Aayudh

ऐसा नेतृत्व और ऐसी संवेदनशीलता किसी अन्य दल में संभव नही

कल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री निवास के दृश्य लगभग पूरे देश में चर्चा का केंद्र बने रहे l कैसे एक प्रदेश का मुखिया, सीधी में हुई एक घटना से पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाने, उसका सम्मान पुनः लौटाने का हर संभव प्रयास करता है और प्रदेश के सभी जाति वर्ग के लोगों को सामाजिक समरसता व लोक आचरण का एक सारगर्भित पाठ पढ़ा जाता है l इससे पूर्व ही मुख्यमंत्री ने एक दिन पहले ट्वीट कर अपने मन की पीड़ा व्यक्त की थी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा था “कि जबसे मैंने सीधी की घटना का वीडियो देखा, अंतर्मन अत्यधिक व्याकुल और हृदय पीड़ा से भरा हुआ है। मैं तबसे ही दशमत जी से मिलकर उनका दुःख बांटना चाहता था और यह विश्वास भी दिलाना चाहता था कि उनको न्याय मिलेगा। कल उनसे और उनके परिवार से भोपाल में अपने निवास पर मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करने के साथ परिवार को ढांढस बंधाऊंगा।” उनके इस कथन के बाद से ही मीडिया और सोशल मीडिया में अनेकों प्रकार के कयास लगाये जा रहे थे l पर जिस प्रकार से प्रदेश के मुखिया का एक मानवीय पक्ष समाज के सामने आया है, वह अकल्पनीय है l जो मुख्यमंत्री निवास के वीडियो सभी मीडिया व सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर दिख रहे हैं, उसमें वे खुद दशमत जी को लेकर आवास के अंदर आए l उन्हें कुर्सी पर बैठाकर खुद समक्ष कुर्सी पर ना बैठकर एक छोटी मेज पर जा बैठे l जिसके बाद एक थाली बुलाई गई व सीएम ने अपने हाथों से उनके पैर धोए। इसके बाद सीएम ने शॉल ओढ़ाकर तिलक लगाकर व भगवान गणेश की एक प्रतिमा भेंट में देकर उनका सम्मान भी किया। और उन्होंने कहा, “कि मैं दशमत जी से माफी मांगता हूं। मेरे लिए जनता ही भगवान है।” इसके अलावा मुख्यमंत्री महोदय ने दशमत जी से अनेक विषयों पर चर्चा भी की। दशमत से पूछा कि क्या करते हो, घर चलाने के क्या साधन है, कौन-कौन सी योजनाओं का लाभ मिल रहा है? यहां तक उन्होंने दशमत को सुदामा भी कहा। सीएम ने कहा कि दशमत अब मेरे दोस्त हैं। एक तरफ इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष अनर्गल आरोप लगाकर हाय तौबा मचाये हुए है l आखिर मचाये भी क्यों ना, वंशवाद परंपरा के अधीन चल रही पार्टी के नेताओं और उनके पुत्रों के लिए ऐसे दृश्य मात्र कल्पना में ही पूर्ण हो सकते हैं l जिन्होंने कभी गरीबी स्वप्न में भी ना देखी हो, उनके लिए किसी पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति के सम्मान की चिंता कल्पना का ही एक रूप है l दूसरी तरफ मुख्यमंत्री का यह नया संवेदनशील रूप लोगों द्वारा अत्याधिक सराहा जा रहा है l जहां उन्होंने दशमत के मनोभाव से उस घटना को विस्मृत करवाने का हरसंभव प्रयास किया व उससे व्यक्तिगत स्तर पर सुख दुख भी बाटें l पूर्व में भी एक ऐसा ही संवेदनशीलता का वाक्य सितंबर 2021 में आया था l जब एक प्रदेश का मुखिया कितना सहज और सरल होना चाहिए, ये जनता को देखने को मिला था । जब खंडवा जिले में सीएम की यात्रा पंधाना के बलरामपुर गांव पहुंची तो भाषण के दौरान गांव की एक बेटी ने मुख्यमंत्री को अपनी व्यथा से भरी चिट्ठी सौंपी थी। सीएम ने भाषण के दौरान ही कलेक्टर को चिट्ठी में लिखी समस्या देखने को कहा था और साथ ही कलेक्टर को तुरंत आर्थिक मदद जारी करने के निर्देश दिए। दरसल उस बालिका के पिता की चार माह पहले कोरोना से देहावसान हुआ था। सीएम का ये अंदाज उस वक्त भी ग्रामीणों को खूब भाया था और अब सीधी मामले में उनके व्यक्तित्व का यह मानवीय पहलू की चारों ओर लोगों द्वारा निरंतर प्रशंसा की जा रही है उदयभान सिंह (स्वतंत्र लेखक)

खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नु किस डर से छिपा हुआ है?

