Maharashtra Politics : मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (यूबीटी) के भीतर संभावित टूट की अटकलों के बीच गुरुवार को पार्टी नेता संजय राउत के आवास पर अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में राज्यसभा सांसद संजय राउत और लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई तथा राजाभाऊ वाजे शामिल हुए। बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा रही, क्योंकि पार्टी के कुल 9 सांसदों में से 6 सांसद इसमें शामिल नहीं हुए। माना जा रहा है कि बैठक में पार्टी की आगे की रणनीति और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
व्हिप के बावजूद 6 सांसद अनुपस्थित
शिवसेना (यूबीटी) ने संसदीय दल की बैठक के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया था। इसके बावजूद 9 में से केवल 3 सांसद ही बैठक में पहुंचे। अनुपस्थित रहने वाले सांसदों में संजय जाधव, भाउसाहेब वाकचौरे, ओमराजे निंबलकर, संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख और नागेश पाटिल आष्टिकर के नाम शामिल हैं।
पार्टी नेतृत्व ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। अनिल देसाई ने कहा कि इस संबंध में उद्धव ठाकरे से चर्चा हो चुकी है और अनुपस्थित सांसदों को शो कॉज नोटिस जारी किया जा रहा है।
अलग संसदीय गुट बनाने की अटकलें तेज
सूत्रों के अनुसार बैठक में अनुपस्थित रहे छह सांसदों ने अलग संसदीय गुट बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। दावा किया जा रहा है कि इस संबंध में एक पत्र भी लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा गया है। हालांकि इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यदि यह दावा सही साबित होता है तो शिवसेना (यूबीटी) के लिए यह बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा। इससे पहले भी पार्टी को तब बड़ा नुकसान हुआ था जब एकनाथ शिंदे ने कई विधायकों के साथ अलग रास्ता अपनाया था।
संजय राउत का भाजपा पर हमला
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र जैसे राज्य की जो स्थिति बनी है, उसके लिए इतिहास भाजपा को कभी माफ नहीं करेगा।
राउत ने संकेत दिए कि पार्टी के भीतर चल रही गतिविधियों के पीछे राजनीतिक दबाव और साजिश की भूमिका हो सकती है। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी और तेज हो गई है।
कार्रवाई की चेतावनी, निष्कासन भी संभव
संजय राउत और अरविंद सावंत ने स्पष्ट किया है कि पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले सांसदों के खिलाफ कानूनी और संगठनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर ऐसे सांसदों का निष्कासन भी किया जा सकता है।
नेताओं ने पूर्व सांसद शरद यादव के मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी अनुशासन का उल्लंघन गंभीर विषय है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि शो कॉज नोटिस के बाद पार्टी और बागी सांसदों की अगली रणनीति क्या होगी।