US Iran Ceasefire Update : तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित सीजफायर वार्ता से पहले बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। Iran ने पाकिस्तान में होने वाली बातचीत में शामिल होने से इनकार कर दिया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, जब तक लेबनान में सीजफायर (Lebanon Ceasefire) लागू नहीं होता, तब तक वह किसी भी वार्ता में हिस्सा नहीं लेगा।
ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि उसका प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद नहीं पहुंचा है और वहां जाने की कोई योजना भी नहीं है। इस बयान के साथ ही उन खबरों को भी खारिज कर दिया गया, जिनमें कहा गया था कि ईरानी डेलिगेशन पहले ही पाकिस्तान पहुंच चुका है।
इससे पहले अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल (The Wall Street Journal) ने दावा किया था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल, जिसमें संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हैं, इस्लामाबाद पहुंच चुका है।
दरअसल, 7 अप्रैल को US और ईरान दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमत हुए थे। इसी के तहत दोनों देशों के बीच शनिवार को इस्लामाबाद में अहम बैठक प्रस्तावित थी। इसके लिए अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के आज पाकिस्तान पहुंचने की योजना है।
लेबनान बना बड़ा मुद्दा
ईरान के इस फैसले के पीछे लेबनान में जारी संघर्ष मुख्य वजह बताया जा रहा है। हिजबुल्लाह (Hezbollah) जो ईरान समर्थित एक शक्तिशाली मिलिशिया है, लेबनान में सक्रिय है। इजराइल के लगातार हमलों से अगर हिजबुल्लाह कमजोर होता है, तो ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव पर असर पड़ सकता है।
ईरान ने सीजफायर के लिए कई शर्तें रखी हैं, जिनमें क्षेत्रीय स्तर पर संघर्ष खत्म करना शामिल है। यानी ईरान, लेबनान और यमन में हमले रुकने चाहिए। ईरान का मानना है कि बिना व्यापक शांति के किसी एक मोर्चे पर समझौता संभव नहीं है।
अमेरिका-ईरान वार्ता के प्रमुख मुद्दे
प्रस्तावित वार्ता में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होनी थी। इनमें ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम प्रमुख है, जिस पर अमेरिका कड़ा रुख अपनाए हुए है। अमेरिका चाहता है कि ईरान उच्च स्तर के यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह बंद करे और अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करे।
इसके अलावा होर्मुज (Strait of Hormuz) का मुद्दा भी बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस गुजरता है। ईरान इस पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है, जबकि अमेरिका इसे पूरी तरह खुला रखना चाहता है।
बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और आर्थिक प्रतिबंध भी दोनों देशों के बीच प्रमुख विवाद के मुद्दे हैं। ईरान चाहता है कि उस पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाए जाएं और उसके फंसे हुए संसाधन वापस किए जाएं।
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लेबनान में जारी हमले, हालात गंभीर
इस बीच लेबनान में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। समाचार एजेंसी के मुताबिक, दक्षिण लेबनान के हनाविया शहर पर इजराइल के हवाई हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि एक अन्य घायल हो गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रिहायशी इलाकों को भी निशाना बनाया गया है।
इसके अलावा दक्षिण लेबनान के हनीन और अल-मजादेल जैसे इलाकों में भी इजराइली सेना ने हवाई हमले और विस्फोट कर कई घरों को नुकसान पहुंचाया है।
भारत में ईरानी दूतावास की अपील
भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने भी एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। दूतावास ने बताया कि आर्थिक सहायता के लिए पहले बनाए गए सभी बैंक खातों को बंद कर दिया गया है। लोगों से अपील की गई है कि वे इन खातों या किसी अन्य संदिग्ध खाते में पैसा ट्रांसफर न करें।
होर्मुज में जहाजों की आवाजाही घटी
इस तनाव का असर वैश्विक व्यापार पर भी दिख रहा है। मरीन ट्रैफिक के आंकड़ों के अनुसार, हाल के दिनों में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में कमी आई है। गुरुवार को केवल 6 जहाज इस मार्ग से गुजरे, जबकि इससे पहले के दिनों में यह संख्या अधिक थी।
दबाव में झुक सकता है ईरान: पूर्व अमेरिकी जनरल
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के पूर्व प्रमुख केनेथ मैकेंजी (Kenneth McKenzie) का मानना है कि बढ़ते दबाव के चलते ईरान अपने रुख में बदलाव कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि ईरान पर अस्तित्व का खतरा बढ़ता है, तो वह समझौते की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।
कुल मिलाकर, एक तरफ जहां अमेरिका-ईरान वार्ता से शांति की उम्मीद थी, वहीं लेबनान में जारी संघर्ष और ईरान के रुख ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।