5 जुलाई को ये खबर आई थी की पन्नु की कैलिफोर्निया मे कार हादसे मे मौत हो गई। पर अब कई पत्रकार इसे एक अफवाह बता रहे है ।गुरपतवंत सिंह पननु एक प्रतिबंधित खालिस्तानी अलगाववादी संगठन “सिख्स फॉर जस्टिस” का संस्थापक था। उसकी एक वीडियो सामने आई है जिसमे UN HQ NEW YORK के बाहर सिखों से Khalistan Refrendum पर वोट करने को कह रहा है और अपने सहयोगी निज्जर की मौत के लिए भारतीय राजनयिकों को जिम्मेदार ठहराया।ये वीडियो 5 जुलाई की बताई जा रही है।सभी का मानना है की वो अभी डर से छिपा हुआ है।पर डर किस बात की? दरअसल पिछले 45 दिनों मे 3 बड़े खालिस्तानी आतंकवादि विदेश मे मारे गए ।• हरदीप सिंह निजजर को अमेरिका के वैनकुवर सिटी मे उसके ट्रक मे 18 जून को गोली मार दी गई थी।• 7 मई को पाकिस्तान के लाहौर मे परमजीत सिंह पँवार की मॉर्निंग वाक करते हुए गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।• और किसी अनजान वजहों से 15 जून को ब्रिटेन के अस्पताल मे अवतार सिंह खंडा की मौत हो गई थी। भारत का पक्ष गुरपतवंत सिंह पन्नू यूएपीए की धारा 51(ए) के तहत वांछित खालिस्तानी आतंकवादी है। कथित तौर पर पन्नू पर भारत में राजद्रोह के 3 मामलों सहित 22 आपराधिक मामलें है।खालिस्तान का ख़तरा जल्द ख़त्म होने वाला नहीं है; दो दिन पहले सैन फ्रांसिस्को में भारत के दूतावास में आग लगा दी गई थी जबकि कनाडा में खालिस्तानियों ने दो देसी राजनयिकों को निशाना बनाया था. कनाडा में अगले सप्ताह खालिस्तान स्वतंत्रता रैली आयोजित करने की भी चर्चा है। हालाँकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि न तो अमेरिका के अधिकारियों और न ही भारतीय सरकार के अधिकारियों ने उसके निधन की पुष्टि की है। पर वो कनाडा सरकार से लगातार सवाल उठा रहे है।इन सभी के बीच भारतीय सुरक्षा बाल के किसी बड़े अधिकारी ने एक न्यूज एजेंसी को बयान दिया की पननु सच मे मार गया है। देश विदेश के सभी लोगों मे संशय अभी भी बना है की खालिस्तानी आतंकवादी अब किस एम्बसी को अपना निशाना बनाएंगे ।

जापान मे लगातार 12 साल से घट रही है जनसंख्या

जब पूरे दुनिया मे आबादी इतनी तेजी से बढ़ते जा रही है तो ये खबर आपको जरूर चौका सकती है।पिछले 12 साल से जापान के मृतसंख्या मे बढ़ोतरी आ रही है और जन्म दर मे कमी। इससे देश की अर्थ व्यवस्था से लेकर अस्तित्व तक पर संकट आ सकता है ।जापान मे हाल ही मे आए सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक 2022 मे 124.49 मिलियन हो गई है जो पिछले साल से 556,000 काम है । 2022 में जापान में नवजात शिशुओं की संख्या घटकर 800,000 से नीचे आ गई, जबकि मौतों की संख्या 1.57 मिलियन से अधिक हो गई।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जापान में जन्म दर सबसे कम और जीवन प्रत्याशा सबसे अधिक है। 2020 में, जापान में 1500 लोगों में से लगभग 1 की उम्र 100 या उससे अधिक थी। पर ऐसा क्यों हो रहा है?• हमारी तेजी से बदलती लाइफस्टाइल• ज्यादा लंबे समय तक काम करते रहना• बढ़ती महंगाई इन कारणों से कई जापानी युवाओं के लिए परिवार शुरू करना बहुत महंगा हो गया है।2022 मे एक जापानी रिपोर्ट के मुताबिक एक बच्चे को पालने के लिए जापान दुनिया के सबसे महंगे शहरों मे से एक है।कोरोना महामारी ने जापान की जनसांख्यिकीय चुनौतियों को बढ़ा दिया है, हाल के वर्षों में कम शादियों के कारण कम जन्महुआ है और अधिक मौतों के लिए मूल रूप से COVID-19 जिम्मेदार है।जापान की सरकार इस संकट से निपटने के लिए कुछ उपाय अपनाने वाली है, जिसमें बच्चों के पालन-पोषण, प्रीस्कूल शिक्षा, नर्सिंग देखभाल सेवाओं और वर्क्प्लैस मे सुधारों के लिए अधिक वित्तीय सहायता शामिल है।बेबी बोनस को बढ़ाकर 500,00 येन करने की तैयारी की गई है और ये भी कहा जा रहा है की प्रसवोत्तर आवश्यकताओं की लागत को कवर करने में मदद के लिए 100,000 येन का एक वित्तीय सहायता पैकेज तैयार किया जाएगा।अप्रैल 2023 में, जापान ने अपनी नई चिल्ड्रेन एंड फ़ैमिलीज़ एजेंसी लॉन्च की, जो अधिक डेकेयर सेंटर स्थापित करने और काउंसिलिंग जैसी युवा सेवाएं प्रदान करने और माता-पिता का साथ देने के उपायों पर केंद्रित है।

