MP News: सीएम डॉ. मोहन यादव ने किया पंचायतन मंदिर का शिलान्यास, एकात्म धाम में गूंजे वैदिक मंत्र, जानें इसकी खासियत
MP News: खंडवा के ओंकारेश्वर में मांधाता पर्वत स्थित एकात्म धाम में भव्य पंचायतन मंदिर के निर्माण का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पत्नी, संतों और जनप्रतिनिधियों के साथ किया.

MP News: खंडवा के ओंकारेश्वर स्थित मांधाता पर्वत पर एकात्म धाम में आज भव्य पंचायतन मंदिर के निर्माण का शुभारंभ हुआ. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पत्नी सहित कार्यक्रम में शिरकत की और संतों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ विधि-विधान से हवन में आहुतियां दी और शिला पूजन किया. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 45 पवित्र शिलाओं का पूजन कर मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी गई.
संतों और धर्माचार्यों की मौजूदगी में अनुष्ठान
एकात्म धाम परिसर में संत समाज और धर्माचार्यों की मौजूदगी में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सुख-समृद्धि और शांति के लिए पूजा-अर्चना की। इस दौरान परिसर का माहौल भक्तिमय नजर आया।
जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में संत-महात्माओं के साथ जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री विजय शाह, संभाग आयुक्त भास्कर लक्ष्यकार, आईजी अनुराग, कलेक्टर ऋषव गुप्ता और पुलिस अधीक्षक अगम जैन सहित प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारी मौजूद रहे।
2195 करोड़ की लागत से बन रहा एकात्म धाम
शंकराचार्य की ज्ञान भूमि ओंकारेश्वर में 'आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास' द्वारा एकात्म धाम का तीव्र गति से विकास किया जा रहा है। परियोजना के प्रथम चरण में आचार्य शंकर की 108 फीट ऊंची 'एकात्मता की मूर्ति' पहले ही स्थापित हो चुकी है। अब द्वितीय चरण में ₹2,195 करोड़ की लागत से 'अद्वैत लोक' संग्रहालय का निर्माण प्रगति पर है, जो वैश्विक स्तर पर भारतीय दर्शन का संदेश प्रसारित करेगा।
नई पीढ़ी तक पहुंचेगा सनातन ज्ञान-CM
एकात्म धाम को भारतीय दर्शन, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक ज्ञान की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाले महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां आदिगुरु शंकराचार्य के एकात्म दर्शन और भारतीय संस्कृति के मूल विचारों को व्यापक रूप से प्रदर्शित करने की परिकल्पना है। मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि ओंकारेश्वर केवल ज्योतिर्लिंग की पवित्र भूमि ही नहीं, बल्कि आदि शंकराचार्य की तप, साधना और ज्ञान परंपरा से जुड़ी पावन धरा है। एकात्म धाम के विकास से इस आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान और व्यापक स्वरूप मिलेगा।एकात्म धाम का यह आयोजन ओंकारेश्वर की धार्मिक पहचान को और सशक्त करने के साथ ही सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक ज्ञान और भारतीय दर्शन के संदेश को देश-दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सीएम ने कहा कि सिंहस्थ से पहले एकात्म यात्रा पूरे देश में अलख जगाते हुए निकलेगी, जिसका समापन उज्जैन सिंहस्थ में होगा.
ये हैं खास बातें
- देवताओं का स्थान निर्धारण: मंदिर के केंद्र में मुख्य देवालय देवाधिदेव भगवान शिव का होगा। चारों कोनों पर उप-देवालय स्थापित होंगे—ईशान कोण में भगवान विष्णु, आग्नेय कोण में भगवान सूर्य, नैऋत्य कोण में भगवान गणेश और वायव्य कोण में भगवती शक्ति विराजमान होंगी।
- शिखर और गर्भगृह: मुख्य मंदिर का शिखर 'सोमतिलक' शैली में बनेगा, जबकि गर्भगृह 'सर्वतोभद्र' शैली पर आधारित होगा, जिसमें चारों दिशाओं से प्रवेश द्वार की व्यवस्था रहेगी।
- विशाल मंडप और स्तंभ: मुख्य मंडप में 26 फीट व्यास का एक कलात्मक गुंबद होगा। पूरे परिसर में 100 नक्काशीदार स्तंभ, 8 लघु संवर्णा (सामरण) और भव्य तोरण-द्वार निर्मित किए जाएंगे।
- आधार और निर्माण सामग्री: 16 फीट ऊंचे आधारभूत अधिष्ठान (जगति) पर स्थित इस मंदिर के निर्माण में 80,000 घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग हो रहा है। संपूर्ण मंदिर 121 स्वर्णिम कलशों से सुशोभित रहेगा।
