Paper Leak Bill : केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने गिनाए कांग्रेस के पेपर लीक, बोले- UPA सरकार के समय आया था NTA
Paper Leak Bill : केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए कानून को और मजबूत बना रही है।
Paper Leak Amendment Bill 2026 : नई दिल्ली। संसद में पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए कानून को और मजबूत बना रही है। उन्होंने कहा कि संशोधन का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
5 महीने में पूरा होगा न्यायिक प्रक्रिया का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि संशोधन बिल के तहत पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। जांच अधिकतम दो महीने में पूरी होगी, जबकि ट्रायल तीन महीने के भीतर समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस तरह घटना से लेकर अदालत के फैसले तक पूरी प्रक्रिया पांच महीने से अधिक नहीं चलेगी। फैसले के खिलाफ अपील 30 दिनों के भीतर की जा सकेगी और मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की डबल बेंच से नीचे नहीं होगी।
सरकार ने कानून को बताया छात्रों के हित में बड़ा कदम
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2024 में लागू किया गया कानून देश का अपनी तरह का पहला व्यापक कानून था। अब उसका संशोधन लाकर उसे और प्रभावी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट संकल्प है कि देश के छात्रों और युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य निष्पक्ष, पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है।
कांग्रेस काल के पेपर लीक मामलों का किया उल्लेख
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह UPA के समय हुए पेपर लीक की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि, 2009- रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड; 2011- ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन; 2012- AIIMS नई दिल्ली एंट्रेंस पेपर लीक; 2013- महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन। अगर मैं इनकी लिस्ट बनाता रहूं, तो बिल पर चर्चा नहीं कर पाऊंगा... 2010- B.Ed. एंट्रेंस एग्जामिनेशन, उत्तर प्रदेश; 2012- तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन; 2009- वेस्ट बंगाल जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम। इसलिए, इस सरकार को एक खास कानून की ज़रूरत महसूस हुई... भारत सरकार के तहत चार बड़ी रिक्रूटमेंट एजेंसियां हैं- UPSC, स्टाफ सिलेक्शन कमीशन, रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड और इंस्टीट्यूट ऑफ़ बैंकिंग पर्सनल; और इसी तरह, हायर एजुकेशन में एडमिशन के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी है।
NTA भी इसी सरकार ने 2017 में बनाई थी। 1992 में—पहली बार—कांग्रेस पार्टी की अगुवाई वाली भारत सरकार से एक कॉमन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी बनाने की सिफारिश की गई थी। फिर, 2010 में, UPA के कार्यकाल के दौरान, एक कमेटी ने भी यही बात कही थी; मुझे नहीं पता कि इस पर ठीक से विचार क्यों नहीं किया गया, चाहे जो भी कारण या निजी हित रहे हों। इसलिए, मुझे लगता है कि आपको प्रधानमंत्री मोदी और इस सरकार की तारीफ़ करनी चाहिए। इसने एक ऐसा काम पूरा किया है—एक अधूरा काम—जिसे आपको खुद पूरा करना चाहिए था।
स्पीकर ने सभी दलों से मांगे रचनात्मक सुझाव
लोकसभा अध्यक्ष ने चर्चा की शुरुआत में कहा कि यह विधेयक देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष से रचनात्मक सुझाव देने की अपील करते हुए कहा कि बेहतर कानून बनने से छात्रों का भरोसा और मजबूत होगा तथा परीक्षा प्रणाली की शुचिता सुनिश्चित की जा सकेगी।