इंदौर में अरमान और रईस ने किया 12 साल की आदिवासी लड़की के साथ रेप, चला बुलडोज़र

गुरुवार 6 अप्रैल को इंदौर के बड़ीयाकीमा गाँव में एक आदिवासी परिवार के घर पर अरमान उर्फ़ गुट्टू मुस्लिम और  रईस सहित तीन मजदूर काम करने के लिए आये थे, इन्हें सरिया  काटने बुलाया गया था . घर आये इन मुस्लिम मजदूरों को जैसे ही पता चला कि लड़की घर पर अकेली है और माँ भी बहार है तो वो दरिंदे लड़की को किसी तरह छत पर ले आये फिर तीनो ने मिलकर बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया . बताया जा रहा है कि लड़की की उम्र महज़ 12 साल है साथ ही वो एक आदिवासी लड़की है और तीनो आरोपी मुसलमान हैं जिन्होंने नाबालिक बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया.वारदात का खुलासा तो तब लगा जब शाम को लड़की की माँ घर आई. घटना की जानकारी मिलने पर आज सुबह इंदौर कलेक्टर इलय्या टी.राजा. ने तीनो आरोपी को गिरफ्तार करने और अरमान उर्फ़ गुट्टू मुस्लिम के घर अवैध अतिक्रमण पर बुलडोज़र चलाने के निर्देश दिए. भीम आर्मी जैसे संगठनों ने साधी चुप्पी जहाँ एक ओर सोशल मीडिया पर आरोपी के खिलाफ हुए बुलडोज़र एक्शन की सभी लोग तारीफ करते दिखाई दे रहे हैं वहीं दलितों और आदिवासियों के नाम पर राजनीति करने वाले संगठनो ने चुप्पी साधी हुई है.वही विश्व हिन्दू परिषद् के कार्यकर्ता सम्बन्धित खुडेल पुलिस थाने पर एकत्रित होकर अन्य दो आरोपी के खिलाफ भी कठोरतम कार्यवाही की मांग कर रहें है.

