Nawab Property Dispute : मध्य प्रदेश। राजधानी भोपाल की अरबों रुपये की संपत्तियों और शत्रु संपत्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। अभिनेता सैफ अली खान और उनकी माता शर्मिला टैगोर सहित पूरे नवाब परिवार के नाम दर्ज संपत्ति के रिकॉर्ड फिर से खंगाले जाएंगे। इस पूरे मामले की जांच कराने के लिए प्रशासन को एक पत्र भी दिया गया है।
77 साल पुराने मर्जर एग्रीमेंट के आधार पर जांच की मांग
इस जांच को कराने की मांग भारत सरकार और भोपाल रियासत के बीच आज से करीब 77 साल पहले हुए विलय समझौते (मर्जर एग्रीमेंट) के आधार पर की जा रही है। इस समझौते के दस्तावेजों में सरकारी जमीन और नवाब परिवार की संपत्तियों का अलग-अलग रिकॉर्ड दर्ज है। इसी एग्रीमेंट के आधार पर अब नए सिरे से जांच कराने की मांग उठ रही है।
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समाजसेवी ने उठाए नए मुद्दे, मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन
इस पूरे मामले में जांच के लिए समाजसेवी अमिताभ अग्निहोत्री ने कुछ नए मुद्दे उठाए हैं। इस संबंध में सोमवार को अपर जिला मजिस्ट्रेट सुमित कुमार पाण्डे को एक ज्ञापन भी सौंपा गया है। इस ज्ञापन में मांग की गई है कि नवाब परिवार की जमीनों की जांच का मुख्य आधार उसी मर्जर एग्रीमेंट की कॉपी को बनाया जाए, जो 29 अप्रैल 1949 को भारत सरकार और नवाब हमीदुल्ला खान के बीच हुआ था।
1949 के समझौते की सूची को आधार बनाने की मांग
साल 1949 में हुए इस ऐतिहासिक समझौते के दौरान भोपाल की प्रॉपर्टी और सरकारी जमीन की एक विस्तृत सूची (लिस्ट) तैयार की गई थी। प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में साफ तौर पर यह मांग की गई है कि इसी पुरानी सूची को जांच का मुख्य आधार बनाया जाए और वर्तमान रिकॉर्ड से इसका मिलान हो।
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1370 एकड़ जमीन पर कानूनी पेच
भोपाल शहर के कोहेफिजा, नयापुरा और हलालपुर सहित पांच अलग-अलग लोकेशंस पर मौजूद नवाबी संपत्तियों पर कानूनी पेंच फंसे हुए हैं। दिए गए ज्ञापन के मुताबिक, अभिनेता सैफ अली खान ने पूर्व में माननीय उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में भोपाल शहर की लगभग 1370 एकड़ भूमि को नवाब की संभावित व्यक्तिगत प्रॉपर्टी दर्शाया था।
अब जांच कमेटी से साफ तौर पर यह मांग की गई है कि वह इन जमीनों के वर्तमान स्टेटस को पूरी तरह स्पष्ट करे। इसके साथ ही ज्ञापन में यह चिंता भी जताई गई है कि इस जांच में देरी होने के कारण रिकॉर्ड में गड़बड़ी की आशंका बनी हुई है।