Menstrual Leave Plea : फिर महिलाओं को कोई नहीं देगा जॉब…सुप्रीम कोर्ट का ‘पीरियड लीव याचिका’ पर सुनवाई से इनकार

Menstrual Leave Plea : नई दिल्ली। देशभर में कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए मासिक धर्म अवकाश (Menstrual Leave) को अनिवार्य करने की मांग वाली जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि अगर इसे कानून के जरिए अनिवार्य बना दिया गया, तो इसके उल्टे प्रभाव भी पड़ सकते हैं। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि इस तरह के कानून से महिलाओं को नौकरी मिलने में मुश्किलें भी आ सकती हैं। कानून बनने पर बढ़ सकती हैं मुश्किलें सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि यदि मासिक धर्म अवकाश (Menstrual Leave) को कानून के तहत अनिवार्य कर दिया गया, तो नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से बच सकते हैं। इससे महिलाओं के करियर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। Temple Donations : श्री रेणुका यल्लम्मा मंदिर में रिकॉर्ड चढ़ावा, दान पेटियों से निकले 3.07 करोड़ रुपये उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति भी बन सकती है जहां महिलाओं को सरकारी नौकरियों, न्यायपालिका या निजी संस्थानों में अवसर कम मिलने लगें। यह भी संभव है कि महिलाओं को यह कह दिया जाए कि वे घर पर ही रहें। लिंग रूढ़िवादिता मजबूत होने की आशंका सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह का अनिवार्य प्रावधान लिंग रूढ़िवादिता (Gender Stereotypes) को और मजबूत कर सकता है। यानी महिलाओं के बारे में पहले से मौजूद सामाजिक धारणाएं और गहरी हो सकती हैं। अदालत का मानना है कि इस मुद्दे को संतुलित तरीके से देखने की जरूरत है, ताकि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा भी हो और उनके रोजगार के अवसरों पर भी असर न पड़े। CEC Impeachment Motion : ज्ञानेश कुमार पर कौन-से लगे आरोप? इतिहास में पहली बार CEC को हटाने के लिए नोटिस स्वैच्छिक छुट्टी देना स्वागत योग्य CJI ने कहा कि यदि कोई कंपनी या संस्थान स्वैच्छिक तौर पर पीरियड्स के दौरान छुट्टी देता है, तो यह एक सकारात्मक कदम है। लेकिन इसे कानून के जरिए अनिवार्य करना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर पहले ही केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सामने प्रतिनिधित्व दिया जा चुका है। सरकार नीति बनाने पर कर सकती है विचार सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संबंधित सक्षम प्राधिकरण इस विषय पर सभी पक्षों से चर्चा कर सकता है और जरूरत पड़ने पर मासिक धर्म अवकाश (Menstrual Leave) पर नीति बनाने की संभावना पर विचार कर सकता है। इस टिप्पणी के साथ अदालत ने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। Pakistan-Afghanistan War : पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव बढ़ा, एयरस्ट्राइक के बाद अफगान ड्रोन हमलों से हालात बिगड़े याचिकाकर्ता ने दिया था केरल का उदाहरण यह जनहित याचिका शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दाखिल की थी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एम. आर. शमशाद ने दलील दी थी कि देश के कुछ राज्यों और संस्थानों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि केरल में कुछ शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं को इस संबंध में राहत दी जा रही है। वहीं कई निजी कंपनियां भी अपने कर्मचारियों को स्वेच्छा से मासिक धर्म अवकाश (Menstrual Leave) दे रही हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर कानून बनाने का फैसला अदालत का नहीं बल्कि सरकार और नीति-निर्माताओं का विषय है।
Temple Donations : श्री रेणुका यल्लम्मा मंदिर में रिकॉर्ड चढ़ावा, दान पेटियों से निकले 3.07 करोड़ रुपये

Belagavi Shri Renuka Yellamma Temple Donations : बेलगावी। कर्नाटक के बेलगावी जिले में स्थित प्रसिद्ध श्री रेणुका यल्लम्मा मंदिर (Shri Renuka Yellamma Temple) में श्रद्धालुओं की आस्था एक बार फिर देखने को मिली है। मंदिर की दान पेटियों की गिनती के दौरान कुल 3.07 करोड़ रुपये का चढ़ावा सामने आया है। इसमें बड़ी मात्रा में नकद राशि के साथ-साथ सोने और चांदी के आभूषण भी शामिल हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार दान पेटियों में जमा राशि की गिनती 9 मार्च से 12 मार्च के बीच की गई। यह काम मंदिर के कर्मचारियों और छात्रों की मदद से पूरा किया गया। लगातार कई घंटों तक चलने वाली इस गिनती में शामिल लोग नोट गिनते-गिनते थक गए। दान में नकद के साथ सोना-चांदी भी मंदिर प्रशासन के मुताबिक कुल संग्रह में 2.78 करोड़ रुपये नकद मिले हैं। इसके अलावा श्रद्धालुओं ने आस्था के रूप में सोने और चांदी के आभूषण भी चढ़ाए हैं। दान में करीब 100 ग्राम सोने के आभूषण, जिनकी कीमत लगभग 16.16 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा लगभग 4 किलो 547 ग्राम चांदी के आभूषण दानपेटी में मिले हैं, जिनकी