MP Road Accidents : भोपाल। मध्य प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं लगातार गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। बीते वर्ष राज्य में 15,800 से अधिक लोगों की जान सड़क हादसों में गई। इन हादसों में सबसे ज्यादा प्रभावित दोपहिया वाहन चालक और सवार रहे, जिनकी हिस्सेदारी करीब 44 प्रतिशत है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हादसों को रोकने के लिए पुलिस ने 10 लाख से ज्यादा चालान काटे, लेकिन इसके बावजूद दुर्घटनाओं में कमी नहीं आई।
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सड़क हादसों का सबसे बड़ा कारण तेज रफ्तार
आंकड़ों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण तेज रफ्तार है। करीब 75 प्रतिशत हादसे ओवरस्पीडिंग के कारण हो रहे हैं। इसके अलावा यातायात नियमों की अनदेखी और लापरवाही भी बड़ी वजह बन रही है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर चालान किए जाने के बाद भी नियम तोड़ने वालों की संख्या कम नहीं हो रही है। इससे साफ है कि लोग अब भी सड़क सुरक्षा नियमों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
कौन-से साल कितनी मौतें
सड़क हादसों में मौतों के साथ-साथ घायलों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024 में 14,791 लोगों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में दर्ज की गई। पिछले वर्षों के आंकड़े भी इस बढ़ते खतरे की ओर इशारा करते हैं।
- वर्ष 2020 में 45,266 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 11,141 लोगों की मौत हुई।
- वर्ष 2021 में 48,877 दुर्घटनाएं और 12,057 मौतें दर्ज की गईं।
- वर्ष 2022 में 54,432 हादसे हुए और 13,427 लोगों की जान गई।
- वर्ष 2023 में 55,327 दुर्घटनाएं और 13,798 मौतें सामने आईं।
- वर्ष 2024 में 56,669 दुर्घटनाएं और 14,791 मौतें दर्ज की गईं।
इन आंकड़ों से साफ है कि हर साल दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है।
ब्लैक स्पॉट्स भी एक बड़ा कारण
सड़क दुर्घटनाओं के पीछे ब्लैक स्पॉट्स यानी दुर्घटना संभावित क्षेत्र भी एक बड़ी वजह हैं। इसके अलावा ट्रैफिक पुलिस की कमी भी स्थिति को और गंभीर बना रही है। प्रदेश में जरूरत के मुकाबले लगभग आधे पुलिसकर्मी ही तैनात हैं, जिससे प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही है।
राजधानी भोपाल समेत पूरे प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार द्वारा कदम उठाने के दावे किए जा रहे हैं। नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी के अनुसार, हादसों को रोकने और बेहतर यातायात प्रबंधन के लिए निगम और पुलिस मिलकर काम कर रहे हैं।
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हर साल 50 से 80 हजार चालान कट रहे
हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना भी मौतों का एक बड़ा कारण है। हर साल 50 से 80 हजार चालान केवल हेलमेट और सीट बेल्ट न पहनने पर काटे जाते हैं।
इसके बावजूद लोग नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। हाल ही में मंडला जिले में दो बाइकों की टक्कर में तीन युवकों की मौत ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्पष्ट है कि केवल चालान काटने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जरूरत है कि लोग खुद जागरूक बनें, यातायात नियमों का पालन करें, तेज रफ्तार से बचें और हेलमेट व सीट बेल्ट जैसे सुरक्षा उपायों को अपनाएं। तभी इन दर्दनाक हादसों पर लगाम लगाई जा सकती है।