Yashwant Verma Cash Case : जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड में सभी आरोप साबित, जांच समिति बोले- सबूतों से की गई छेड़छाड़
Yashwant Verma Cash Case : रिपोर्ट में सरकारी आवास के स्टोररूम में बड़ी मात्रा में नकदी मिलने, आग लगने के बाद सबूतों को सुरक्षित नहीं रखने को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
Yashwant Verma Cash Case : मध्य प्रदेश। जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े 2025 के कैश कांड की जांच कर रही संसदीय समिति ने बुधवार को लोकसभा में अपनी रिपोर्ट पेश की। समिति ने जस्टिस वर्मा पर लगाए गए तीनों प्रमुख आरोपों को सही पाया है। रिपोर्ट में सरकारी आवास के स्टोररूम में बड़ी मात्रा में नकदी मिलने, आग लगने के बाद सबूतों को सुरक्षित नहीं रखने और जस्टिस वर्मा की सफाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
स्टोररूम में मिले थे जले हुए नोट
समिति की रिपोर्ट के मुताबिक 14 अगस्त 2025 को जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम में 500 रुपये के नोटों से भरी बोरी मिली थी। इनमें बड़ी संख्या में नोट जले और अधजले बताए गए।
जांच के दौरान फायर सर्विस और पुलिस कर्मचारियों ने भी स्टोररूम में नोटों के बंडल देखने की बात कही। हालांकि नकदी को जब्त नहीं किया गया और उसकी गिनती भी नहीं हो सकी।
स्टोररूम में कई फीट तक फैले थे नोट
दिल्ली फायर सर्विस के कर्मचारी अंकित सहगल ने समिति को बताया कि उसने स्टोररूम में 500 रुपये के नोटों के बंडल देखे थे। उसके मुताबिक नोट करीब 7 से 8 फीट तक फैले हुए थे।
पुलिस अधिकारी रूपचंद से जब नकदी की मात्रा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ₹5 लाख का आंकड़ा भी बहुत कम होगा। हालांकि नोटों की गिनती नहीं होने के कारण समिति कुल रकम का पता नहीं लगा सकी।
आग के बाद सबूत सुरक्षित नहीं किए
समिति ने पाया कि आग बुझने के बाद स्टोररूम को तत्काल सील नहीं किया गया। रिपोर्ट के अनुसार एक सुरक्षा अधिकारी ने रात करीब 3 बजे जस्टिस वर्मा के स्टाफ को कमरे की सफाई करते देखा।
सुबह तक जला हुआ सामान बाहर निकाल दिया गया और कमरा साफ कर दिया गया। वहां मिले नोट भी सुरक्षित नहीं किए गए। समिति ने माना कि इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण सबूतों को सुरक्षित रखने में गंभीर लापरवाही हुई।
जस्टिस वर्मा की सफाई पर भी सवाल
समिति के सामने जस्टिस वर्मा की ओर से नकदी के बारे में अलग-अलग दावे किए गए। शुरुआत में उन्होंने कहा कि उन्हें कैश की जानकारी नहीं थी। बाद में नकदी के नकली होने और साजिश के तहत रखे जाने की बात कही गई।
समिति के मुताबिक इन दावों के समर्थन में कोई FIR, शिकायत या ठोस सबूत पेश नहीं किया गया। जस्टिस वर्मा ने खुद भी समिति के सामने गवाही नहीं दी।
तीनों आरोपों को समिति ने माना साबित
समिति ने सरकारी आवास में बेहिसाब नकदी मिलने के आरोप को सही माना। आग के बाद सबूतों को सुरक्षित नहीं रखने और उनसे संभावित छेड़छाड़ के आरोप को भी साबित माना गया।
इसके अलावा जस्टिस वर्मा की सफाई को समिति ने अधूरी, टालमटोल वाली और भ्रामक प्रभाव वाली बताया। इस तरह रिपोर्ट में उनके खिलाफ लगाए गए तीनों प्रमुख आरोपों को सही पाया गया।
9 अप्रैल 2026 को दिया था इस्तीफा
जस्टिस यशवंत वर्मा ने 9 अप्रैल 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे में उन्होंने पद छोड़ने के फैसले पर दुख जताया था।
उन्होंने कहा था कि न्यायाधीश के रूप में सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात रही। अब संसदीय समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।