Gold Silver Prices Today : नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों में तेजी के बीच मंगलवार को वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में लगातार पांचवें सत्र में बढ़त दर्ज की गई। निवेशक अनिश्चित माहौल में सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
एमसीएक्स पर सोना 1.66 लाख के पार
भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना सोमवार को 2.53% चढ़कर 1,66,199 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं मई डिलीवरी वाली चांदी 0.90% गिरकर 2,80,090 रुपए प्रति किलोग्राम पर रही।
होली के कारण मंगलवार को एमसीएक्स में पहले सत्र का कारोबार बंद रहा और शाम 5 बजे से ट्रेडिंग दोबारा शुरू होने की घोषणा की गई।
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ग्लोबल मार्केट में भी तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.8% बढ़कर 5,360 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में करीब 1% की बढ़त देखी गई। स्पॉट सिल्वर भी लगभग 1.9% उछलकर 91.11 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
हालांकि, US Dollar Index 0.19% बढ़कर 98.57 पर पहुंच गया, जिससे डॉलर आधारित सोना विदेशी खरीदारों के लिए महंगा हो गया और कीमतों में तेजी पर कुछ हद तक लगाम लगी।
तेल की कीमतों में उछाल
ईरान-इजरायल संघर्ष और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी रही। अमेरिकी कच्चा तेल वायदा 1.4% बढ़कर 72.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं Brent Crude 1.87% चढ़कर 79.2 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा।
तेहरान की ओर से सऊदी अरब के तेल-गैस ढांचे को निशाना बनाने और रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को नुकसान पहुंचाने की चेतावनी के बाद आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ी है।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जरूरत पड़ने तक जारी रहेगी।
महंगाई और फेड की नीति पर नजर
तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई को लेकर चिंता गहरा गई है। निवेशक अब अमेरिकी विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पीएमआई, एडीपी नॉन-फार्म रोजगार आंकड़े और बेरोजगारी दर पर नजर रखे हुए हैं, ताकि फेडरल रिजर्व की आगे की ब्याज दर नीति का संकेत मिल सके।
2026 में अब तक 25% चढ़ा सोना
साल 2026 में अब तक सोने की कीमतों में करीब 25% की तेजी आ चुकी है। पिछले वर्ष भी इसमें 64% का उछाल दर्ज किया गया था। इसकी मुख्य वजह केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीदारी, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में निवेश बढ़ना और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीतियों को लेकर अनिश्चितता मानी जा रही है।
कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव ने सोने को एक बार फिर निवेशकों की पहली पसंद बना दिया है।