US Iran Talks : वाशिंगटन डीसी। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने के लिए स्विट्जरलैंड में उच्चस्तरीय वार्ता चल रही है। दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए अंतरिम समझौते के बाद उम्मीद थी कि बातचीत आगे बढ़ेगी और कई पुराने विवाद सुलझेंगे। लेकिन अब 12 अरब डॉलर की फ्रीज की गई ईरानी राशि के इस्तेमाल को लेकर नया विवाद सामने आ गया है। अमेरिका चाहता है कि यह पैसा अमेरिकी किसानों से गेहूं, मक्का, सोयाबीन और अन्य कृषि उत्पाद खरीदने में खर्च किया जाए।
दूसरी ओर, ईरान ने इस शर्त को पूरी तरह अस्वीकार करते हुए कहा है कि एक बार राशि जारी होने के बाद उसका उपयोग कैसे होगा, इसका फैसला केवल ईरान करेगा। इस नए विवाद ने दोनों देशों के बीच चल रही शांति वार्ता को एक बार फिर मुश्किल मोड़ पर ला दिया है।
स्विट्जरलैंड बैठक के बाद सामने आया नया विवाद
पिछले सप्ताह हुए अंतरिम समझौते के बाद स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की पहली उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक के बाद ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर घालिबाफ ने कहा कि दोनों पक्ष 12 अरब डॉलर की फ्रीज राशि जारी करने पर सहमत हुए हैं। उनके बयान से यह संकेत मिला कि वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, इस मुद्दे पर अमेरिका की ओर से अलग तस्वीर पेश की गई।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि यह रकम सीधे ईरान के नियंत्रण में नहीं जाएगी। उनके अनुसार इस राशि का उपयोग केवल अमेरिका से खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए किया जाएगा। यहीं से दोनों देशों के बीच नया मतभेद खुलकर सामने आ गया।
अमेरिका ने किसानों के हित का दिया तर्क
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से दोनों देशों को लाभ होगा। एक तरफ ईरान को अपनी खाद्य जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी किसानों को बड़ा आर्थिक फायदा मिलेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि प्रतिबंधों में मिलने वाली राहत और जारी की जाने वाली राशि अमेरिका के नियंत्रण वाले खाते में रखी जाएगी। इस धन का उपयोग केवल खाद्य सामग्री, दवाइयों और मानवीय सहायता से जुड़ी आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए किया जाएगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि यह व्यवस्था दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
ईरान ने अमेरिकी शर्तों को किया पूरी तरह खारिज
ईरान ने अमेरिका के दावों और शर्तों को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि जैसे ही फ्रीज की गई राशि जारी होगी, उस पर केवल ईरान का अधिकार होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कृषि उत्पाद खरीदे भी जाएंगे तो उनका चयन गुणवत्ता, कीमत और देश की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कोई भी देश ईरान पर यह शर्त नहीं लगा सकता कि उसे किस देश से सामान खरीदना है। ईरान ने इसे अपने राष्ट्रीय अधिकार और आर्थिक संप्रभुता का विषय बताया है।
जिनेवा में ईरानी राजदूत ने भी दोहराया रुख
जिनेवा में ईरान के राजदूत अली बहरीनी ने भी इस मुद्दे पर स्पष्ट बयान दिया। उन्होंने कहा कि अपने पैसों का उपयोग कहां और कैसे करना है, यह पूरी तरह ईरान का अधिकार है। किसी दूसरे देश को इस पर शर्तें लगाने का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई समझौता होता भी है तो वह समान सम्मान और बराबरी के आधार पर होना चाहिए। ईरान का कहना है कि आर्थिक फैसले किसी बाहरी दबाव में नहीं लिए जाएंगे और देश अपने हितों को प्राथमिकता देगा।
शांति समझौते के सामने नई चुनौती
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि फ्रीज फंड को लेकर पैदा हुआ यह विवाद अंतिम शांति समझौते को और कठिन बना सकता है। अमेरिका में कई सांसद पहले से ही ईरान को आर्थिक राहत देने के विरोध में हैं।
दूसरी ओर, कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से ईरान के साथ कारोबार करने से बचती हैं। ऐसे माहौल में किसी व्यापक आर्थिक समझौते तक पहुंचना दोनों देशों के लिए आसान नहीं माना जा रहा है।
व्यापारिक संबंध अभी भी सीमित
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच व्यापार बहुत सीमित स्तर पर है। दोनों देशों के बीच अधिकतर कारोबार दवाइयों और मानवीय सहायता से जुड़ी वस्तुओं तक ही सीमित है। वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग 838 मिलियन डॉलर रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में समझौता आगे बढ़ता है तो ईरान कुछ अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीद सकता है। हालांकि, वह अपने आयात को केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रखेगा। ऐसे में 12 अरब डॉलर के फ्रीज फंड के इस्तेमाल को लेकर दोनों देशों के बीच खींचतान फिलहाल समाप्त होती नहीं दिख रही है।