Parliament Session 2026 : नई दिल्ली। मैंने 12 घंटे से ज्यादा चर्चा की। ताकि सभी सदस्यों के विचार और चिंताएं सामने आ सकें। विपक्ष ने निष्पक्षता के अभाव की बात कही। सांसदों ने लोकतंत्र की व्याख्या की। नियमों पर अपना दृष्टिकोण रखा। हर सांसद नियमों के तहत अपनी बात रखे। नियम से परे किसी को बोलने का अधिकार नही है। यह बात लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान कही है।
गैस सिलेंडर संकट को लेकर हंगामा
लोकसभा में गुरुवार को गैस सिलेंडर संकट के मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिला। सुबह 11 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही ठीक से नहीं चल सकी और अंततः इसे दोपहर 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा। इसके बाद सदन की कार्यवाही 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
सदन की अध्यक्षता कर रहे ओम बिरला ने विपक्षी सांसदों से शांति बनाए रखने और कार्यवाही चलने देने का आग्रह किया, लेकिन नारेबाजी जारी रहने के कारण उन्हें कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद लौटे स्पीकर
दरअसल, एक दिन पहले ही लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया था। इसके बाद गुरुवार को वह दोबारा सदन की अध्यक्षता करने के लिए कुर्सी पर लौटे।
संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन
इस बीच संसद परिसर में भी विपक्षी सांसदों ने एलपीजी सिलेंडर की कमी को लेकर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसद शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने “नरेंद्र भी गायब, सिलेंडर भी गायब” जैसे नारे लगाए।
राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री लोगों से कह रहे हैं कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन खुद वह परेशान नजर आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री कुछ अन्य मामलों को लेकर दबाव में हैं और इसी कारण सदन में उनकी कुर्सी खाली दिखी।
राज्यसभा में उठा फारूक अब्दुल्ला पर हमले का मुद्दा
उधर, संसद के उच्च सदन राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर हुए हमले का मुद्दा उठाया और सरकार से इस मामले में जानकारी देने की मांग की।
स्पीकर ओम बिरला का बयान
लोकसभा में चर्चा के दौरान स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि उनके कार्यकाल में सभी सांसदों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया है, जिसमें महिला सदस्य भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सदन में हर सदस्य को बोलने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह स्वतंत्रता नियमों के दायरे में रहकर ही होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चेयर के पास किसी सदस्य का माइक बंद करने का कोई बटन नहीं होता। साथ ही उन्होंने कहा कि यह आसन किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की भावना का प्रतीक है और इसकी गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।
स्पीकर ने कहा कि लोकसभा देश के 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए हर सांसद को नियमों के तहत अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सभी सदस्यों से सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील भी की।