Chandra Grahan Sutak 2026 : नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर में चंद्रग्रहण को लेकर धार्मिक आस्था और परंपराओं का व्यापक असर देखने को मिला। चंद्रग्रहण से करीब नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू होते ही क्षेत्र के प्रमुख मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए।
सूतक लगते ही थमी पूजा-अर्चना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल को अशुभ समय माना जाता है। इसी वजह से इस अवधि में मंदिरों में नियमित पूजा-पाठ और अनुष्ठान रोक दिए जाते हैं। सूतक काल शुरू होते ही एनसीआर के कई बड़े मंदिरों में श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद कर दिया गया।
मंदिर प्रबंधन समितियों ने बताया कि सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर विधिवत मंत्रोच्चार के साथ कपाट बंद किए गए। इससे पहले सुबह की आरती संपन्न कर ली गई थी। मंदिरों में मौजूद श्रद्धालुओं से अपील की गई कि वे सूतक काल के दौरान घरों में ही भजन-कीर्तन और पूजा करें।
ग्रहण के दौरान बरती गई विशेष सावधानियां
परंपरा के मुताबिक चंद्रग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक प्रभाव बढ़ने की मान्यता है। इसी कारण कई मंदिरों में देवी-देवताओं की मूर्तियों को ढक दिया गया और पूजा सामग्री सुरक्षित स्थान पर रख दी गई। सूतक काल में किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि मंदिर परिसर में नहीं की जाती।
शाम 7 बजे के बाद दोबारा खुलेंगे मंदिर
मंदिर समितियों के अनुसार चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद शाम 7 बजे के बाद कपाट दोबारा खोले जाएंगे। इसके बाद मंदिर परिसर की साफ-सफाई और शुद्धिकरण किया जाएगा। गंगाजल का छिड़काव, धूप-दीप प्रज्वलन और विशेष मंत्रोच्चार के साथ पुनः पूजा-अर्चना शुरू होगी। श्रद्धालु इसके बाद मंदिरों में दर्शन कर सकेंगे।
श्रद्धालुओं से संयम बरतने की अपील
प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने लोगों से अपील की है कि वे परंपराओं का सम्मान करें और भीड़ से बचते हुए तय समय के बाद ही मंदिर पहुंचें। चंद्रग्रहण को लेकर एनसीआर में आस्था और उत्सुकता का माहौल बना हुआ है।
भारत में कहां-कहां दिख सकता है पूर्ण चंद्र ग्रहण?
अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और पश्मिच बंगाल में पूर्ण चंद्र ग्रहण का दृश्य दिखाई दे सकता है।
भारत में कहां-कहां दिख सकता है खंडग्रास चंद्र ग्रहण?
आज शाम देश में कई जगहों पर खंडग्रास चंद्र ग्रहण दिखाई दे सकता है। दिल्ली-एनसीआर सहित बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, पुड्डुचेरी, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में लोग खंडग्रास चंद्र ग्रहण देख सकेंगे।
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क्या होली पर ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव है?
पंडित जी ने बताया कि यह चंद्र ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा पर लग रहा है। शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन होलिका दहन भी किया जाता है। यदि आप 3 मार्च को होलिका दहन करना चाहते हैं तो ग्रहण समाप्त होने के बाद कर सकते हैं।
आज शाम 6 बजकर 46 मिनट पर ग्रहण समाप्त हो जाएगा।तब न तो ग्रहण का प्रभाव रहेगा और न ही भद्रा का साया। इसके बाद 4 मार्च को आप निसंकोच रंग वाली होली खेल सकते हैं।