MP News: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि गोबर और गोमूत्र से भी आय अर्जित की जा सकती है। गौशालाएं दूध, जैविक खाद, बायोगैस और अन्य उत्पादों से आर्थिक रूप से मजबूत हो सकती हैं।
सीएम मोहन यादव ने सोमवार (8 सितंबर) को मंत्रालय में गौसंवर्धन बोर्ड की बैठक में यह निर्देश दिए। बैठक में पशुपालन मंत्री लखन पटेल, मुख्य सचिव अनुराग जैन और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
देसी नस्ल को बढ़ावा
सीएम ने कहा कि प्रदेश में गिर, साहीवाल, मालवी और नागौरी जैसी देसी नस्लों के गोपालन को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि जनजातीय अंचलों में भी गोपालन गतिविधियां बढ़ाई जाएं।
गौशालाओं से बिजली और रोजगार
मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि गौशालाओं में खाली स्थान का उपयोग सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाए। उन्होंने कहा कि गौशालाओं में दुग्ध उत्पादों के साथ-साथ गोबर और गोमूत्र से बनी सामग्री की बिक्री की व्यवस्था विकसित की जाए। इससे किसानों और ग्रामीणों की आय बढ़ेगी।
धार्मिक संस्थाओं को जोड़ा जाएगा
सीएम ने कहा कि गौशालाओं के प्रबंधन में धार्मिक संस्थाओं और दानदाताओं को शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही पशु चिकित्सकों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी ताकि दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो सके।
1.10 लाख गोवंश को मिला आश्रय
गौसंवर्धन बोर्ड के अनुसार, प्रदेश में अब तक 937 नई गौशालाओं का पंजीयन किया गया है। इनमें 1 लाख 10 हजार गोवंश को आश्रय मिला है।
बायोगैस संयंत्र और बड़ी गौशालाएं
साल 2024-25 में विदिशा, देवास, आगर-मालवा, ग्वालियर, दमोह, सतना और रीवा में बायोगैस व जैविक खाद संयंत्र लगाए गए हैं। वहीं ग्वालियर, इंदौर और उज्जैन में नगर निगम स्तर पर बड़ी गौशालाएं शुरू हो चुकी हैं। भोपाल और जबलपुर में भी गौशालाओं का काम जारी है।
सीएम यादव ने कहा कि आत्मनिर्भर गौशालाएं न केवल रोजगार देंगी बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाएंगी।
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