कीमत लगभग 12.35 लाख रुपये है। इस तरह कुल मिलाकर मंदिर को 3.07 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ। CEC Impeachment Motion : ज्ञानेश कुमार पर कौन-से लगे आरोप? इतिहास में पहली बार CEC को हटाने के लिए नोटिस चार दिन तक चली गिनती दान की राशि इतनी अधिक थी कि इसे गिनने में चार दिन का समय लग गया। गिनती के दौरान नोटों को अलग-अलग ढेर में रखा गया और सिक्कों व आभूषणों की गिनती अलग से की गई। गिनती के कई वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें दर्जनों लोग लंबी मेजों पर बैठकर नोटों की गिनती करते दिखाई दे रहे हैं। एक वीडियो में कर्मचारी तसलों में नोट भरकर उन्हें अलग-अलग जगह पर रख रहे हैं। बेलगावी के सवदत्ती तालुक में स्थित है मंदिर श्री रेणुका यल्लम्मा मंदिर (Shri Renuka Yellamma Temple) कर्नाटक के बेलगावी जिले के सवदत्ती तालुक के बाहरी इलाके में स्थित है। यह मंदिर दक्षिण भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यहां हर दिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान भी करते हैं। Pakistan-Afghanistan War : पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव बढ़ा, एयरस्ट्राइक के बाद अफगान ड्रोन हमलों से हालात बिगड़े मंदिर प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था की वजह से हर साल दान की राशि में बढ़ोतरी देखने को मिलती है। इस बार भी मंदिर में रिकॉर्ड चढ़ावा आने से प्रशासन और भक्तों में उत्साह का माहौल है।
Energizer P30K Apex : महीने में सिर्फ एक बार होगा चार्ज! 30000mAh बैटरी वाला नया 5G फोन लॉन्च, जानिए कीमत और फीचर्स

Energizer P30K Apex : रग्ड स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनी Energizer ने अपना नया और बेहद दमदार फोन Energizer P30K Apex लॉन्च कर दिया है। इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 30,000mAh की विशाल बैटरी है, जो इसे बाजार के सबसे ज्यादा बैटरी क्षमता वाले स्मार्टफोनों में शामिल करती है। कंपनी ने इस फोन को खास तौर पर मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए डिजाइन किया है। यह फोन गिरने पर आसानी से टूटता नहीं है और इसे IP69K रेटिंग दी गई है, जिससे यह पानी और धूल से सुरक्षित रहता है। बड़ी स्क्रीन और दमदार प्रोसेसर Energizer P30K Apex में 6.95 इंच का बड़ा IPS डिस्प्ले दिया गया है, जो FHD+ रेजोल्यूशन को सपोर्ट करता है। कंपनी के मुताबिक इस फोन की स्क्रीन को हाई प्रेशर कंडीशन में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। फोन को मिलिट्री ग्रेड प्रोटेक्शन दिया गया है, जिससे यह कठिन परिस्थितियों में भी सुरक्षित रहता है। Pakistan-Afghanistan War : पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव बढ़ा, एयरस्ट्राइक के बाद अफगान ड्रोन हमलों से हालात बिगड़े इसमें MediaTek Dimensity 7300 5G प्रोसेसर दिया गया है, जो इसे तेज परफॉर्मेंस देने में मदद करता है। इसके साथ 12GB रैम और 512GB स्टोरेज मिलता है। कंपनी ने फिलहाल इस फोन को एक ही स्टोरेज वेरिएंट में पेश किया है। 200MP कैमरा के साथ ट्रिपल कैमरा सेटअप फोटोग्राफी के लिए फोन में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। इसमें 200MP का मेन कैमरा, 50MP का सेकेंडरी कैमरा और 5MP का तीसरा कैमरा मिलता है। इसके अलावा सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 50MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है, जो हाई क्वालिटी फोटो और वीडियो कैप्चर करने में सक्षम है। 30,000mAh की विशाल बैटरी इस फोन की सबसे खास बात इसकी 30,000mAh बैटरी है। कंपनी का दावा है कि यह फोन एक बार चार्ज करने पर लगभग एक महीने तक सामान्य उपयोग में चल सकता है। Share Market Today : गिरावट के साथ खुला भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स 590 अंक फिसला वहीं अगर फोन का ज्यादा इस्तेमाल किया जाए तो भी यह करीब एक सप्ताह तक आराम से चल सकता है।फोन में 66W USB Type-C फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट भी दिया गया है, जिससे बड़ी बैटरी को अपेक्षाकृत तेजी से चार्ज किया जा सकता है। लेटेस्ट सॉफ्टवेयर Energizer P30K Apex एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म पर काम करता है। इसमें Android 16 आधारित कस्टम यूजर इंटरफेस दिया गया है, जिससे यूजर्स को नया और बेहतर अनुभव मिलता है। Energizer P30K Apex के मुख्य फीचर्स डिस्प्ले: 6.95 इंच IPS, FHD+ प्रोसेसर: MediaTek Dimensity 7300 5G रैम और स्टोरेज: 12GB RAM, 512GB स्टोरेज कैमरा: 200MP + 50MP + 5MP (रियर), 50MP फ्रंट बैटरी: 30,000mAh, 66W फास्ट चार्जिंग ऑपरेटिंग सिस्टम: Android 16 Russian Oil Purchase : रूसी तेल पर अमेरिका ने क्यों लिया यू-टर्न, नोटिस जारी कर सभी देशों को दी इजाजत कीमत कितनी है? इस दमदार रग्ड स्मार्टफोन की कीमत 399 यूरो (लगभग 40,000 रुपये) रखी गई है। कंपनी ने इसे मजबूत होने के बावजूद अपेक्षाकृत स्लिम डिजाइन में तैयार करने की कोशिश की है, ताकि इसे रोजमर्रा के इस्तेमाल में आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।
