International Tiger Day : मप्र में बाघों की संख्या जल्द पहुंच सकती है 1000 के करीब, CM मोहन यादव ने गिनाईं उपलब्धियां
International Tiger Day : मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण को राज्य की प्राथमिकता बताते हुए इसे प्रकृति और पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान बताया।
International Tiger Day : भोपाल। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश देश में बाघ संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बना हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 की बाघ गणना के अनुसार प्रदेश में 785 बाघ दर्ज किए गए थे। सरकार को उम्मीद है कि अगली गणना में यह संख्या बढ़कर एक हजार के करीब पहुंच सकती है। मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण को राज्य की प्राथमिकता बताते हुए इसे प्रकृति और पर्यावरण की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण अभियान बताया।
बाघ और घड़ियाल संरक्षण पर सरकार का विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल और उसके आसपास का क्षेत्र ऐसा है जहां बाघ इंसानों के सबसे नजदीक प्राकृतिक वातावरण में रहते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार बाघों के साथ-साथ घड़ियालों के संरक्षण पर भी लगातार काम कर रही है।
पहले घड़ियाल संरक्षण का लाभ अधिकतर राजस्थान को मिलता था, लेकिन अब ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं कि मध्य प्रदेश में छोड़े गए घड़ियाल सुरक्षित रहकर यहीं अपना प्राकृतिक आवास विकसित करें। सरकार वन्यजीवों के सुरक्षित भविष्य के लिए लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है।
गुरु पूर्णिमा पर प्रकृति संरक्षण का संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि अंधकार से ज्ञान और प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा प्रकृति के सम्मान और संरक्षण की शिक्षा देती रही है।
वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पेड़ों में जीवन होने की अवधारणा भारत में प्राचीन समय से स्वीकार की जाती रही है। यही सोच आज पर्यावरण संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है।
वन विभाग की उपलब्धियों की सराहना
मुख्यमंत्री ने ओरछा स्थित माता महालक्ष्मी मंदिर की भव्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार के सभी विभाग महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वन विभाग के साथ कार्य करना उन्हें विशेष संतोष देता है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अन्य राज्यों के साथ वन्यजीवों के आदान-प्रदान की दिशा में भी काम कर रही है। हाथियों से होने वाली जनहानि को कम करने के लिए किए गए प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिससे मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाने में मदद मिली है।
वन्यजीव संरक्षण में सभी की भूमिका अहम
कार्यक्रम में वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने कहा कि मध्य प्रदेश का नेतृत्व हमेशा वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशील रहा है। उन्होंने कहा कि वही जंगल बेहतर माना जाता है जहां बाघ, बाघिन और उनके शावक सुरक्षित हों।
उन्होंने बताया कि बाघों का संरक्षण केवल वन्यजीवों की सुरक्षा नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और मानव जीवन की रक्षा से भी जुड़ा हुआ है। इस दिशा में वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लगातार महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
सम्मान समारोह और नए संसाधनों का लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वन्यजीव संरक्षण के लिए उपलब्ध कराए गए नए वाहनों का लोकार्पण किया। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विभागीय प्रकाशनों का विमोचन भी किया। सक्रिय वन्यजीव प्रबंधन पर आधारित वृत्तचित्रों के टीजर जारी किए गए।
राज्य वन्य प्राणी बोर्ड के पद्मश्री सम्मानित सदस्यों, वन सुरक्षा समितियों, ईको विकास समितियों, ग्राम वन समितियों और उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन कर्मियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। समारोह में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।