Chamoli Tunnel Accident : 7 मजदूरों की मौत, 3 अब भी फंसे ; CM धामी पहुंचे टनल के अंदर
Chamoli Tunnel Accident : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पीपलकोटी पहुंचे और उन्होंने मौके पर चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन का निरीक्षण किया।
Chamoli Tunnel Accident : उत्तराखंड। चमोली के पीपलकोटी में निर्माणाधीन टनल में हुए हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। गुरुवार शाम टनल के अंदर अचानक पानी और मलबा आने के बाद कई मजदूर फंस गए। हादसे के बाद से राहत और बचाव अभियान लगातार चल रहा है। अब तक 7 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है। तीन मजदूरों के अभी भी टनल के अंदर फंसे होने की जानकारी है। बचाव दल ने कई मजदूरों को बाहर निकाला है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार 14 अगस्त को पीपलकोटी पहुंचे और उन्होंने मौके पर चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन का निरीक्षण किया।
15 घंटे से जारी है रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे के बाद से रेस्क्यू टीमें लगातार टनल के अंदर पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। सुरंग में पानी और मलबा जमा होने के कारण बचाव कार्य बेहद मुश्किल हो गया है। अंदर फंसे मजदूरों तक पहुंचने के लिए टीमें सावधानी से आगे बढ़ रही हैं।
प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता टनल में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके लिए मौके पर मौजूद सभी एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय किया जा रहा है। ताजा रिपोर्टों में भी बताया गया है कि पानी और मलबे के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
सीएम धामी ने टनल के अंदर जाकर लिया जायजा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शुक्रवार को पीपलकोटी पहुंचे। उन्होंने टनल हादसे वाली जगह का स्थलीय निरीक्षण किया। सीएम ने बचाव कार्य में लगी एजेंसियों से मौके की जानकारी ली और जरूरी निर्देश दिए।
CM धामी ने कहा कि टनल में फंसे प्रत्येक श्रमिक को सुरक्षित बाहर निकालना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री इसके बाद गोपेश्वर के जिला अस्पताल जाकर घायल मजदूरों से भी मुलाकात करने वाले हैं।
14 मजदूर सुरक्षित बाहर निकाले
प्रशासन के अनुसार अब तक 14 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। इनमें से 13 घायलों का इलाज गोपेश्वर के जिला अस्पताल में चल रहा है। एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को बेहतर इलाज के लिए श्रीनगर के हायर सेंटर भेजा गया है। बचाए गए मजदूरों की हालत पर डॉक्टर लगातार नजर रख रहे हैं।
हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन को भी अलर्ट किया गया था, ताकि टनल से निकाले जाने वाले मजदूरों को तुरंत उपचार मिल सके। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में रेस्क्यू किए गए लोगों की संख्या अलग बताई गई है, इसलिए प्रशासन के ताजा आधिकारिक अपडेट को ही अंतिम आंकड़ा माना जाना चाहिए।
टनल में पानी और मलबा बना सबसे बड़ी चुनौती
अधिकारियों के मुताबिक टनल के अंदर पानी का तेज रिसाव हुआ और इसके साथ मलबा भी जमा हो गया। भूस्खलन के कारण अंदर का रास्ता बाधित हो गया। ऐसे हालात में बचाव दल के लिए फंसे मजदूरों तक पहुंचना आसान नहीं है।
टीमों को पहले मलबा हटाने और रास्ता सुरक्षित करने पर काम करना पड़ रहा है। इसके बाद फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। हादसे की शुरुआती जानकारी के अनुसार गुरुवार 13 अगस्त की शाम करीब 7 बजे यह घटना हुई थी।
NDRF, SDRF और सेना की टीमें मौके पर
बचाव अभियान में NDRF, SDRF, ITBP, सेना, पुलिस, फायर सर्विस और जिला प्रशासन की टीमें शामिल हैं। अतिरिक्त टीमें गौचर और जोशीमठ की ओर से भी घटनास्थल पर पहुंचाई गई हैं। जिला प्रशासन की टीम पूरे अभियान की निगरानी कर रही है।
मौके पर बड़ी संख्या में बचावकर्मी तैनात हैं। सभी टीमें मिलकर टनल के अंदर रास्ता बनाने और फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। सरकार की ओर से भी अभियान के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
हादसे में 7 मजदूरों की मौत
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों में प्रदीप सिंह पंवार, मुकेश उर्गम, दुर्लभ शर्मा, विजय, जितेंद्र कुमार, लोकेश्वर और भुनेश्वर के नाम बताए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रदीप सिंह पंवार टिहरी जिले के गेंवाल क्षेत्र के रहने वाले थे।
मुकेश उर्गम चमोली से बताए गए हैं। विजय और जितेंद्र कुमार झारखंड से बताए गए हैं, जबकि दुर्लभ शर्मा बिहार से संबंधित थे। मृतकों की पहचान और अन्य व्यक्तिगत विवरण प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूची से मिलान के बाद ही अंतिम माने जाने चाहिए।
गुरुवार शाम हुआ था बड़ा हादसा
जानकारी के अनुसार गुरुवार 13 अगस्त की शाम करीब 7 बजे मायापुर, पीपलकोटी स्थित निर्माणाधीन जलविद्युत परियोजना की टनल में अचानक पानी और मलबा घुस गया। उस समय मजदूर टनल के अंदर काम कर रहे थे।
अचानक पानी और मलबा आने से उन्हें बाहर निकलने का पर्याप्त समय नहीं मिल सका। कुछ मजदूर सुरक्षित बाहर निकल गए, जबकि कई अंदर फंस गए। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और आपदा राहत एजेंसियां सक्रिय हो गईं।
सरकार की पहली प्राथमिकता मजदूरों की सुरक्षा
मुख्यमंत्री धामी ने कहा है कि सरकार का पूरा ध्यान फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है। NDRF, SDRF, ITBP, सेना और जिला प्रशासन लगातार अभियान चला रहे हैं। घायलों को बेहतर इलाज देने के लिए अस्पतालों में भी व्यवस्था की गई है।
केंद्र सरकार की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिए जाने की बात भी सामने आई है। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने तक प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद रहेंगी। अभी सबसे बड़ा लक्ष्य टनल में फंसे तीनों लोगों का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है।