CEC Impeachment Motion : ज्ञानेश कुमार पर कौन-से लगे आरोप? इतिहास में पहली बार CEC को हटाने के लिए नोटिस

CEC Impeachment Motion : नई दिल्ली। देश की राजनीतिक हलचल के बीच पहली बार मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने के लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा रही है। विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव के लिए पूरी रणनीति तैयार कर ली है और जानकारी के मुताबिक नोटिस पर करीब 193 सांसदों के हस्ताक्षर हो चुके हैं। सूत्रों के अनुसार यह नोटिस संसद के किसी एक सदन में शुक्रवार को पेश किया जा सकता है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्ताव लोकसभा में लाया जाएगा या राज्यसभा में। ममता बनर्जी ला रही हैं प्रस्ताव पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस इस प्रस्ताव को लेकर आगे आई हैं। इस पहल को कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों का समर्थन मिला है। विपक्ष का आरोप है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) ने अपने पद पर रहते हुए निष्पक्षता नहीं बरती और चुनावी प्रक्रियाओं में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। Pakistan-Afghanistan War : पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव बढ़ा, एयरस्ट्राइक के बाद अफगान ड्रोन हमलों से हालात बिगड़े 200 से ज्यादा सांसदों ने किए हस्ताक्षर सूत्रों के मुताबिक महाभियोग नोटिस पर 200 से अधिक सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। इनमें लगभग 130 लोकसभा सांसद और 63 से अधिक राज्यसभा सांसद शामिल बताए जा रहे हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जरूरी संख्या पूरी होने के बाद भी कई सांसदों ने उत्साह के साथ इस नोटिस पर हस्ताक्षर किए। महाभियोग प्रस्ताव के लिए क्या है नियम मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने के लिए संसद में महाभियोग लाने की एक तय प्रक्रिया है। लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। इसके बाद प्रस्ताव सदन में पेश किया जाता है और इसे पारित होने के लिए विशेष बहुमत की जरूरत होती है। यानी सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन आवश्यक होता है। Share Market Today : गिरावट के साथ खुला भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स 590 अंक फिसला CEC पर क्या-क्या आरोप लगाए? विपक्ष की ओर से नोटिस में CEC ज्ञानेश कुमार पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इनमें प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं – पद पर रहते हुए पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण चुनावी धोखाधड़ी की जांच में बाधा डालने का आरोप बड़ी संख्या में मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना SIR प्रक्रिया के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी को फायदा पहुंचाने की कोशिश तृणमूल कांग्रेस नेताओं के साथ दुर्व्यवहार का आरोप SIR प्रक्रिया को लेकर विवाद विपक्ष खास तौर पर मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे कुछ राजनीतिक दलों को फायदा मिल सकता है। Russian Oil Purchase : रूसी तेल पर अमेरिका ने क्यों लिया यू-टर्न, नोटिस जारी कर सभी देशों को दी इजाजत सीएम ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति जताई है और कहा है कि इससे लाखों मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। महाभियोग की पूरी प्रक्रिया संविधान के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया वही है जो सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए अपनाई जाती है। यदि संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है, तो एक जांच समिति बनाई जाती है। Jaishankar Iran Talks : होर्मुज से इंडियन जहाज जाने पर विदेश मंत्रालय बोला- कुछ कहना जल्दबाजी, पुरी बोले- LPG की कमी नहीं इस समिति में आमतौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश या सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित विधि विशेषज्ञ शामिल होते हैं। समिति आरोपों की जांच करती है और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को भी अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है। 14 दिन बाद होगी चर्चा महाभियोग नोटिस पेश होने के बाद 14 दिनों के भीतर इस पर सदन में चर्चा की जाती है। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर है कि संसद के मौजूदा बजट सत्र, जो 2 अप्रैल तक चलेगा, उसी दौरान यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से पेश होता है या नहीं। यदि ऐसा होता है तो यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटनाक्रम माना जाएगा।
Pakistan-Afghanistan War : पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव बढ़ा, एयरस्ट्राइक के बाद अफगान ड्रोन हमलों से हालात बिगड़े

