Dindori Water Structures : मध्य प्रदेश। डिंडौरी जल संरक्षण और पानी की एक-एक बूंद बचाने के मामले में मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले ने पूरे देश में मिसाल पेश की है। अपनी कोशिशों और जनता के सहयोग से डिंडौरी जिला पानी रोकने वाली संरचनाओं के निर्माण में पूरे देश में दूसरे नंबर पर पहुँच गया है। पिछले दो महीनों से जिले में लोगों के सहयोग से यह काम चल रहा है। अब तक यहाँ कुल 6 लाख 26 हजार 955 जल संरचनाएं बनाई जा चुकी हैं। पूरे देश में आंध्र प्रदेश का अल्लूरी सीताराम राजू जिला पहले स्थान पर है।
अफसरों ने समझाया महत्व
शुरुआत में ग्रामीण इस अभियान का महत्व नहीं समझ पा रहे थे। इसके बाद प्रशासन और इंजीनियरों की टीम ने हर गांव में जाकर चौपाल लगाई। ग्रामीणों को समझाया गया कि पानी रोकने से ही बचेगा। इसके बाद लोग खुद आगे आए।
ग्राम पंचायत सिंहपुर की मेकन बाई ने बताया कि बात समझ में आने के बाद उन्होंने खुद मेहनत की और अपने पैसे से पाइप खरीदकर घर के सामने सोखता गड्ढा बनाया। जमुना खैरवार ने बताया कि पहले वे सोचते थे कि पानी देना सिर्फ सरकार का काम है, लेकिन अब उन्होंने खुद अपने घर में दो सोखता गड्ढे बनवाए हैं।
मां की बगिया योजना में टपक पद्धति से सिंचाई
आजीविका परियोजना से जुड़ी सुदामा सुरेश्वर ने बताया कि मां की बगिया योजना के तहत पांच परिवारों को मिलाकर नींबू और आम के पेड़ लगाए गए हैं। इन पौधों को बचाने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए ग्रामीण जागरूक हुए हैं। अब यहाँ टपक पद्धति (ड्रिप), हांडी और सलाइन की बोतलों का उपयोग करके पौधों को पानी दिया जा रहा है।
पहाड़ियों पर खोदे गए कंट्रोल ट्रेंच
गांँवों में पहले से बने चार तालाबों और 12 स्टॉप डैम का ग्रामीणों की मदद से सुधार किया गया है। इसके अलावा जमीन के नीचे पानी का स्तर सुधारने के लिए चार पहाड़ियों पर लगभग साढ़े तीन सौ कंट्रोल ट्रेंच खुदवाए गए हैं। हैंडपंपों के पास भी सोखता गड्ढे बनाए गए हैं ताकि बेकार बहने वाला पानी सीधे जमीन के अंदर जा सके। आने वाले मानसून में इन पहाड़ियों पर बड़े पैमाने पर पौधे लगाने की योजना है।
कठिन भौगोलिक स्थिति है बड़ी चुनौती
कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने बताया कि मार्च के महीने में जल शक्ति मंत्रालय के निर्देशों के बाद जिले में यह काम शुरू किया गया था। जिले की भौगोलिक स्थिति काफी कठिन है, लोग मुख्य रूप से पठार और छोटे-छोटे टोलों में रहते हैं।
भूगोल की प्रोफेसर डॉक्टर रश्मि गौतम के अनुसार, जिले की जमीन पथरीली और उबड़-खाबड़ है, जिसके कारण बारिश का पानी सीधे जमीन के अंदर नहीं जा पाता। छोटी-छोटी संरचनाओं से पानी रुकने में मदद मिलेगी।
यही कारण है कि जिले के कई गांवों में आज भी जल संकट बना हुआ है। जिला मुख्यालय से सिर्फ तीन किलोमीटर दूर आवास टोला में महिलाएं डेढ़ किलोमीटर दूर जाकर कुएं से गंदा पानी लाने को मजबूर हैं।
वहीं घुसिया ग्राम पंचायत के ढीमरान टोला में पिछले चार साल से पाइप लाइन खराब पड़ी है, जिससे पांच सौ की आबादी कुएं के भरोसे है। हाल ही में पानी की समस्या को लेकर करौंदा ग्राम पंचायत के ग्रामीणों ने शहडोल-पंडरिया स्टेट हाईवे पर चक्काजाम भी किया था।
प्रशासन ने बनाया कंट्रोल रूम
पीएचई विभाग के इंजीनियर अफजल अमानुल्लाह खान ने बताया कि पानी की किल्लत की निगरानी के लिए कलेक्ट्रेट में एक विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है। जिले में जहां से भी पानी के संकट की खबर आ रही है, वहाँ कंट्रोल रूम के माध्यम से तुरंत टैंकर या दूसरी व्यवस्थाएं भेजी जा रही हैं।