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MP UCC Draft Ready: लिव-इन से शादी तक! MP में UCC का ड्राफ्ट तैयार, कई बड़े नियम बदलने की तैयारी

MP UCC Draft Ready: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को UCC का फाइनल ड्राफ्ट सौंप दिया है। ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप का अनिवार्य पंजीयन, सभी धर्मों के लिए विवाह पंजीकरण, बहुविवाह पर रोक और कोर्ट से ही तलाक को मान्यता देने जैसी कई अहम सिफारिशें शामिल हैं।

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CM को सौंपा गया UCC का फाइनल ड्राफ्ट

उच्च स्तरीय समिति ने सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को UCC का ड्राफ्ट सौंप दिया। अब इसे कानूनी परीक्षण के लिए विधि विभाग के पास भेजा गया है। माना जा रहा है कि सरकार मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता विधेयक विधानसभा में पेश कर सकती है। हालांकि अंतिम फैसला सरकार का होगा और ड्राफ्ट में बदलाव की संभावना भी बनी हुई है।

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बिना पंजीयन लिव-इन पर हो सकती है कार्रवाई

ड्राफ्ट के मुताबिक लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को रजिस्ट्रार के सामने अपने संबंध का पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रार इसकी जानकारी संबंधित थाने को भेजेगा और अभिभावकों को भी सूचित किया जा सकता है। यदि कोई जोड़ा बिना पंजीयन लिव-इन में रहता है तो इसे दंडनीय अपराध मानने की सिफारिश की गई है।

विवाह, तलाक और बहुविवाह पर भी नए नियम

ड्राफ्ट में सभी धर्मों के लोगों के लिए विवाह पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा मौखिक या प्रथागत तलाक को अमान्य मानते हुए केवल कोर्ट से होने वाले तलाक को कानूनी मान्यता देने की सिफारिश की गई है। साथ ही पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी पर पूरी तरह रोक लगाने और बहुविवाह को अपराध की श्रेणी में रखने का प्रस्ताव भी शामिल है।

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संपत्ति अधिकार और आदिवासियों पर क्या प्रस्ताव?

ड्राफ्ट में सभी धर्मों के बेटे और बेटियों को संपत्ति में समान उत्तराधिकार का अधिकार देने की बात कही गई है। वहीं आदिवासी समुदायों और कुछ विशेष पिछड़ी जातियों को UCC के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश भी की गई है। मुख्यमंत्री पहले भी इस संबंध में संकेत दे चुके हैं।

तीन भागों में तैयार किया गया ड्राफ्ट

समिति ने तीन खंडों में UCC का प्रारूप तैयार किया है। इसमें अनुशंसाएं, विधेयक का प्रारूप और 9.58 लाख से अधिक लोगों से मिले जनसुझावों का विश्लेषण शामिल है। अब सभी की नजर सरकार के अंतिम फैसले और मानसून सत्र में पेश होने वाले विधेयक पर टिकी है।

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