Pakistan-Afghanistan War : इस्लामाबाद। पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव (Pakistan and Afghanistan Tensions) अब तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है और हालात पूर्ण सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में किए गए हवाई हमलों के बाद अफगान तालिबान और अफगान डिफेंस फोर्सेज ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक अफगान सेना ने पाकिस्तान के कई शहरों को निशाना बनाकर ड्रोन हमले (drone attacks) किए हैं। इन हमलों के बाद सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है और दोनों देशों की सेनाओं की गतिविधियां तेज हो गई हैं। पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद बढ़ा तनाव रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान ने गुरुवार देर रात और शुक्रवार तड़के अफगानिस्तान के कई प्रांतों में एयरस्ट्राइक की थी। इन हमलों में कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। MP LPG Shortage : MP में ऑनलाइन सिलेंडर बुकिंग ठप, LPG किल्लत के बीच सरकार ने बदले नियम पाकिस्तान का कहना है कि यह कार्रवाई सीमा पार मौजूद आतंकी ठिकानों के खिलाफ की गई थी। हालांकि अफगानिस्तान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अफगान तालिबान का जवाबी हमला अफगान तालिबान के सीमा सुरक्षा बल के प्रवक्ता अबिदुल्लाह उकाब ने कहा कि पाकिस्तान की कार्रवाई के बाद उन्होंने जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं। उकाब के मुताबिक अफगान बलों ने पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में ड्रोन हमले किए हैं और कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। उन्होंने दावा किया कि हमलों में कोहाट का सेंट्रल कमांड, कोहाट ब्रिगेड और सैन्य कैंप शामिल थे। पाकिस्तान के कई शहरों में धमाकों की खबर इन हमलों के बाद पाकिस्तान के कई शहरों से धमाकों की खबरें सामने आई हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने कई क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है और संवेदनशील सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन हमलों के नुकसान को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। Russian Oil Purchase : रूसी तेल पर अमेरिका ने क्यों लिया यू-टर्न, नोटिस जारी कर सभी देशों को दी इजाजत ऑपरेशन जारी रहने का दावा अफगान तालिबान डिफेंस फोर्सेज ने स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्रवाई फिलहाल रुकेगी नहीं। तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा, “हमारी जमीन पर होने वाले हर हमले का जवाब अब उनकी अपनी जमीन पर दिया जाएगा।” इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर भारी गोलाबारी और सैन्य हलचल बढ़ गई है। क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बढ़ा खतरा विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। यदि जल्द ही युद्धविराम या कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह सीमित झड़प बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकती है। Share Market Today : गिरावट के साथ खुला भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स 590 अंक फिसला फिलहाल दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस स्थिति पर टिकी हुई हैं।
MP LPG Shortage : MP में ऑनलाइन सिलेंडर बुकिंग ठप, LPG किल्लत के बीच सरकार ने बदले नियम

MP LPG Shortage : भोपाल। मिडिल ईस्ट में चल रही अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। देश के कई हिस्सों में LPG सिलेंडर की किल्लत देखने को मिल रही है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें लग रही हैं और कई जगहों पर सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने LPG सिलेंडर बुकिंग के नियमों में फिर बदलाव किया है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब एक सिलेंडर लेने के बाद दूसरा सिलेंडर 45 दिन बाद ही बुक किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज करने और लोगों द्वारा की जा रही पैनिक बुकिंग को रोकने के लिए उठाया गया है। Share Market Today : गिरावट के साथ खुला भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स 590 अंक फिसला 6 दिन में तीन बार बदले नियम गैस की बढ़ती मांग के कारण पिछले कुछ दिनों में बुकिंग से जुड़े नियम लगातार बदले गए हैं। 6 मार्च: घरेलू LPG बुकिंग के लिए पहली बार 21 दिन का लॉक-इन पीरियड लागू किया गया। 9 मार्च: शहरों में अचानक मांग बढ़ने के कारण लॉक-इन पीरियड 25 दिन कर दिया गया। 12 मार्च: ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर बुक करने का अंतराल 45 दिन कर दिया गया। सरकार का मानना है कि इससे गैस की सप्लाई को बेहतर तरीके से संतुलित किया जा सकेगा। 