Veer Bharat Nyas vs Jitu Patwari: वीर भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी की ओर से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को 5 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा गया है। न्यास की ओर से आरोप लगाया गया है कि पटवारी ने 500 करोड़ रुपये के कथित घोटाले और एक रुपये में जमीन देने जैसे आरोप लगाकर श्रीराम तिवारी और वीर भारत न्यास की छवि खराब करने की कोशिश की। न्यास ने सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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500 करोड़ के आरोप पर भेजा गया नोटिस
वीर भारत न्यास की ओर से अधिवक्ता हरीश मेहता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता गुंजन चौकसे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने वीर भारत न्यास पर 500 करोड़ रुपये के घोटाले और सरकारी जमीन एक रुपये में देने का आरोप लगाया था। उनका कहना है कि ये आरोप तथ्यों से परे हैं और इससे न्यास तथा उसके सचिव श्रीराम तिवारी की छवि को नुकसान पहुंचा है।
7 दिन में माफी नहीं मांगी तो होगी कानूनी कार्रवाई
अधिवक्ता हरीश मेहता ने बताया कि जीतू पटवारी को भेजे गए नोटिस में सात दिन के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और अपने बयान वापस लेने को कहा गया है। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नोटिस में 5 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा भी किया गया है।
वीर भारत न्यास ने आरोपों को बताया गलत
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि वीर भारत न्यास कोई निजी संस्था नहीं बल्कि विधिवत पंजीकृत शासकीय न्यास है। इसके अध्यक्ष हमेशा प्रदेश के मुख्यमंत्री होते हैं, चाहे सरकार किसी भी दल की हो। न्यास की ओर से कहा गया कि जिस जमीन का जिक्र किया जा रहा है, वह संग्रहालय निर्माण के लिए राज्य सरकार के संस्कृति विभाग को दी गई है। इसकी घोषणा राज्यपाल ने विधानसभा में अपने अभिभाषण के दौरान की थी और पूरी जानकारी पहले से सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध है। एक रुपये में जमीन देने की बात को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया गया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के बयान का भी दिया हवाला
न्यास की ओर से यह भी कहा गया कि इन आरोपों का खंडन कांग्रेस के ही एक वरिष्ठ नेता कर चुके हैं। इसके बावजूद जीतू पटवारी ने सार्वजनिक मंच से आरोप लगाए, जिससे अनावश्यक विवाद पैदा हुआ।
पटवारी से पूछे गए पांच सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीर भारत न्यास की ओर से जीतू पटवारी के सामने पांच सवाल भी रखे गए
1. क्या 500 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाने से पहले उनके पास कोई आधिकारिक दस्तावेज था?
2. क्या उन्होंने राज्यपाल का अभिभाषण, कलेक्टर का आदेश, रजिस्टर्ड दस्तावेज या अन्य सरकारी रिकॉर्ड देखा था?
3. जिन पूर्व कांग्रेस मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में भी यह न्यास रहा, क्या वे उन पर भी यही आरोप लगाते हैं?
4. क्या दिग्विजय सिंह के खंडन के बाद भी कांग्रेस का यही आधिकारिक रुख है?
5. क्या कांग्रेस शूरवीरों, संतों और मनीषियों की स्मृति में बन रहे संग्रहालय का भी विरोध करती है?
दान करने की कही बात
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता गुंजन चौकसे ने कहा कि यदि मानहानि के मुकदमे में 5 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त होती है तो उसे उनके पक्षकार की ओर से सार्वजनिक रूप से किसी सामाजिक संस्था या एनजीओ को दान कर दिया जाएगा।