Indore Holkar Tradition Holi : इंदौर। देशभर में होलिका दहन को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के इंदौर में होली की शुरुआत आज भी राजसी अंदाज में होती है। यहां करीब 300 साल पुरानी परंपरा के अनुसार होलकर राज परिवार द्वारा होलिका दहन किए जाने के बाद ही शहर में रंगों के इस महापर्व का आगाज माना जाता है।
कुल देवता की पूजा के बाद होता है दहन
होलकर शासनकाल से चली आ रही इस परंपरा में सबसे पहले राजपरिवार अपने कुल देवता मल्हार मार्तंड महाराज की पूजा-अर्चना करता है। इसके बाद ऐतिहासिक राजवाड़ा पैलेस परिसर के बाहर विधि-विधान से होलिका दहन किया जाता है।
हर साल की तरह इस बार भी शहरभर से लोग राजवाड़ा पहुंचे और पारंपरिक ढंग से आयोजित इस कार्यक्रम के साक्षी बने। मंत्रोच्चार और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच होलिका दहन का दृश्य बेहद भव्य नजर आया। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्थाओं के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
अहिल्याबाई खुद करती थीं पूजन
इतिहास के अनुसार, मालवा की महारानी अहिल्याबाई होल्कर स्वयं इस पूजा का नेतृत्व करती थीं। वे सबसे पहले कुल देवता की पूजा करतीं और फिर शुभ मुहूर्त में होलिका दहन संपन्न होता था। उनकी परंपरा को आज भी उनके वंशज पूरी श्रद्धा से निभा रहे हैं।
पूजन के बाद रानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा को रंग-गुलाल और इत्र अर्पित कर उन्हें इस उत्सव में सहभागी बनाया जाता है। इसके बाद ही अग्नि प्रज्वलित की जाती है, जिसे शहर में होली उत्सव की औपचारिक शुरुआत माना जाता है।
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जनप्रतिनिधि और विदेशी मेहमान भी हुए शामिल
इस खास आयोजन में सांसद शंकर लालवानी भी शामिल हुए। उन्होंने इसे इंदौर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बताया।
दिलचस्प बात यह रही कि सोशल मीडिया पर इंदौर की होली की परंपरा देखकर ऑस्ट्रेलिया से आया एक कपल भी विशेष रूप से इस आयोजन में शामिल होने पहुंचा। विदेशी मेहमानों ने राजवाड़ा में आयोजित होलिका दहन को अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।
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इंदौर में राजसी ठाठ-बाट और परंपराओं के संग मनाई जाने वाली होली न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए आस्था का विषय है, बल्कि यह शहर की पहचान और गौरव का भी प्रतीक बन चुकी है।