55 दिन की बजाय 15 दिन में बुक हो रहे सिलेंडर आम तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में एक परिवार सालभर में लगभग 5 LPG सिलेंडर ही इस्तेमाल करता है। पहले लोग औसतन 55 दिन में एक बार सिलेंडर बुक करते थे। लेकिन हाल के दिनों में अफवाहों के कारण लोग जरूरत न होने के बावजूद 15-15 दिन में सिलेंडर बुक करने लगे। इससे सप्लाई सिस्टम पर दबाव बढ़ गया और कई जगहों पर गैस की कमी महसूस होने लगी। Russian Oil Purchase : रूसी तेल पर अमेरिका ने क्यों लिया यू-टर्न, नोटिस जारी कर सभी देशों को दी इजाजत मध्य प्रदेश में ऑनलाइन बुकिंग ठप मध्य प्रदेश में LPG सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग लगभग ठप हो गई है। सर्वर डाउन होने के कारण भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर समेत कई शहरों में लोग बुकिंग नहीं कर पा रहे हैं। वेटिंग पीरियड 7 से 8 दिन तक पहुंच गया है। गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से शाम तक लोगों की भीड़ लगी हुई है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि एजेंसी कर्मचारियों के फोन भी बंद आ रहे हैं, जिससे परेशानी और बढ़ गई है। होटल-रेस्टॉरेंट में भी गैस संकट गैस की कमी का असर होटल और रेस्टॉरेंट कारोबार पर भी पड़ रहा है। भोपाल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली के अनुसार शहर के करीब 2 हजार होटल-रेस्टॉरेंट को पिछले चार दिनों से एक भी कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिला। Hezbollah Strike on Israel : हिजबुल्लाह ने दागीं 150 मिसाइलें, भारत ने की शांति की अपील प्रदेश के करीब 50 हजार होटल-रेस्टॉरेंट गैस खत्म होने की कगार पर हैं। कई जगहों पर वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर डीजल भट्टी या अन्य ईंधन का इस्तेमाल किया जा रहा है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि होटल, रेस्टॉरेंट और कॉलेज कैंटीन को भी इमरजेंसी सेवाओं में शामिल किया जाए। इंडक्शन की मांग अचानक बढ़ी गैस की किल्लत के बीच बाजार में इंडक्शन चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ गई है। भोपाल में इसकी बिक्री लगभग 7 गुना तक बढ़ गई है और कीमतें भी दोगुनी हो गई हैं। वहीं कुछ जगहों पर घरेलू सिलेंडर का गलत इस्तेमाल भी सामने आया है। बालाघाट में खाद्य विभाग की टीम ने चौपाटी संचालकों से 13 घरेलू सिलेंडर जब्त किए। सरकार का दावा- देश में पर्याप्त स्टॉक सरकार का कहना है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार घरेलू LPG उत्पादन 28% तक बढ़ाया गया है और रोजाना लगभग 50 लाख सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं। Monalisa Marriage : वायरल गर्ल मोनालिसा ने फरमान खान से की शादी, डायरेक्टर को सिर तन से जुदा की धमकी सरकार ने रेस्टॉरेंट और होटलों को एक महीने के लिए बायोमास, केरोसिन या कोयले के इस्तेमाल की अनुमति भी दी है ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए LPG उपलब्ध कराई जा सके। सप्लाई संकट की दो बड़ी वजह पहली वजह – स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट भारत अपनी जरूरत की लगभग 60% LPG आयात करता है, जिसमें से करीब 90% सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आती है। यह 167 किमी लंबा जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। युद्ध के कारण इस रास्ते से गुजरना जोखिम भरा हो गया है। दूसरी वजह – LNG प्लांट का उत्पादन रुकना ईरान के ड्रोन हमलों के बाद कतर ने अपने LNG प्लांट का उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया है। भारत अपनी जरूरत की करीब 40% LNG कतर से आयात करता है, इसलिए इसका असर सीधे गैस सप्लाई पर पड़ा है। सरकार का कहना है कि हालात चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन सप्लाई सामान्य बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
Share Market Today : गिरावट के साथ खुला भारतीय शेयर बाजार, सेंसेक्स 590 अंक फिसला

Share Market Today : मुंबई। कमजोर वैश्विक संकेतों और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 590.20 अंक यानी 0.78 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 75,444.22 पर खुला, जबकि निफ्टी 176.65 अंक यानी 0.75 प्रतिशत गिरकर 23,462.50 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजारों में कमजोरी और भू-राजनीतिक तनाव का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ा है, जिससे बाजार में बिकवाली देखने को मिल रही है। IT और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव शुरुआती कारोबार में गिरावट का नेतृत्व आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों ने किया। सूचकांकों में निफ्टी आईटी और निफ्टी मेटल सबसे ज्यादा नुकसान में रहे। इसके अलावा ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, पीएसयू बैंक, रियल्टी, सर्विसेज, डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सूचकांक भी लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। हालांकि बाजार में गिरावट के बीच एनर्जी सेक्टर में कुछ मजबूती