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Amarnath Yatra 2026: पहले हफ्ते में ही 90% पिघले बाबा बर्फानी! ग्लोबल वॉर्मिंग या कुछ और? जानिए पूरी वजह

Amarnath Yatra 2026: अमरनाथ यात्रा शुरू होने के कुछ ही दिनों में पवित्र बर्फ शिवलिंग यानी बाबा बर्फानी के करीब 90 फीसदी पिघल जाने से नई बहस छिड़ गई है। रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के बीच पर्यावरण पर बढ़ते दबाव, ग्लोबल वॉर्मिंग और यात्रा व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष ने मामले की जांच की मांग की है।

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पहले हफ्ते में ही तेजी से पिघला शिवलिंग

3 जुलाई से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा के पहले सप्ताह में ही बाबा बर्फानी का प्राकृतिक बर्फ शिवलिंग काफी हद तक पिघल गया। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि शिवलिंग लगभग पूरी तरह समाप्त होने की स्थिति में पहुंच गया है। इससे श्रद्धालुओं और पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है।

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रिकॉर्ड संख्या में पहुंचे श्रद्धालु

इस बार अमरनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। शुरुआती चार दिनों में ही 93 हजार से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। वहीं दूसरे दिन 20 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, जो पिछले कई वर्षों में दूसरे दिन का सबसे बड़ा आंकड़ा बताया जा रहा है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी यात्रा में बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या का जिक्र किया है।

ग्लोबल वॉर्मिंग या इंसानी दखल?

बाबा बर्फानी के तेजी से पिघलने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि यात्रा मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण, भारी मशीनों का इस्तेमाल, अस्थायी ढांचों और गुफा के पास बढ़ती गतिविधियों का भी असर पड़ सकता है।

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PDP और कांग्रेस ने उठाए सवाल

पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने कहा कि जब शिवलिंग इतनी जल्दी पिघल रहा है तो गुफा तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना की जरूरत पर भी सवाल उठते हैं। वहीं कांग्रेस ने पूरे मामले की स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि गुफा के पास बनाए गए रेन शेल्टर और अन्य निर्माण कार्यों के प्रभाव का भी अध्ययन होना चाहिए।

बिना पंजीकरण पहुंच रहे श्रद्धालुओं पर चिंता

प्रशासन ने बिना पंजीकरण और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र के यात्रा पर पहुंच रहे लोगों को लेकर भी चिंता जताई है। श्राइन बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पहलगाम और बालटाल दोनों मार्गों से प्रतिदिन 10 हजार श्रद्धालुओं की सीमा तय की है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग बिना पंजीकरण पहुंच रहे हैं।

श्रद्धालुओं ने भी जताई चिंता

इंदौर से पहुंचे एक श्रद्धालु ने बताया कि पहले बाबा बर्फानी के दर्शन 40 से 45 दिनों तक होते थे, लेकिन अब यह अवधि घटकर केवल पांच से सात दिन रह गई है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने चौथे दिन दर्शन किए, तब तक शिवलिंग काफी छोटा हो चुका था।

आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल बाबा बर्फानी के तेजी से पिघलने की कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। हालांकि इस घटना ने एक बार फिर अमरनाथ यात्रा, बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या और हिमालय के संवेदनशील पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

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