ISRO Scientists Resignation : ISRO में भारी ब्रेन ड्रेन! 1 साल में 100+ वैज्ञानिकों ने छोड़ी नौकरी, अब नियम सख्त
ISRO Scientists Resignation : अंतरिक्ष विभाग ने बताया कि ISRO के ग्रुप-ए वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफे के आवेदन दिए हैं।
ISRO Scientists Resignation : नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में पिछले एक वर्ष के दौरान 100 से अधिक वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे तथा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के आवेदन सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने नियमों को सख्त करने का फैसला किया है। अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) ने नए निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब समय से पहले रिटायरमेंट और इस्तीफे से जुड़े मामलों में अंतिम निर्णय इसरो मुख्यालय स्तर पर लिया जाएगा। सरकार का मानना है कि बड़ी संख्या में अनुभवी वैज्ञानिकों के संगठन छोड़ने से राष्ट्रीय महत्व की अंतरिक्ष परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है।
बढ़ते इस्तीफों के बाद सरकार ने बदली प्रक्रिया
अंतरिक्ष विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में स्वीकार किया गया है कि ISRO के ग्रुप-ए वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों की ओर से बड़ी संख्या में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफे के आवेदन प्राप्त हुए हैं।
इसी स्थिति को देखते हुए विभाग ने सभी प्रमुख अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्रों के लिए नई प्रक्रिया लागू की है। अब ऐसे मामलों में पहले की तरह स्थानीय स्तर पर निर्णय नहीं लिया जाएगा। सभी महत्वपूर्ण मामलों को अंतिम स्वीकृति के लिए अंतरिक्ष विभाग के पास भेजना होगा।
गगनयान जैसे मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों पर विशेष ध्यान
14 जुलाई को यू.आर. राव सैटेलाइट सेंटर और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर सहित प्रमुख संस्थानों को जारी ज्ञापन में कहा गया है कि गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े ग्रुप-ए वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोध सामान्य प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं किए जाएं।
विभाग का मानना है कि इन विशेषज्ञों की सेवाएं राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं के लिए बेहद आवश्यक हैं, इसलिए ऐसे मामलों की विस्तृत समीक्षा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
राष्ट्रीय परियोजनाओं पर असर को बताया प्रमुख कारण
सरकार ने अपने निर्देश में कहा है कि हाल के समय में बड़ी संख्या में वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के संगठन छोड़ने के अनुरोध सामने आए हैं। इनमें कई ऐसे कर्मचारी भी शामिल हैं जो गगनयान और अन्य रणनीतिक अंतरिक्ष मिशनों पर काम कर रहे हैं।
सरकार के अनुसार, यदि अनुभवी विशेषज्ञ लगातार संगठन छोड़ते हैं तो इससे राष्ट्रीय हित से जुड़े अंतरिक्ष कार्यक्रमों की गति और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसी कारण नियमों को पहले की तुलना में अधिक सख्त बनाया गया है।
2020 के प्रशासनिक बदलाव को किया वापस
नए आदेश के साथ वर्ष 2020 में लागू की गई प्रशासनिक व्यवस्था को भी बदल दिया गया है। उस समय ISRO के विभिन्न केंद्रों के निदेशकों को ग्रुप-ए वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे तथा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के आवेदन स्वीकार करने का अधिकार दिया गया था।
अब यह अधिकार सीमित कर दिया गया है। नए नियमों के अनुसार, ऐसे सभी आवेदन संबंधित केंद्र के निदेशक की स्पष्ट सिफारिश के साथ अंतरिक्ष विभाग को भेजे जाएंगे, जहां अंतिम निर्णय लिया जाएगा।