ब्रिक्स सम्मेलन में 14 देशों ने जारी किया ‘भोपाल घोषणा पत्र’: कलाकारों को मौका, सांस्कृतिक संपदा वापसी पर मंथन
Bhopal BRICS Summit Update : भोपाल घोषणा में विदेशों में मौजूद सांस्कृतिक संपदाओं के मूल देश तक लौटने की प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया है।
Bhopal BRICS Summit Update : मध्य प्रदेश। भोपाल में चार दिन से चल रहे BRICS सांस्कृतिक सम्मेलन-2026 का शनिवार को समापन हो गया। अंतिम दिन BRICS देशों के संस्कृति मंत्रियों की बैठक हुई। इसमें ‘भोपाल घोषणा’ को स्वीकार किया गया। घोषणा में सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने के साथ चोरी या गलत तरीके से विदेश पहुंचाई गई सांस्कृतिक संपदाओं को वापस लाने पर सहयोग बढ़ाने की बात कही गई। कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच और नए अवसर देने पर भी सहमति बनी। सम्मेलन की थीम लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर केंद्रित रही।
संस्कृति के लिए साझा रोडमैप तैयार
केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि पिछले तीन दिनों से संस्कृति और विरासत से जुड़े विषयों पर चर्चा चल रही थी। इन चर्चाओं का परिणाम भोपाल घोषणा के रूप में सामने आया है। उन्होंने बताया कि यह BRICS संस्कृति ट्रैक की 11वीं बैठक थी।
इसमें 11 देशों के 55 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। पहली बार सांस्कृतिक सहयोग के लिए समयबद्ध लक्ष्य तय किए गए हैं। साझा रोडमैप में परंपरागत विरासत के साथ डिजिटल तकनीक और आधुनिक रचनात्मक उद्योगों को भी शामिल किया गया है।
सांस्कृतिक संपदाओं की वापसी पर बढ़ेगा सहयोग
भोपाल घोषणा में विदेशों में मौजूद सांस्कृतिक संपदाओं के मूल देश तक लौटने की प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसके लिए सांस्कृतिक संपदाओं के उद्गम की पहचान और शोध को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
घोषणा में ऐसी संपदाओं की खोज के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों की संभावनाएं तलाशने का भी उल्लेख है। इससे चोरी या अवैध तरीके से विदेश पहुंची ऐतिहासिक और सांस्कृतिक वस्तुओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
पारंपरिक ज्ञान और विरासत के संरक्षण पर जोर
घोषणा में पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को सुरक्षित रखने को भी महत्वपूर्ण विषय माना गया है। पीढ़ियों से आगे बढ़ते आ रहे लोक ज्ञान, कला और परंपराओं के संरक्षण की जरूरत बताई गई।
संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागार के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। दस्तावेजों के डिजिटलीकरण और संरक्षण के क्षेत्र में विशेषज्ञता साझा करने की योजना है। इससे सांस्कृतिक और दस्तावेजी विरासत को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
रचनात्मक उद्योग और कलाकारों को नए अवसर
BRICS देशों के बीच रचनात्मक उद्योग और क्रिएटिव इकोनॉमी को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। कलाकारों और रचनाकारों के लिए नेटवर्किंग, अनुभव साझा करने और डिजिटल माध्यम से बाजार तक पहुंच बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।
घोषणा में AI सिस्टम में कॉपीराइट वाली रचनाओं के इस्तेमाल को लेकर पारदर्शिता और उचित पारिश्रमिक की जरूरत पर भी जोर दिया गया। इससे कलाकारों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर सहयोग बढ़ने की उम्मीद है।
भारत ने स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री की पहल की
भारत ने BRICS संस्कृति ट्रैक के तहत स्वैच्छिक कलाकार रजिस्ट्री तैयार करने की पायलट पहल की घोषणा की। इसका उद्देश्य BRICS देशों के कलाकारों और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को एक-दूसरे से जोड़ना है।
