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APP vs BJP : 7 दिन में 7 सांसद OUT! AAP में ऑपरेशन लोटस’ का मास्टरस्ट्रोक! अंदरखाने में हुआ क्या खेल?

APP vs BJP

APP vs BJP : नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के लिए बीता सप्ताह किसी बड़े राजनीतिक झटके से कम नहीं रहा। महज सात दिनों के भीतर पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए, जिससे न सिर्फ पार्टी की ताकत कमजोर हुई, बल्कि संसद का पूरा सियासी गणित भी बदल गया। इस घटनाक्रम को एक सुनियोजित राजनीतिक ऑपरेशन के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है।

केजरीवाल को पहले ही लग गई थी भनक

बताया जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल को इस टूट की आशंका पहले ही हो गई थी। 22 अप्रैल की सुबह उन्होंने अपने कई सांसदों से संपर्क करने की कोशिश की। कुछ नेताओं ने बात की, कुछ ने टालमटोल जवाब दिया, जबकि कुछ ने फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा। इससे साफ संकेत मिल गया था कि पार्टी के भीतर कुछ बड़ा होने वाला है।

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संदीप पाठक का जाना बना सबसे बड़ा झटका

इस पूरे घटनाक्रम में संदीप पाठक का बीजेपी में जाना AAP के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। केजरीवाल आखिरी समय तक उनसे संपर्क में रहे और उन्हें भरोसा दिया गया कि वे पार्टी के साथ हैं, लेकिन अचानक वे बीजेपी मुख्यालय पहुंच गए और पार्टी जॉइन कर ली। यह कदम AAP नेतृत्व के लिए पूरी तरह अप्रत्याशित रहा।

राघव चड्ढा बने ऑपरेशन के सूत्रधार

सूत्रों के मुताबिक, राघव चड्ढा इस पूरे ऑपरेशन के मुख्य रणनीतिकार रहे। शराब नीति मामले के बाद से ही उनकी पार्टी से दूरी बढ़ गई थी। इसी दौरान उन्होंने अन्य सांसदों से संपर्क साधा और धीरे-धीरे उन्हें अपने साथ जोड़ने में सफल रहे। बताया जाता है कि विदेश यात्रा के दौरान ही बीजेपी से उनकी बातचीत की नींव रखी गई थी।

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हरभजन सिंह और उद्योगपति सांसदों का रुख

पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह का बीजेपी में जाना पहले से तय माना जा रहा था। वहीं राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और अशोक मित्तल जैसे उद्योगपति सांसदों के लिए यह फैसला राजनीतिक के साथ-साथ व्यावसायिक कारणों से भी जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। इन नेताओं के लिए केंद्र के साथ तालमेल बनाए रखना अहम माना जा रहा था।

बीजेपी को मिला बड़ा फायदा

इस घटनाक्रम के बाद राज्यसभा में बीजेपी की स्थिति काफी मजबूत हो गई है। पार्टी के सांसदों की संख्या बढ़कर 113 तक पहुंच गई है और NDA ने पहली बार उच्च सदन में साधारण बहुमत हासिल कर लिया है। इसका सीधा असर यह होगा कि सरकार अब बड़े और अहम बिलों को पास कराने में पहले से ज्यादा सक्षम हो जाएगी।

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AAP की स्थिति कमजोर, आगे की चुनौती बड़ी

शुक्रवार शाम तक AAP के पास राज्यसभा में केवल 3 सांसद संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल ही बचे हैं। केजरीवाल ने इस घटनाक्रम को “पंजाबियों के साथ धोखा” बताया है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब पार्टी के सामने अपनी साख और संगठन दोनों को बचाने की बड़ी चुनौती है।

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