Maulana Jarjis Ansari : 'भगवान श्री कृष्ण 5 वक्त की नमाज पढ़ते थे'- मौलाना जर्जिस अंसारी के विवादित बयान से मचा बवाल
Maulana Jarjis Ansari : वीडियो में मौलाना भगवान श्रीकृष्ण और श्रीमद्भगवद्गीता के एक श्लोक का उल्लेख करते हुए दावा करते हैं कि श्रीकृष्ण पांच वक्त की नमाज पढ़ते थे।
Maulana Jarjis Ansari : उत्तर प्रदेश। कृष्ण जन्मभूमि के विवाद के बीच इटावा के मौलाना जरजिस अंसारी का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में मौलाना भगवान श्रीकृष्ण और श्रीमद्भगवद्गीता के एक श्लोक का उल्लेख करते हुए दावा करते हैं कि श्रीकृष्ण पांच वक्त की नमाज पढ़ते थे। यह वीडियो ऐसे समय चर्चा में आया है, जब कृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा मुद्दा भी सुर्खियों में है। वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई है। वहीं, कई हिंदू संगठनों ने इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
मौलाना ने गीता के श्लोक का दिया हवाला
अपने भाषण में मौलाना जरजिस अंसारी ने श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस श्लोक में पूजा के दौरान पूरे शरीर के साथ उपासना करने की बात कही गई है और इसी आधार पर उन्होंने श्रीकृष्ण को पांच वक्त की नमाज पढ़ने वाला बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोग अपने धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करेंगे तो उन्हें इस्लाम की शिक्षाएं अच्छी लगेंगी। हालांकि यह दावा मौलाना की व्यक्तिगत व्याख्या है।
क्या कहता है गीता का प्रचलित अर्थ?
श्रीमद्भगवद्गीता के छठे अध्याय का 10वां श्लोक योग और ध्यान की साधना से संबंधित माना जाता है। इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि साधक को एकांत स्थान पर रहकर, मन और इंद्रियों को नियंत्रित करते हुए, बिना किसी इच्छा और संग्रह की भावना के निरंतर ध्यान करना चाहिए।
गीता के प्रचलित भाष्यों और अधिकांश विद्वानों के अनुसार इस श्लोक का संबंध ध्यान, आत्मसंयम और मानसिक एकाग्रता से है। इसमें किसी विशेष धर्म की उपासना पद्धति या नमाज का उल्लेख नहीं किया गया है।
श्रीकृष्ण ने अर्जुन को क्यों दिया था यह उपदेश?
महाभारत के युद्ध से पहले अर्जुन मोह और संशय में पड़ जाते हैं। तब भगवान श्रीकृष्ण उन्हें कर्मयोग, ज्ञानयोग और निष्काम कर्म का महत्व समझाते हैं। इसके बाद छठे अध्याय में वे ध्यान योग का विस्तार से वर्णन करते हैं।
इस अध्याय का उद्देश्य मन को स्थिर करना, आत्मसंयम विकसित करना और साधक को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ाना बताया गया है। इसी संदर्भ में यह श्लोक आता है, जिसे ध्यान साधना के निर्देश के रूप में समझा जाता है।
वायरल वीडियो पर बढ़ी प्रतिक्रियाएं
वीडियो सामने आने के बाद कई हिंदू संगठनों ने मौलाना जरजिस अंसारी के बयान पर आपत्ति जताई है। कुछ संगठनों ने उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग भी की है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो पुराना बताया जा रहा है। फिलहाल संबंधित मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सोशल मीडिया पर वीडियो की चर्चा जारी है और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।