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UPSC Fake Claim : आकांक्षा- प्रियंका चौधरी के बाद UP की शिखा गौतम का दावा झूठा, बोलीं- सिर्फ नाम देखा रोल नंबर नहीं…

UPSC Fake Claim

UPSC Fake Claim : उत्तर प्रदेश। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 के परिणाम के बाद एक और विवाद सामने आया है। बिहार और बुलंदशहर के मामलों के बाद अब उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में भी रैंक को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई है। दरअसल, रैंक-79 को लेकर दो अलग-अलग प्रियंका चौधरी के नाम सामने आने से मामला चर्चा में आ गया है।

गाजीपुर में पिता ने किया था रैंक-79 का दावा

गाजीपुर के जखनिया क्षेत्र के गौरा खास गांव में रहने वाली प्रियंका चौधरी के पिता नीरा राम ने दावा किया था कि उनकी बेटी ने UPSC में 79वीं रैंक हासिल की है। नीरा राम पिछले करीब 25 वर्षों से सरकारी विभाग में ड्राइवर के रूप में काम कर चुके हैं और फिलहाल तहसील के रिकॉर्ड रूम में नजारत पद पर तैनात हैं।

रिजल्ट आने के बाद उन्होंने भावुक होकर कहा था कि अगर मौका मिला तो वह अपनी बेटी की गाड़ी चलाने में भी गर्व महसूस करेंगे। प्रियंका ने शुरुआती पढ़ाई जखनियां के श्री महावीर सूर्योदय विद्यालय से की और बाद में शहीद इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट किया। इसके बाद उच्च शिक्षा और सिविल सेवा की तैयारी के लिए वह बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) चली गईं।

चंबा के डीसी की पत्नी ने भी किया दावा

उधर हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में भी प्रियंका चौधरी के नाम से रैंक-79 की खबर सामने आई। यह प्रियंका मूल रूप से राजस्थान के बीकानेर की रहने वाली हैं और उनके पति मुकेश वर्ष 2015 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जो फिलहाल चंबा जिले में उपायुक्त (डीसी) के पद पर कार्यरत हैं।

मुकेश रेप्सवाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि UPSC में रैंक-79 उनकी पत्नी प्रियंका चौधरी की ही है। परिवार ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर की है।

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गाजीपुर की प्रियंका ने दी सफाई

मामला सामने आने के बाद गाजीपुर की प्रियंका चौधरी ने कहा कि उनकी ओर से ऐसा कोई दावा नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता भावुक होकर यह बात कह बैठे थे और उनकी कुछ प्रक्रियाएं अभी चल रही हैं। उन्होंने इसे अपना व्यक्तिगत मामला बताया।

गाजीपुर की प्रियंका फिलहाल प्रयागराज में जीएसटी विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत बताई जा रही हैं। उन्होंने BHU से बीएससी, एमएससी और बीएड की पढ़ाई की है और भौतिक विज्ञान में पीएचडी भी कर रही हैं।

एक रैंक केवल एक अभ्यर्थी को

UPSC की ओर से जारी मेरिट सूची के अनुसार किसी भी रैंक पर केवल एक ही अभ्यर्थी का चयन होता है। समान नाम और अधूरी जानकारी के कारण कई जगहों पर अलग-अलग उम्मीदवारों को एक ही रैंक से जोड़कर देखा जाने लगा, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई।

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पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

इससे पहले भी UPSC रिजल्ट को लेकर ऐसे विवाद सामने आ चुके हैं। हाल ही में आकांक्षा सिंह नाम की दो उम्मीदवारों ने 301वीं रैंक का दावा किया था। बाद में आयोग ने स्पष्ट किया कि यह रैंक उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की आकांक्षा सिंह की है।

इसी तरह उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भी शिखा गौतम नाम की युवती ने 113वीं रैंक का दावा किया था। जांच में पता चला कि उनका दावा सही नहीं था और वास्तविक चयन दिल्ली की शिखा का हुआ था।

बुलंदशहर की शिखा, जिसके बारे में पहले कहा गया था कि उसने UPSC में 113वीं रैंक हासिल की है, जबकि असल में रोहतक की शिखा ने रैंक हासिल की थी, कहती है, “जो चुनी गई है वह अलग है, शिखा। क्योंकि हम दोनों के नाम एक जैसे हैं, और मैंने PDF में सिर्फ़ नाम चेक किया था, रोल नंबर चेक नहीं किया था, यह मेरी गलती थी।”

प्रतिष्ठित परीक्षा में झूठे दावों से बढ़ता विवाद

UPSC सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में मानी जाती है। हर साल लाखों युवा इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। लेकिन कई बार गलत दावों या अधूरी जानकारी के कारण ऐसे विवाद सामने आ जाते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बन जाती है।

फिलहाल रैंक-79 को लेकर स्पष्ट किया जा चुका है कि यह रैंक चंबा के डीसी की पत्नी प्रियंका चौधरी की है, जबकि गाजीपुर वाली प्रियंका ने खुद इस दावे से दूरी बना ली है।

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