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Bhopal Respiratory Patients : भोपाल की हवा में जहर! एम्स और हमीदिया में मरीजों की भीड़

Bhopal Respiratory Patients

Bhopal Respiratory Patients : मध्य प्रदेश। भोपाल शहर की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है और इसका सीधा असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि हर तीसरा मरीज सांस लेने में तकलीफ की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहा है। यह समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि बच्चे और युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, बीते कुछ महीनों में सांस से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या में करीब 30 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है।

ओपीडी में मरीजों की बढ़ी संख्या

शहर के अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की बढ़ती संख्या ने डॉक्टरों की चिंता भी बढ़ा दी है। हवा में मौजूद पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे खतरनाक कण फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। यही कारण है कि बड़े सरकारी अस्पतालों में श्वसन संबंधी मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

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एम्स में श्वसन रोगियों की ओपीडी में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं हमीदिया अस्पताल में रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या में 25 से 30 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है।

जेपी अस्पताल में सांस और एलर्जी के मामलों में 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी जा रही है, जबकि बीएमएचआरसी की ओपीडी में भी करीब 25 प्रतिशत तक मरीज बढ़े हैं।

क्या बोले सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रखर अग्रवाल

सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रखर अग्रवाल ने इस स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि प्रदूषण के प्रभाव धीरे-धीरे सामने आते हैं, लेकिन लंबे समय में यह गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जी और फेफड़ों के संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

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उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि वे बाहर निकलते समय एन-95 मास्क का उपयोग करें, प्रदूषण के उच्च स्तर के समय बाहर जाने से बचें और घर के अंदर स्वच्छ हवा बनाए रखने का प्रयास करें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

धूल और धुएं के कारण हवा की गुणवत्ता खराब

शहर में बढ़ते प्रदूषण के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। लगातार बढ़ते निर्माण कार्य, वाहनों की संख्या में वृद्धि और घटती हरियाली को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है। धूल और धुएं के कारण हवा की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है और पीएम 2.5 का स्तर खतरनाक होता जा रहा है।

इस मामले में नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि भोपाल राजधानी होने के कारण यहां विकास कार्य लगातार चलते रहते हैं। उन्होंने बताया कि निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है और ग्रीन नेट लगाने के निर्देश दिए गए हैं। जिन क्षेत्रों में अधिक धूल उड़ती है, वहां पानी का छिड़काव भी कराया जाएगा ताकि एयर क्वालिटी इंडेक्स को सामान्य बनाए रखा जा सके।

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बड़े पैमाने पर निजी निर्माण कार्य जारी

वर्तमान में शहर में मेट्रो निर्माण, फ्लाईओवर, सड़क परियोजनाएं और बड़े पैमाने पर निजी निर्माण कार्य चल रहे हैं। इन गतिविधियों के चलते लगातार धूल उड़ रही है और भारी मशीनों के उपयोग से प्रदूषण बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में वाहनों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

निर्माण कार्यों के लिए पेड़ों की कटाई ने भी समस्या को बढ़ाया है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में हालात और अधिक खराब हो सकते हैं। साफ हवा के लिए प्रशासन और आम नागरिकों को मिलकर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

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