देखने को मिली और यह सूचकांक हरे निशान में बना रहा। Russian Oil Purchase : रूसी तेल पर अमेरिका ने क्यों लिया यू-टर्न, नोटिस जारी कर सभी देशों को दी इजाजत मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट का माहौल रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 181 अंक यानी 1.11 प्रतिशत गिरकर 16,123 पर पहुंच गया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 519 अंक यानी 0.92 प्रतिशत की गिरावट के साथ 55,734 पर कारोबार करता दिखा। इससे साफ है कि बाजार में गिरावट का असर लगभग सभी वर्ग के शेयरों पर पड़ा। सेंसेक्स पैक में कौन से शेयर चढ़े और कौन गिरे सेंसेक्स में कुछ शेयरों में मजबूती भी देखने को मिली। पावर ग्रिड, आईटीसी, एचयूएल, एनटीपीसी और सन फार्मा शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। वहीं दूसरी ओर टाटा स्टील, एलएंडटी, इंडिगो, अल्ट्राटेक सीमेंट, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, मारुति सुजुकी, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एमएंडएम, एचसीएल टेक, इन्फोसिस और टाइटन जैसे बड़े शेयरों में गिरावट देखने को मिली। Jaishankar Iran Talks : होर्मुज से इंडियन जहाज जाने पर विदेश मंत्रालय बोला- कुछ कहना जल्दबाजी, पुरी बोले- LPG की कमी नहीं एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट भारतीय बाजार पर दबाव की एक बड़ी वजह वैश्विक बाजारों की कमजोरी भी है। ज्यादातर एशियाई बाजार जैसे टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, सोल और जकार्ता गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। वहीं गुरुवार को अमेरिकी बाजार भी बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए थे। डाओ जोन्स इंडेक्स 1.56 प्रतिशत गिरा नैस्डैक इंडेक्स 1.78 प्रतिशत टूटकर बंद हुआ भू-राजनीतिक तनाव का असर विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ रहा है। अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है तो वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने या मंदी का खतरा भी बढ़ सकता है। Intermittent Fasting : वजन घटाने के चक्कर में न करें इंटरमिटेंट फास्टिंग, हो सकता है ये खतरनाक असर FII की बिकवाली जारी निवेशकों के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय बाजारों में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। गुरुवार को एफआईआई ने 7,049.87 करोड़ रुपए की इक्विटी बेच दी। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने बाजार को कुछ सहारा दिया और उन्होंने 7,449.77 करोड़ रुपए का निवेश किया। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां ही बाजार की दिशा तय करेंगी।
Russian Oil Purchase : रूसी तेल पर अमेरिका ने क्यों लिया यू-टर्न, नोटिस जारी कर सभी देशों को दी इजाजत

Russian Oil Purchase : नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में चल रही अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग (US, Israel, and Iran conflict) का असर अब पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें (crude oil) तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इस स्थिति को संभालने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए दूसरे देशों को सीमित समय के लिए रूस से कच्चा तेल खरीदने (purchase crude oil from Russia) की अस्थायी मंजूरी दे दी है। दरअसल, रूस के कई ऑयल टैंकर (Russian oil tankers) समुद्र में फंसे हुए हैं और उनके पास मौजूद तेल की सप्लाई अटकी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए अमेरिका ने यह कदम उठाया है ताकि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ाई जा सके और कीमतों को नियंत्रित किया जा सके। Jaishankar Iran Talks : होर्मुज से इंडियन जहाज जाने पर विदेश मंत्रालय बोला- कुछ कहना जल्दबाजी, पुरी बोले- LPG की कमी नहीं सिर्फ समुद्र में फंसे टैंकरों से तेल खरीदने की अनुमति अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने गुरुवार को एक विशेष लाइसेंस जारी किया है। इसके तहत उन रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री और डिलीवरी की अनुमति दी गई है जो 12 मार्च की रात 12:01 बजे से पहले जहाजों पर लोड हो चुके थे। हालांकि यह राहत स्थायी नहीं है। यह छूट केवल 11 अप्रैल तक के लिए दी गई है। अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के अनुसार इस फैसले का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई बढ़ाना है ताकि लगातार बढ़ती कीमतों पर काबू पाया जा सके। अमेरिका का दावा- रूस को बड़ा फायदा नहीं होगा स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला सिर्फ अल्पकालिक है और इससे रूस को कोई बड़ा आर्थिक फायदा नहीं मिलेगा। बेसेंट के मुताबिक रूस की कमाई का बड़ा हिस्सा तेल निकालने के दौरान लगने वाले टैक्स से आता है, जबकि यह छूट केवल उस तेल के लिए दी गई है जो पहले से ही समुद्र में ट्रांजिट में है। भारत