Meenakshi Nomination Controversy : भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन में अनुशासन को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के मामले में प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन नहीं करने पर एनएसयूआई (NSUI) के 22 जिला अध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
कांग्रेस संगठन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए संबंधित पदाधिकारियों से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। पार्टी का मानना है कि प्रदेश नेतृत्व के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई जिलों में अपेक्षित विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ, जिससे संगठन की रणनीति प्रभावित हुई।
जीतू पटवारी ने दिए थे आंदोलन के निर्देश
जानकारी के अनुसार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के विरोध में प्रदेशभर में आंदोलन चलाने के निर्देश दिए थे। इसके तहत 15, 16 और 17 जून को अलग-अलग कांग्रेस संगठनों को प्रदर्शन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
पार्टी ने सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन और पुतला दहन जैसे कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई थी, ताकि इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाया जा सके। हालांकि कई जिलों में संगठनात्मक गतिविधियां अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुईं।
तीन दिनों तक चलना था विरोध अभियान
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 15 जून को युवक कांग्रेस, 16 जून को एनएसयूआई और 17 जून को महिला कांग्रेस को प्रदर्शन करने के निर्देश दिए गए थे। पार्टी नेतृत्व चाहता था कि सभी जिला इकाइयां सक्रिय रूप से भाग लेकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराएं लेकिन रिपोर्ट के अनुसार कई जिलों में कार्यक्रम आयोजित नहीं किए गए या फिर उनमें अपेक्षित संख्या में कार्यकर्ता शामिल नहीं हुए। इसी कारण संगठन ने संबंधित जिला अध्यक्षों से जवाब तलब किया है।
भोपाल में भी सीमित रहा प्रदर्शन
सूत्रों के अनुसार 15 जून को भोपाल में आयोजित युवक कांग्रेस के प्रदर्शन में भी कार्यकर्ताओं की संख्या काफी कम रही। बताया जा रहा है कि प्रदर्शन में केवल 8 से 10 कार्यकर्ता ही शामिल हुए थे।
पार्टी नेतृत्व ने इसे गंभीरता से लिया है और संगठनात्मक सक्रियता को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए जमीनी स्तर पर मजबूत और प्रभावी आंदोलन जरूरी हैं।
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तीन दिन में देना होगा स्पष्टीकरण
एनएसयूआई के 22 जिला अध्यक्षों को जारी नोटिस में तीन दिन के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। संगठन यह जानना चाहता है कि प्रदेश नेतृत्व के निर्देशों का पालन क्यों नहीं किया गया। जवाब मिलने के बाद संगठन आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम कांग्रेस संगठन के भीतर अनुशासन और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

