जब पूरे दुनिया मे आबादी इतनी तेजी से बढ़ते जा रही है तो ये खबर आपको जरूर चौका सकती है।पिछले 12 साल से जापान के मृतसंख्या मे बढ़ोतरी आ रही है और जन्म दर मे कमी। इससे देश की अर्थ व्यवस्था से लेकर अस्तित्व तक पर संकट आ सकता है ।जापान मे हाल ही मे आए सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक 2022 मे 124.49 मिलियन हो गई है जो पिछले साल से 556,000 काम है ।
2022 में जापान में नवजात शिशुओं की संख्या घटकर 800,000 से नीचे आ गई, जबकि मौतों की संख्या 1.57 मिलियन से अधिक हो गई।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जापान में जन्म दर सबसे कम और जीवन प्रत्याशा सबसे अधिक है। 2020 में, जापान में 1500 लोगों में से लगभग 1 की उम्र 100 या उससे अधिक थी।
पर ऐसा क्यों हो रहा है?
• हमारी तेजी से बदलती लाइफस्टाइल
• ज्यादा लंबे समय तक काम करते रहना
• बढ़ती महंगाई

इन कारणों से कई जापानी युवाओं के लिए परिवार शुरू करना बहुत महंगा हो गया है।
2022 मे एक जापानी रिपोर्ट के मुताबिक एक बच्चे को पालने के लिए जापान दुनिया के सबसे महंगे शहरों मे से एक है।कोरोना महामारी ने जापान की जनसांख्यिकीय चुनौतियों को बढ़ा दिया है, हाल के वर्षों में कम शादियों के कारण कम जन्महुआ है और अधिक मौतों के लिए मूल रूप से COVID-19 जिम्मेदार है।जापान की सरकार इस संकट से निपटने के लिए कुछ उपाय अपनाने वाली है, जिसमें बच्चों के पालन-पोषण, प्रीस्कूल शिक्षा, नर्सिंग देखभाल सेवाओं और वर्क्प्लैस मे सुधारों के लिए अधिक वित्तीय सहायता शामिल है।
बेबी बोनस को बढ़ाकर 500,00 येन करने की तैयारी की गई है और ये भी कहा जा रहा है की प्रसवोत्तर आवश्यकताओं की लागत को कवर करने में मदद के लिए 100,000 येन का एक वित्तीय सहायता पैकेज तैयार किया जाएगा।अप्रैल 2023 में, जापान ने अपनी नई चिल्ड्रेन एंड फ़ैमिलीज़ एजेंसी लॉन्च की, जो अधिक डेकेयर सेंटर स्थापित करने और काउंसिलिंग जैसी युवा सेवाएं प्रदान करने और माता-पिता का साथ देने के उपायों पर केंद्रित है।