का रुख- तेल खरीदने के लिए अनुमति की जरूरत नहीं इससे पहले अमेरिका ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने पर प्रतिबंधों में ढील देने की बात कही थी। लेकिन भारतीय अधिकारियों ने साफ कर दिया था कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए किसी भी देश की अनुमति पर निर्भर नहीं है और अपने हितों के अनुसार तेल खरीद सकता है। अमेरिका ने क्यों बदला अपना रुख? विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे तीन बड़ी वजहें हैं। पहली वजह- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संकट ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव की वजह से दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में सप्लाई बाधित हो गई है। यह करीब 167 किलोमीटर लंबा जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। Hezbollah Strike on Israel : हिजबुल्लाह ने दागीं 150 मिसाइलें, भारत ने की शांति की अपील दूसरी वजह – कीमतों में तेज उछाल पिछले कुछ दिनों में ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध लंबा चला तो कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। ऐसे में रूसी तेल बाजार में आने से सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा। तीसरी वजह – ऊर्जा बाजार में अस्थिरता मिडिल ईस्ट में हालिया हमलों के बाद ऊर्जा सप्लाई और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खतरा बढ़ गया है। इसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में 9% से ज्यादा उछाल आया और कीमत फिर से 101.50 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। 2022 में रूस पर लगाए गए थे कड़े प्रतिबंध फरवरी 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था, तब अमेरिका और यूरोप समेत कई पश्चिमी देशों ने रूसी तेल और गैस पर प्रतिबंध लगा दिए थे। उनका मानना था कि तेल और गैस से होने वाली कमाई रूस की युद्ध मशीन को वित्तीय ताकत देती है। अब मौजूदा वैश्विक संकट के बीच अमेरिका ने सीमित समय के लिए इस नीति में नरमी दिखाई है। IPL Tickets Price 2026 : 28 मार्च को IPL 2026 का पहला मैच, जानिए कब और कैसे मिलेंगे टिकट भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत अपनी जरूरत का करीब 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे बड़े तेल निर्यातक देश भी अपने निर्यात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर हैं। इसी वजह से मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल सप्लाई में बाधा का असर सीधे भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
Jaishankar Iran Talks : होर्मुज से इंडियन जहाज जाने पर विदेश मंत्रालय बोला- कुछ कहना जल्दबाजी, पुरी बोले- LPG की कमी नहीं

Jaishankar Iran Talks : नई दिल्ली। ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के 13वें दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच पिछले कुछ दिनों में तीन बार बातचीत हो चुकी है। यह जानकारी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (Randhir Jaiswal) ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। भारत-ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच लगातार संपर्क रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर (S Jaishankar) अपने ईरानी समकक्ष के साथ लगातार संपर्क में हैं। हाल की बातचीत में समुद्री शिपिंग की सुरक्षा और भारत की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान ने भारत जाने वाले जहाजों को अनुमति दे दी है, तो उन्होंने कहा कि इस विषय पर फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। Hezbollah Strike on Israel : हिजबुल्लाह ने दागीं 150 मिसाइलें, भारत ने की शांति की अपील UN में 135 देशों ने ईरान के हमलों की निंदा की संयुक्त राष्ट्र में भी इस मुद्दे पर अहम कदम उठाया गया है। यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के प्रस्ताव का भारत सहित 135 देशों ने समर्थन किया है। इस प्रस्ताव में खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते हमलों और तनाव पर चिंता जताई गई है। प्रस्ताव में कहा गया कि ईरान के हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और इससे वैश्विक शांति को खतरा पैदा हो सकता है। सुरक्षा परिषद के 15 सदस्यों में से 13 देशों ने इसके पक्ष में वोट दिया, जबकि Russia और China ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। संसद में LPG संकट पर हंगामा इधर भारत में युद्ध के असर को लेकर संसद में भी बहस तेज हो गई। लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने एलपीजी संकट का मुद्दा उठाया और कहा कि ऊर्जा सुरक्षा किसी भी देश की बुनियाद होती है। Monalisa Marriage : वायरल गर्ल मोनालिसा ने फरमान खान से की शादी, डायरेक्टर को सिर तन से जुदा की धमकी उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि ऊर्जा सुरक्षा को लेकर समझौता किया गया है, जिससे भविष्य