रजिस्ट्री के माध्यम से पेशेवर नेटवर्क मजबूत करने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए अवसर बनाने का प्रयास होगा। इससे कलाकारों को दूसरे देशों के समकक्षों के साथ काम करने और अपनी कला को व्यापक मंच तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
द्विपक्षीय बैठकों में सहयोग पर चर्चा
सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं। इन बैठकों में संस्कृति मंत्री और संस्कृति मंत्रालय के सचिव स्तर पर विचार-विमर्श किया गया। चर्चा में दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने और साझा हित के नए क्षेत्रों की पहचान पर जोर रहा। इन बैठकों ने BRICS के व्यापक एजेंडे के साथ अलग-अलग देशों के द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर दिया।
भारत की अध्यक्षता में आगे बढ़ा संस्कृति ट्रैक
BRICS संस्कृति सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। अप्रैल में पहली संस्कृति कार्य समूह की बैठक ऑनलाइन हुई थी। इसके बाद 4 और 5 जून को वाराणसी में दूसरी बैठक हुई। 5 और 6 अगस्त को भोपाल में तीसरी कार्य समूह बैठक आयोजित की गई। इन बैठकों में हुई चर्चा के बाद 8 अगस्त को संस्कृति मंत्रियों की बैठक में भोपाल घोषणा को स्वीकार किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में संस्कृति को व्यावहारिक और संस्थागत सहयोग से जोड़ने पर जोर दिया गया।
14 देशों ने लिया हिस्सा
मंत्री स्तरीय बैठक में भारत सहित 14 देशों ने भाग लिया। इनमें 10 BRICS सदस्य देश और चार साझेदार देश शामिल रहे। सदस्य देशों में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल थे।
साझेदार देशों में बेलारूस, क्यूबा, कजाखस्तान और थाईलैंड ने हिस्सा लिया। मिस्र ने मंत्री स्तरीय बैठक में ऑनलाइन भागीदारी की। कुल 55 प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने सम्मेलन के अंतरराष्ट्रीय स्तर को दर्शाया।
सांची में प्रतिनिधियों ने देखी बौद्ध विरासत
सम्मेलन के दौरान विदेशी प्रतिनिधियों के लिए सांची की सांस्कृतिक यात्रा भी रखी गई। प्रतिनिधियों ने बौद्ध विरासत और स्थापत्य कला से जुड़े स्थलों का भ्रमण किया। सांची स्तूप के लिए विशेष गाइडेड टूर की व्यवस्था की गई।
इसके अलावा चेतियागिरी मंदिर में दर्शन, योग और ध्यान सत्र भी प्रस्तावित रहे। शाम को बौद्ध इतिहास और कला पर आधारित 3D प्रोजेक्शन मैपिंग तथा लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से विरासत की जानकारी दी गई।
मध्यप्रदेश के व्यंजनों से मेहमानों का स्वागत
सम्मेलन में शामिल संस्कृति मंत्रियों और विदेशी प्रतिनिधियों के लिए मध्यप्रदेश के पारंपरिक व्यंजन भी परोसे गए। मेन्यू में दाल-बाफला, निमोना, रिकमच, गुइया की सब्जी, चंबल का थोपा, चंदिया, बड़ा और कोदो-कुटकी जैसे मिलेट आधारित व्यंजन शामिल रहे।
विदेशी मेहमानों की पसंद को देखते हुए वेस्टर्न और ओरिएंटल व्यंजनों की व्यवस्था भी की गई। इस पहल के जरिए मध्यप्रदेश की खानपान परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने प्रस्तुत किया गया।
भीमबेटका का करेंगे भ्रमण
विदेशी प्रतिनिधियों के लिए उनकी आगे की रवानगी से पहले भीमबेटका शैलाश्रय के वैकल्पिक भ्रमण की व्यवस्था की गई। यह स्थल भारत की प्रागैतिहासिक शैल कला और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है।
प्रतिनिधियों को यहां हजारों वर्ष पुरानी रॉक आर्ट और प्राचीन मानव जीवन से जुड़े प्रमाण देखने का अवसर मिलेगा। इस तरह भोपाल सम्मेलन के साथ मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने रखने का प्रयास किया गया।
