरान CID की JPSC कार्यालय में कार्रवाई की खबर सामने आई।
इसके बाद उप परीक्षा नियंत्रक समेत कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई और JPSC चेयरमैन एल ख्यांगते ने इस्तीफा दिया। 22 जुलाई को उनका इस्तीफा मंजूर हुआ और सिविल सेवा मुख्य परीक्षा समेत कई परीक्षाओं को स्थगित किया गया। इसी दिन भर्ती परीक्षा में कथित धांधली के विरोध में प्रदर्शन भी हुआ।
24 जुलाई से छात्र आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार
24 जुलाई को JPSC और JSSC नियुक्ति में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र आंदोलन शुरू हुआ। 28 जुलाई को आंदोलन का स्थान मोरहाबादी की बापू वाटिका से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम किया गया। 29 जुलाई को अभ्यर्थी न्याय मंच ने संविधान यात्रा निकाली।
30 जुलाई को छात्र संगठनों ने भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया। 31 जुलाई को कैंडल मार्च निकाला गया। इसके बाद 1 अगस्त से आंदोलन को और तेज करने की घोषणा की गई।
अगस्त में प्रदर्शन के कई कार्यक्रम हुए
2 अगस्त को छात्रों ने मशाल और तख्तियों के साथ पैदल मार्च निकाला। 3 अगस्त को JPSC और JSSC में कथित भ्रष्टाचार के विरोध में फ्लैश लाइट मार्च किया गया। 4 अगस्त को छात्रों ने शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देने के बाद मार्च निकाला। 5 अगस्त को सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों की कमेटी बनाई।
मुख्यमंत्री की ओर से भी बातचीत का न्योता दिया गया। 6 अगस्त को सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के जरिए देवेंद्र नाथ महतो से अनशन खत्म कर जल ग्रहण करने की अपील की।
7 अगस्त को विधानसभा मार्च के दौरान AISA अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंके जाने की घटना सामने आई। इसी दिन छात्र प्रतिनिधिमंडल और सरकार की कमेटी के बीच बातचीत भी हुई।
छात्रों की पांच प्रमुख मांगें क्या हैं
- 14वीं JPSC परीक्षा की जांच CBI और ED से कराने की है। छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल CID जांच पर भरोसा नहीं है।
- मामले की तेज सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की है।
- TDPL से कराई गई सभी परीक्षाओं को रद्द करने की है।
- TDPL को ब्लैकलिस्ट करने और भविष्य की परीक्षाएं TCS जैसी भरोसेमंद कंपनी से कराने की है।
- JPSC और JSSC के उन अधिकारियों को हटाने की है, जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। छात्र उनकी जगह साफ छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति चाहते हैं।
सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती
सरकार के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती छात्रों का भरोसा बहाल करने की है। एक तरफ सरकार बातचीत के जरिए समाधान तलाश रही है। दूसरी तरफ छात्र अपनी मांगों पर ठोस फैसला चाहते हैं। शुक्रवार और शनिवार की लगातार बैठकों के बावजूद अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।
ऐसे में 10 अगस्त के प्रस्तावित विधानसभा घेराव पर सभी की नजर रहेगी। यदि सरकार और छात्रों के बीच अगले दौर की बातचीत में कोई ठोस रास्ता नहीं निकलता है, तो आंदोलन और तेज हो सकता है।