में बड़ी समस्या पैदा हो सकती है। राहुल गांधी के बयान के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया और स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) को बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा। सरकार बोली- ईंधन की कोई कमी नहीं पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने लोकसभा में जवाब देते हुए कहा कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत की रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कई मामलों में 100% से अधिक क्षमता पर चल रही हैं। सरकार ने एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उत्पादन में 28% की बढ़ोतरी भी की है। Parliament Session 2026 : अविश्वास प्रस्ताव खारिज, स्पीकर ओम बिरला बोले- नियम से परे किसी को बोलने का अधिकार नही तेल आपूर्ति के नए विकल्प तलाशे पुरी ने कहा कि युद्ध से पहले भारत का लगभग 45% कच्चा तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के रास्ते से आता था। अब भारत ने इस क्षेत्र के बाहर से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाकर लगभग 70% कर दी है। उन्होंने बताया कि भारत अब 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है, जिससे आपूर्ति के कई विकल्प उपलब्ध हैं। सरकार का कहना है कि देशभर के पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, एटीएफ और फ्यूल ऑयल की सप्लाई सामान्य रूप से जारी है। हालांकि मध्य-पूर्व में जारी युद्ध की वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर नजरें बनी हुई हैं।
Intermittent Fasting : वजन घटाने के चक्कर में न करें इंटरमिटेंट फास्टिंग, हो सकता है ये खतरनाक असर

Intermittent Fasting Effects : नई दिल्ली। आजकल तेजी से वजन कम करने और फिट दिखने के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) का ट्रेंड काफी तेजी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया और फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स इसे वजन घटाने का आसान और असरदार तरीका बताते हैं। इस डाइट पद्धति में लोग आमतौर पर 14 से 16 घंटे तक भूखे रहते हैं और दिन के केवल 6 से 8 घंटे के अंदर ही भोजन करते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसे सही तरीके से और सही लोगों द्वारा नहीं अपनाया जाए तो यह शरीर पर नकारात्मक प्रभाव भी डाल सकता है। खासकर महिलाओं के लिए यह कई बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। महिलाओं के हॉर्मोन्स पर असर स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार महिलाओं का हॉर्मोनल सिस्टम पुरुषों की तुलना में अधिक संवेदनशील होता है। लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर तनाव की स्थिति में आ सकता है, जिससे कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हॉर्मोन) का स्तर बढ़ जाता है। इसका असर मासिक धर्म चक्र, थायरॉयड फंक्शन और प्रजनन क्षमता पर पड़ सकता है। कई शोधों में यह भी पाया गया है कि लंबे समय तक अनियमित उपवास रखने से प्रजनन से जुड़े हॉर्मोन्स का संतुलन बिगड़ सकता है। Cooling Drinks for Summer : गर्मियों में शरीर को Cool रखने के 5 देसी तरीके पाचन और ब्लड शुगर पर असर पाचन तंत्र को नियमित समय पर भोजन की आवश्यकता होती है। लंबे समय तक खाली पेट रहने से गैस, एसिडिटी, सिरदर्द, चक्कर और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसके अलावा ब्लड शुगर लेवल में बार-बार उतार-चढ़ाव होने से कमजोरी, घबराहट और चक्कर आने की शिकायत भी हो सकती है। मांसपेशियों में कमजोरी का खतरा विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग का एक बड़ा नुकसान मसल लॉस भी हो सकता है। जब शरीर को पर्याप्त कैलोरी नहीं मिलती तो वह ऊर्जा के लिए मांसपेशियों का उपयोग करने लगता है। ऐसे में वजन तो कम दिखाई देता है, लेकिन शरीर अंदर से कमजोर होने लगता है। साथ ही सीमित समय में भोजन करने की वजह से कई बार प्रोटीन, कैल्शियम और आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। Budh Nakshatra Parivartan : 10 मार्च को बुध का नक्षत्र परिवर्तन, इन राशियों पर पड़ेगा ज्यादा प्रभाव किन लोगों को रहना चाहिए सावधान डॉक्टरों के अनुसार कुछ लोगों को इंटरमिटेंट फास्टिंग अपनाने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इनमें शामिल हैं: डायबिटीज के मरीज लो ब्लड प्रेशर वाले लोग गर्भवती महिलाएं ईटिंग डिसऑर्डर से जूझ रहे लोग विशेषज्ञों का कहना है कि वजन घटाने के लिए किसी ट्रेंड को आंख बंद करके अपनाने के बजाय संतुलित आहार, पोषक तत्वों से भरपूर भोजन और नियमित व्यायाम सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है। Weight Loss Tips : वजन नहीं घट रहा? स्लो मेटाबॉलिज्म है असली विलेन! ऐसे करें अपनी बॉडी का ‘फैट बर्न’ किसी भी नई डाइट या फास्टिंग पद्धति को शुरू करने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट से सलाह लेना जरूरी माना जाता है, ताकि शरीर को किसी तरह का नुकसान न हो।