Threads क्या है जिसे सब Twitter किलर बता रहे है

META के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग ने आखिरकार ट्विटर का प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म निकाल ही लिया है।थ्रेडस ट्विटर जैसा ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है जिसपर लोग सभी से आपस मे बात-चित कर पाएंगे और खबरों की जानकारी ले पाएंगे।इसे इंस्टाग्राम के ही टीम ने डिजाइन किया है । उनका कहना है कि ये इंस्टाग्राम जैसा ही है, फर्क बस इतना है की ये टेक्स्ट–बेस्ड एप है। यहाँ लोग 500 कैरेक्टर्स मे पोस्ट कर पाएंगे और साथ ही फोटो, विडिओ और लिंक्स भी डाल सकते है । और ट्विटर के तरह ही इसपर लोग लाइक, शेयर और कमेन्ट कर पाएंगे। कहते है ना लोहा जब गर्म हो तभी हथौड़ा मारना चाहिए, ठीक वैसा ही किया है मार्क जुकरबर्ग ने।ट्विटर में किये गए विवादित बदलावों के बाद पिछले साल के मुकाबले उसकी मार्केट वैल्यू काफी घट चुकी है। पिछले साल ट्विटर की कमान एलोन मस्क के हाथ मे जाते ही इस एप ने सबके उम्मीदों के बिल्कुल विपरीत जाकर प्रदर्शन दिया है। पहले इसके अलगोरिदम के साथ छेड़–छाड़ करने के बाद, इसमे मंथली सब्सक्रिप्शन लाया गया और फिर ब्लू टिक का व्यापार तो कोई भूल ही नहीं पाएगा । और अब जाकर नए नियमों के अनुसार लोग ट्विटर पर लगभग 300 ट्वीट्स ही पढ़ पाएंगे ।इन्ही सब वजहों से निवेशक, प्रचारक और यूसर्स सब इसे छोड़ रहे है और इसकी सालाना कमाई 50 प्रतिशत कम गई है । जुकरबर्ग ले आए है थ्रेडस एप आपको बात दे की थ्रेडस 5 जुलाई को लॉन्च हो चुका है। आते के साथ ही पहले सात घंटों मे इसपर 10 मिलियन यूसर्स भी आ चुके है । और ऐसा खुद मार्क ज़ुकरबर्ग ने अपने अकाउंट से पोस्ट कर बताया है। ट्विटर पर 250 मिलियन यूसर्स मौजूद है और वही इंस्टाग्राम पर उससे लगभग 10 गुना ज्यादा 2 बिलियन यूसर्स है । तो ये थ्रेडस के लिए मददगार साबित होगा क्योंकि पहले से ही जो लोग इंस्टाग्राम पर यूसरनेम का इस्तेमाल करते है, उसी के साथ ही वो थ्रेडस पर भी अकाउंट बना पाएंगे। और अपने फॉलोवर्स को भी इधर देख पाएंगे। इससे यूसर्स को पहले से ही इसे चलाने मे सहूलियत होगी ।अब ये देखना दिलचस्प होगा की थ्रेडस इंस्टाग्राम के जैसे ही लोगों का दिल जीत पाता है या फिर ट्विटर जैसे इससे भी लोग दूर भागना चाहेंगे।

पेशाब कांड के ज़रिये RSS को बदनाम करने की साज़िश

UP की काबा फेम नेहा सिंह राठौर के खिलाफ MP पुलिस ने कसा शिकंजा मध्य प्रदेश के सीधी जिले में हुए पेशाब कांड के बाद जहाँ एक ओर विपक्षी दल इसपर सियासत कर रहे है वहीं दूसरी ओर इस पर अलग अलग नैरेटिव चलाये जारहे हैं जिनके ज़रिये कई लोग आरएसएस को बदनाम करने की साज़िश कर रहे हैं .ऐसा ही एक नैरेटिव नेहा सिंह राठौर नामक एक ट्विटर हैंडल पर भी दिखाई दिया, जिसपर एक मीम अपलोड की गई, जिसमे सीधी में आदिवासी युवक के साथ हुए अमानवीय व्यवहार को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ  से जोड़ा गया.जिसपर प्रदेश की राजधानी और इंदौर में ने उक्त ट्विटर हैंडल के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया . ये भी देखें –UCC के नाम पर आपको ठगने की तैयारी पेशाब कांड को RSS से जोड़ा .नेहा सिंह राठौर नामक ट्विटर हैंडल पर एक मीम डाली गयी जिसमे पेशाब कांड को आरएसएस से जोड़ा गया जिसपर भोपाल और इंदौर में ट्विटर हैंडल के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराया जिसमे लिखा गया है कि “ट्विटर पर डाली गयी उक्त पोस्ट देखने से आदिवासी समाज और राष्ट्रीय स्वयं सेवकों के बीच आपस में शत्रुता एवं वैमनस्यता की भावना पैदा कर रही है .जिससे आदिवासी समाज और राष्ट्रीय स्वयं सेवकों के बीच रोष एवं नाराज़गी है .” साथ ही उन्होंने अनुरोध किया कि नेहा सिंह राठौर नमाक ट्विटर हैंडल के खिलाफ उचित कारवाही की जाये . “केंद्र में जो भी पार्टी विपक्ष में है, मैं उसके साथ हूं.” इस पर नेहा सिंह राठौर की भी प्रतिक्रया आई है उन्होंने ट्वीट कर कहा कि ” केंद्र में जो भी पार्टी विपक्ष में है, मैं उसके साथ हूं. सरकारें बदल जाएंगी, पर मैं विपक्ष में ही रहूंगी. एक लोक-कलाकार को जनता के पक्ष में रहकर सरकार से सवाल करना चाहिए. यही उसका धर्म है. मैं अपने धर्म के साथ हूं. मैं लोकतंत्र के साथ हूं.”