Malda Violence Case : कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के कालियाचक में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने और हिंसा भड़काने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस पूरे मामले के कथित मास्टरमाइंड एडवोकेट मोफक्कारुल इस्लाम को बंगाल सीआईडी ने शुक्रवार सुबह गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, वह राज्य छोड़कर भागने की फिराक में था और बागडोगरा एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाला था, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
सोशल मीडिया पर 30 लाख फॉलोअर्स
मोफक्कारुल इस्लाम सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय है और उसके करीब 30 लाख फॉलोअर्स बताए जाते हैं। वह उत्तर दिनाजपुर का रहने वाला है और 2021 में AIMIM के टिकट पर इटाहार विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ चुका है।
पुलिस के मुताबिक, वह CAA, NRC और मतदाता सूची शुद्धिकरण (SIR) जैसे मुद्दों पर मुखर रहा है। एडीजी नॉर्थ बंगाल के. जयरामन ने बताया कि उस पर लोगों को भड़काने और पूरी साजिश को हवा देने के गंभीर आरोप हैं।
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मामले की जांच जारी
इस मामले में पुलिस प्रशासन ने यह भी स्वीकार किया है कि बंधक बनाए गए न्यायिक अधिकारियों को छुड़ाने में देरी हुई थी। हालांकि अधिकारियों ने किसी तरह की लापरवाही से इनकार किया है और कहा है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। सुरक्षा के मद्देनजर अब सभी न्यायिक अधिकारियों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की सुरक्षा प्रदान की गई है।
अब तक 35 की हो चुकी गिरफ्तारी
मालदा कांड में अब तक कुल 35 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में सामने आया है कि कई आरोपियों के तार ISF और AIMIM से जुड़े हैं। इनमें मोथाबारी से ISF उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली और उनके सहयोगी भी शामिल हैं, जिन्हें पहले ही 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा जा चुका है।
ये है पूरा मामला
घटना बुधवार (1 अप्रैल 2026) की है, जब कालियाचक में मतदाता सूची शुद्धिकरण (SIR) का काम चल रहा था। इस दौरान कुछ लोगों के नाम सूची से हटाए जाने पर भीड़ उग्र हो गई।
प्रदर्शनकारियों ने तीन महिला अधिकारियों सहित कुल सात न्यायिक अधिकारियों को करीब 9 घंटे तक एक ब्लॉक ऑफिस में बंधक बनाए रखा। इस दौरान अधिकारियों को न भोजन मिला और न ही पानी, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
NIA को सौंपी जांच
घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे न्यायिक व्यवस्था में बाधा डालने की गंभीर कोशिश बताया है। कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग ने मामले की जांच NIA को सौंप दी है।
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साथ ही, बिना अनुमति के भीड़ जुटाने और जुलूस निकालने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया गया है। राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
ईशा खान चौधरी का बयान
इस बीच, मालदा से कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने इस घटना को अलग नजरिए से देखा है। उन्होंने कहा कि इसे केवल हिंसा कहना सही नहीं होगा, बल्कि यह पूरी प्रक्रिया की विफलता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची शुद्धिकरण प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और तकनीकी खामियों के कारण लोगों के नाम गलत तरीके से बदल रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, ‘DATTA’ का ‘DUTTA’ हो जाना, जिससे दस्तावेजों में गड़बड़ी हो रही है।
TMC और BJP राजनीति कर रहे
सांसद के मुताबिक, मालदा में करीब 8.28 लाख लोग इस प्रक्रिया से प्रभावित हैं और उन्हें अपने नाम सूची में रहने को लेकर चिंता बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों को 10-12 किलोमीटर दूर बुलाया जा रहा है, जिससे अव्यवस्था बढ़ रही है।
ईशा खान चौधरी ने टीएमसी और बीजेपी पर भी आरोप लगाया कि दोनों दल इस मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं और जनता को डराने का काम कर रहे हैं। फिलहाल, मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।