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Meenakshi Nomination Reject : कांग्रेस की सुप्रीम उम्मीद भी टूटी, मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज

Meenakshi Nomination Reject

Meenakshi Nomination Reject : नई दिल्ली। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव से जुड़े चर्चित मामले में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनके नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद आमतौर पर अदालत हस्तक्षेप नहीं करती और ऐसे विवादों का समाधान चुनाव समाप्त होने के बाद चुनाव याचिका के माध्यम से किया जाता है।

अनुच्छेद 329(B) का हवाला

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 329(B) का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान न्यायिक हस्तक्षेप पर स्पष्ट रोक है। अदालत ने कहा कि यदि नामांकन खारिज होने जैसे मामलों में हर बार तत्काल हस्तक्षेप किया जाए तो चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होगी और संवैधानिक व्यवस्था पर असर पड़ेगा। इसलिए ऐसे मामलों में चुनाव याचिका ही उचित कानूनी रास्ता है।

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कोर्ट ने नहीं माना तत्काल हस्तक्षेप का तर्क

मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि यदि नामांकन गलत या मनमाने ढंग से रद्द किया गया हो तो अदालत को हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी मुवक्किल केवल चुनाव लड़ने का अवसर चाहती हैं और अंतिम फैसला मतदाताओं पर छोड़ना चाहिए। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान हस्तक्षेप का दायरा बेहद सीमित है।

Article 32 के तहत सुनवाई से इनकार

अदालत ने कहा कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई योग्य नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव लड़ने का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि वैधानिक अधिकार है। इसलिए इस मामले में सीधे अनुच्छेद 32 के तहत राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि उम्मीदवार का चुनाव याचिका दायर करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा।

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भाजपा की आपत्ति के बाद रद्द हुआ था नामांकन

मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। भाजपा ने आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एक मामले की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी। इस आपत्ति पर विचार करने के बाद रिटर्निंग अधिकारी ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

मुकुल रोहतगी ने रखा संवैधानिक पक्ष

सुनवाई के दौरान दूसरे पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि चुनाव लड़ना मौलिक अधिकार नहीं है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालतें अनुच्छेद 32 और 226 के तहत हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। संविधान का ढांचा चुनावी विवादों के समाधान के लिए चुनाव याचिका की व्यवस्था प्रदान करता है।

सिंघवी ने कानूनी गलती का मुद्दा उठाया

अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि इस मामले में कोई आरोप तय नहीं हुए थे और न ही किसी अदालत ने मामले में संज्ञान लिया था। इसके बावजूद रिटर्निंग अधिकारी ने नामांकन निरस्त कर दिया। उन्होंने इसे स्पष्ट कानूनी त्रुटि बताते हुए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को पर्याप्त आधार नहीं माना।

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निर्विरोध जीते भाजपा उम्मीदवार

इस पूरे विवाद के बीच मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत दर्ज की। भाजपा के रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किए गए। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद चुनावी मुकाबले की संभावना समाप्त हो गई थी।

क्या होगा आगे?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब मीनाक्षी नटराजन के पास चुनाव याचिका दायर करने का विकल्प बचा है। अदालत ने साफ किया है कि इस फैसले से उनके कानूनी अधिकार समाप्त नहीं होते और वे चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का सहारा ले सकती हैं।

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मीनाक्षी मामले में पुरानी FIR से अब तक

2022: तेलंगाना में एक महिला ने कांग्रेस नेता कुंभम शिवा कुमार रेड्डी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
इसी मामले में मीनाक्षी नटराजन का नाम भी सामने आया।
2022-2025: महिला द्वारा विभिन्न स्तरों पर शिकायतें और याचिकाएं दायर की गईं।
जून 2026 : राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया शुरू
कांग्रेस ने मध्यप्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा।

8 जून 2026: मीनाक्षी नटराजन ने भोपाल में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया।

9 जून 2026 – सुबह: नामांकन पत्रों की जांच प्रक्रिया शुरू हुई।
भाजपा ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने आपत्ति दर्ज कराई।
भाजपा का आरोप था कि तेलंगाना कोर्ट से जुड़े मामले की जानकारी एफिडेविट में नहीं दी गई।

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9 जून 2026 – दोपहर: विधानसभा परिसर में
राजनीतिक हलचल तेज हो गई।
भाजपा और कांग्रेस के नेता रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष के बाहर जुटे।
कांग्रेस नेताओं और सुरक्षा कर्मियों के बीच धक्का-मुक्की और बहस की स्थिति बनी।

9 जून 2026 – शाम: भाजपा की ओर से एडवोकेट
संकेत गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के नियमों का हवाला देते हुए नामांकन निरस्त करने की मांग की।
कांग्रेस की ओर से उमंग सिंघार, दिग्विजय सिंह, जीतू पटवारी और अन्य नेताओं ने आपत्ति को राजनीतिक बताया।

9 जून 2026-शाम करीब 5:30 बजे: रिटर्निंग ऑफिसर ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त करने का फैसला सुनाया।
फैसले के तुरंत बादः कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू किया।

10 जून 2026: कांग्रेस ने चुनाव आयोग पहुंचकर फैसले को चुनौती दी।
11 जून: मामले में कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी में है।

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