Pahalgam Attack NIA Investigation UPDATE : नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक नया और चौंकाने वाला खुलासा किया है। एनआईए के अनुसार, मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादियों के पास से बरामद दो मोबाइल फोन की कड़ियां सीधे चीन और पाकिस्तान से जुड़ी हुई हैं।
जांच में सामने आया है कि ये दोनों स्मार्टफोन (रेडमी 9टी और रेडमी नोट 12) चीनी कंपनी Xiaomi की सप्लाई चेन के माध्यम से पाकिस्तान भेजे गए थे। पाकिस्तान के कराची की एक कंपनी ‘टेक सीरत प्राइवेट लिमिटेड’ ने इन्हें आयात किया था और बाद में कराची व लाहौर के पतों पर इनकी डिलीवरी की गई थी।
इन मोबाइलों की फोरेंसिक जांच में यह भी पता चला है कि आतंकियों के नेविगेशन ऐप में पहलगाम की बैसरन घाटी की लोकेशन पहले से सुरक्षित थी और हमले से कई दिन पहले 15-16 अप्रैल को ही वहां के स्क्रीनशॉट ले लिए गए थे, जिसके बाद 22 अप्रैल को इस वारदात को अंजाम दिया गया।
चीन के रास्ते लश्कर के पास पहुंचा था अमेरिकी गोप्रो कैमरा
एनआईए की तफ्तीश में यह बात भी सामने आई है कि आतंकवादियों के पास से एक अमेरिकी कंपनी ‘गोप्रो’ का हाई-टेक कैमरा भी मिला था। अमेरिकी कंपनी ने पुष्टि की है कि यह कैमरा चीन में उनके तय डिस्ट्रीब्यूटर को भेजा गया था, जहां से यह लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों तक पहुंच गया।
जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगा रही हैं कि चीन से यह उपकरण किन बिचौलियों, लोकल सपोर्ट और गुप्त खरीद नेटवर्क के जरिए भारत में सक्रिय आतंकियों तक सप्लाई किया गया। दरअसल, कश्मीर में आतंकी संगठन अब हमलों की रिकॉर्डिंग करने और उनका प्रचार करने के लिए बॉडी कैमरों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं।
लाहौर में बैठा लश्कर का ‘लंगड़ा’ है हमले का मास्टरमाइंड
एनआईए द्वारा दाखिल चार्जशीट के मुताबिक, इस पूरे हमले की कमान पाकिस्तान के लाहौर से लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’ संभाल रहा था। पैर में गोली लगने के कारण नकली पैर लगाने वाला साजिद जट्ट ही आतंकियों का मुख्य हैंडलर था, जो हमले के दौरान तीनों आतंकवादियों को पल-पल की हिदायत दे रहा था।
साजिद जट्ट ने ही 2019 में लश्कर के मुखौटा संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) को खड़ा किया था और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम है। यह मॉड्यूल पहलगाम के अलावा डांगरी, पुंछ वायुसेना काफिले, रियासी बस हमले और श्रीनगर की जेड-मोड़ टनल पर हुए हमले में भी शामिल था, जहां टनल हमले में मारे गए आतंकी जुनैद के पास से भी ठीक वैसी ही एम4 कार्बाइन और गोप्रो कैमरा मिला था।
गाइड्स की लापरवाही से हुआ हमला
इस मामले में सुरक्षा एजेंसियों ने परवेज अहमद जोठार और बशीर अहमद जोठार नाम के दो टूरिस्ट गाइड्स को भी गिरफ्तार किया है। चार्जशीट के अनुसार, इन दोनों गाइड्स ने आतंकियों को बैसरन वैली में देखा था, लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी सुरक्षा बलों को नहीं दी। हमले से एक दिन पहले इन आतंकियों ने गाइड परवेज की झोपड़ी में खाना भी खाया था और जाते समय राशन भी साथ ले गए थे।
इस मजहबी टारगेटेड हमले में 25 पर्यटकों और 1 स्थानीय नागरिक सहित कुल 26 लोगों की मौत हुई थी। बाद में 28 जुलाई को ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत सुरक्षा बलों ने हमले में शामिल तीनों पाकिस्तानी आतंकियों (फैसल जट्ट, हबीब ताहिर और हमजा अफगानी) को मार गिराया था।
Vedanta ED Raid : वेदांता समूह पर ED की बड़ी कार्रवाई, FEMA उल्लंघन जांच में कई ठिकानों पर छापेमारी
बदले में भारत ने की थी एयर स्ट्राइक
पहलगाम में हुए इस कायराना हमले का जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने 6 मई की रात को पाकिस्तान और पीओके (PoK) में घुसकर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत बड़ी एयर स्ट्राइक की थी। भारत की तरफ से दागी गईं 24 मिसाइलों ने आतंकवादियों के 9 ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया था।
इस जवाबी कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादी ढेर हुए थे, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य और उसके 4 करीबी सहयोगी भी शामिल थे।