Bhopal UCC Meeting : भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में सोमवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजधानी भोपाल में UCC ड्राफ्टिंग कमेटी की कई अहम बैठकें आयोजित की जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति दिनभर विभिन्न वर्गों, राजनीतिक दलों, धर्मगुरुओं और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ चर्चा करेगी। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद UCC के मसौदे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया और तेज हो जाएगी।
नरोन्हा अकादमी में दिनभर चलेगा मंथन
भोपाल स्थित नरोन्हा प्रशासन अकादमी में सुबह से शाम तक बैठकों का सिलसिला जारी रहेगा। समिति अलग-अलग वर्गों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों से सुझाव प्राप्त करेगी। इस दौरान महिला आयोग, बाल आयोग, अनुसूचित जाति आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग और अल्पसंख्यक आयोग के प्रतिनिधि भी अपने विचार रखेंगे।
समिति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानून का मसौदा तैयार करते समय समाज के हर वर्ग की राय को महत्व दिया जाए और किसी भी समुदाय की चिंताओं को नजरअंदाज न किया जाए।
राजनीतिक दलों और धर्मगुरुओं से ली जाएगी राय
बैठक के दौरान दोपहर में विभिन्न मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की जाएगी। इसके बाद शाम के सत्र में धर्मगुरुओं और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद होगा।
समिति का मानना है कि UCC जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक सहमति और सुझाव बेहद जरूरी हैं। इसी वजह से समाज के अलग-अलग वर्गों को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है ताकि एक संतुलित और व्यावहारिक मसौदा तैयार किया जा सके।
विभागों के सुझावों पर भी रहेगा फोकस
समिति ने राज्य सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को भी आमंत्रित किया है। गृह विभाग कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक प्रभावों को लेकर प्रस्तुतीकरण देगा।
वहीं महिला एवं बाल विकास समेत अन्य विभाग अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े सुझाव समिति के सामने रखेंगे। अधिकारियों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर मसौदे के विभिन्न प्रावधानों की समीक्षा की जाएगी। इससे कानून को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने में मदद मिलेगी।
लाखों सुझावों के आधार पर तैयार हो रहा मसौदा
जानकारी के अनुसार, UCC को लेकर समिति को ऑनलाइन माध्यम, जनसुनवाई और अन्य प्रक्रियाओं के जरिए करीब दो से ढाई लाख सुझाव प्राप्त हुए हैं। इन सुझावों का अध्ययन करने के बाद अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है।
समिति का प्रयास है कि सभी वर्गों के हितों की रक्षा हो और कानून समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जाए। यही वजह है कि अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
कैबिनेट मंजूरी के बाद विधानसभा में पहुंचेगा प्रस्ताव
समिति अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। इसके बाद मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता वाली वरिष्ठ सचिव समिति रिपोर्ट का परीक्षण करेगी। वहां से मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता वाली कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। यदि कैबिनेट से स्वीकृति मिलती है तो UCC विधेयक को 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।
जनपरामर्श प्रक्रिया अंतिम चरण में
प्रदेश सरकार लंबे समय से UCC को लेकर जनपरामर्श की प्रक्रिया चला रही है। इस दौरान आम नागरिकों, विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और धार्मिक नेताओं की राय ली गई है। सोमवार को होने वाली बैठक को इस पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम चरण माना जा रहा है। बैठक से मिले सुझाव भविष्य में तैयार होने वाले विधेयक की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।