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Satluj Controversy Explained : दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ क्यों हटाई? जानिए पूरा मामला

Satluj Controversy

Satluj Controversy Explained : एंटरटेनमेंट डेस्क। दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस फिल्म को लेकर सेंसरशिप, अभिव्यक्ति की आजादी और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बहस छिड़ी हुई है। फिल्म करीब तीन साल तक कानूनी और सेंसर से जुड़ी प्रक्रियाओं में फंसी रही। इसके बाद जब इसे ZEE5 पर रिलीज किया गया तो महज 48 घंटे के अंदर ही प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। अब फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहान ने पहली बार इस पूरे विवाद पर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि फिल्म का नाम जरूर बदला गया, लेकिन इसकी कहानी में कोई बदलाव नहीं किया गया।

क्या है फिल्म ‘सतलुज’?

‘सतलुज’ पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी पर आधारित फिल्म है। खालड़ा ने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में कथित फर्जी एनकाउंटर और हजारों अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों की जांच की थी। उनके खुलासों ने उस समय देश और विदेश में काफी चर्चा बटोरी थी।

फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालड़ा का किरदार निभाया है। उनके अलावा अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान भी अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं।

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फिल्म की कहानी में लापता लोगों के मामले, कथित फर्जी एनकाउंटर, श्मशान घाटों के रिकॉर्ड की जांच, कनाडा में मानवाधिकार का मुद्दा उठाना, उनका अपहरण और बाद में सुप्रीम कोर्ट तथा CBI जांच जैसी घटनाओं को दिखाया गया है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

इस फिल्म का नाम पहले ‘पंजाब 95’ था। साल 2022 में फिल्म को सेंसर बोर्ड (CBFC) के पास सर्टिफिकेट के लिए भेजा गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेंसर बोर्ड ने फिल्म में 127 कट लगाने और कई बदलाव करने की सलाह दी थी लेकिन फिल्म निर्माताओं ने इतने बड़े बदलाव करने से इनकार कर दिया। इसके बाद फिल्म की रिलीज लंबे समय तक अटक गई। बाद में फिल्म का नाम बदलकर ‘सतलुज’ रखा गया।

OTT पर रिलीज हुई, फिर 48 घंटे में हट गई फिल्म

सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो पाने के बाद फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज किया गया। OTT कंटेंट के लिए CBFC का सर्टिफिकेट जरूरी नहीं होता, इसलिए फिल्म बिना किसी कट के प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम की गई। फिल्म 3 जुलाई 2026 को रिलीज हुई, लेकिन सिर्फ 48 घंटे बाद यानी 5 जुलाई को इसे अचानक हटा दिया गया।

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रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार ने आईटी रूल्स 2021 के तहत ZEE5 को फिल्म हटाने का निर्देश दिया। सरकारी सूत्रों का कहना है कि फिल्म के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल भारत विरोधी या खालिस्तान समर्थक संगठन अपने प्रचार के लिए कर सकते हैं।

सुरक्षा एजेंसियों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला माना, जिसके बाद फिल्म हटाने का फैसला लिया गया। हालांकि, सरकार की ओर से इस बारे में सार्वजनिक रूप से विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।

डायरेक्टर हनी त्रेहान ने तोड़ी चुप्पी

फिल्म हटाए जाने के बाद निर्देशक हनी त्रेहान ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज नहीं हो सकी, लेकिन खुशी है कि दर्शकों ने इसे देखा। हनी त्रेहान ने कहा कि फिल्म का सिर्फ नाम बदला गया है, कहानी या कंटेंट में कोई समझौता नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें आज तक यह नहीं पता कि आखिर फिल्म से किसे आपत्ति थी। उनके मुताबिक, उनके सामने कभी कोई व्यक्ति या संस्था सीधे नहीं आई।

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फिल्म हटने पर दिलजीत दोसांझ का रिएक्शन

फिल्म हटने के बाद दिलजीत दोसांझ ने कहा कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि फिल्म हटाई जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों ने फिल्म पहले ही डाउनलोड कर ली थी और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक इसे पहुंचाने की बात कही। इसके बाद सोशल मीडिया पर फिल्म की पायरेटेड कॉपी शेयर होने लगी।

पायरेसी पर ZEE5 की अपील

प्लेटफॉर्म ने लोगों से पायरेसी न करने की अपील की। ZEE5 का कहना है कि वह फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा है और दर्शकों से अवैध तरीके से फिल्म शेयर न करने की अपील की है।

अनुराग कश्यप ने किया समर्थन

फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने भी हनी त्रेहान का समर्थन किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें कभी नहीं लगा था कि भारत में भी किसी निर्देशक को अपनी फिल्म के लिए ऐसे हालात का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने हनी त्रेहान की तुलना ईरानी फिल्ममेकर जाफर पनाही से की, जो लंबे समय से सेंसरशिप और सरकारी प्रतिबंधों का सामना करते रहे हैं।

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फिलहाल क्या स्थिति है?

फिलहाल ‘सतलुज’ भारत में अवेलेबल नहीं है, जबकि कुछ देशों में इसे देखा जा सकता है। फिल्म को लेकर बहस अभी भी जारी है। एक तरफ फिल्म के निर्माता और कई कलाकार इसे अभिव्यक्ति की आजादी का मुद्दा बता रहे हैं, वहीं सरकारी सूत्र राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दे रहे हैं।

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